समूह कार्य के कौशल/ निपुणताएं - Group Work Skills
समूह कार्य के कौशल/ निपुणताएं - Group Work Skills
समूह कार्य के कौशल
निपुणता एवं कौशलता व्यवसाय की दृष्टि से अंतत्य महत्वपूर्ण गुण है। समान्यभाषा में इसके अर्थ को कार्य करने की क्षमता के रूप मे जाना जाता है। समूह कार्य प्रक्रिया में यह परम् आवश्यक होता है कि प्रत्येक कार्यकर्ता इस प्रकार की कुशलताओं से युक्त हो।
कुशलता का अर्थ
ट्रेकर ने कुशलता के अर्थ को स्पष्ट करते हुए कहा कि कार्यकर्ता की विशेष परिस्थितियों में ज्ञान एवं समय के उपयोग की क्षमता हैं।
विरजाइना रॉबिन्सन के अनुसार विशिष्ट वस्तु में परिवर्तन की प्रक्रिया को इस प्रकार गतिशील व नियंत्रित करने की क्षमता, जिससे वस्तु में होने वाला परिवर्तन उस वस्तु की दक्षता व गुण की उपयोगिता और उच्च कोटि के चिंतन द्वारा प्रभावित होता है।
वेवस्टर शब्द के अनुसार निपुणता का तात्पर्य कार्य के क्रियान्वयन व उसे पूर्ण करने के ज्ञान एवं दक्षता से है। इन परिभाषाओं से स्फ्ट होता है कि व्यक्ति जो भी निपुणता प्राप्त करता है वह उसके ज्ञान व अनुभव के आधार पर होती है। जब कोई भी व्यक्ति किसी भी कार्य को लगातार लंबे समय तक करता रहता है तो उसमें स्वाभाविक रूप से उस कार्य के प्रति निपुणता आना प्रारंभ हो जाती है।
सामूहिक कार्य में निपुणताओं के महत्वको स्पष्ट करते हुए ट्रेकर ने निम्न निपुणताओं का उल्लेख किया है:
→ उद्देश्यपूर्ण संबंध स्थापित करने करने की निपुणता
• समूह कार्यकर्ता का सर्वप्रथम उद्देश्य होता है कि वह समूह के सदस्यों को एक-दूसरे के विचारों एवं भावों को समझने में सहयोग करें और समूह को जो लक्ष्य प्राप्त करना है उसके प्रति उनका सहयोग करें।
• सामूहिक कार्यकर्ता के लिए यह आवश्यक होता है कि वह सर्वप्रथम समूह के सदस्यों को एक-दूसरे को स्वीकार करने एवं आवश्यकता अनुसार उद्देश्यों को प्राप्त करने हेतु समूह सदस्यों के सहयोग की निपुणता होनी चाहिए।
→ समूह परिस्थिति विश्लेषण की निपुणता
• कार्यकर्ता के लिए यह आवश्यक हैं कि वह समूह के मनोसामाजिक, सामाजिक, आर्थिक एवं राजनैतिक स्तर के आधार पर उसकी आवश्यकता को जानने एवं विकास स्तर को समझने की निपुणता होनी चाहिए। यह निपुणता कार्यकर्ता में प्रत्यक्ष अवलोकन के आधार पर अर्जित की जाती है।
• कार्यकर्ता के लिए आवश्यक होता है कि वह समूह सदस्यों को इस आधार पर प्रोत्साहित करे कि प्रत्येक समूह सदस्य अपने-अपने विचारों को स्पष्ट रूप से रख सके और अपने उद्देश्यों का निर्धारण कर सकें साथ ही लक्ष्यों की स्पष्टता एवं सदस्यों में अपनी शक्तियों को पहचानने और सीमाओं को टता एवं सदस्यास अ पहचानने में मदद करे।
→ समूह के साथ भाग लेने की निपुणता
• समूह कार्यकर्ता को समूह के कार्यक्रमों में भाग लेने समूह की भूमिका की व्याख्या करने, समूह को ग्रहण करने एवं समूह को परिवर्तित करने की निपूणता आवश्यक रूप से होनी चाहिए।
• समूह कार्यकर्ता में समूह सदस्यों में से नेतृत्व की खोज करने की निपुणता होनी चाहिए। साथ ही समूह सदस्यों में अपनी क्रियाओं के विषय में उत्तदायित्व स्वीकार करने की भी निपुणता आवश्यक रूप से होनी चाहिए।
→ समूह की भावनाओं से निपटने की निपुणता
• समूह कार्यकर्ता को हमेशा ही भावनात्मक रूप से मजबूत होना चाहिए। कभी भी भावनात्मक रूप से विचार नहीं किया जाना चाहिए। इसमें इस प्रकार की निपुणता होनी चाहिए कि वह अपनी भावनाओं को नियंत्रित कर सकें और प्रत्येक परिस्थिति में समूह का संचालन उचित रूप से कर सके।
• समूह कार्यकर्ता के लिए आवश्यक है कि वह समूह सदस्यों को सकारात्मक एवं नकारात्मक दोनों प्रकार से मजबूती प्रदान करे जिससे कि समूह सदस्य प्रत्येक स्थिति के लिए मजबूत हो सके। कार्यकर्ता को समूह के मध्य होने वाले आंतरिक संघर्ष से भी अवगत होने चाहिए एवं इस प्रकार के आंतरिक संघर्षों को निपटने हेतु सहायक एवं निपुण होना चाहिए।
→ कार्यक्रम के विकास में निपुणता
• समूह कार्य एक प्रगतिशील प्रक्रिया है और यह प्रक्रिया बिना रचनात्मक कार्यक्रमों के संभव नहीं हो पाती है। जब समूह कार्य प्रक्रिया को प्रारंभ किया जाता है और उसमें कार्यक्रमों का प्रारंभ किया जाता है तो कार्यकर्ता को इस बात में निपुण होना चाहिए कि कार्यक्रम इस प्रकार का हो, जिसमें समस्त सदस्यों कि रुचियां एवं आवश्यकताएँ शामिल हों।
• कार्यकर्ता को प्रत्येक स्तर पर समूह को कार्यक्रम का हिस्सा बनने के लिए प्रेरित करने की निपुणता होनी चाहिए, जिससे कि प्रत्येक सदस्य कार्यक्रम का हिस्सा बन जाए और सदस्यों में आत्मनिर्णय की क्षमता का विकास हो संपूर्ण प्रक्रिया प्रगतिशील समूह एवं कार्यकर्ता की योग्यता पर निर्भर करता है।
→ साधनों के उपयोग में निपुणता
• साधनों के उपयोग कि निपुणता प्रत्येक कार्यकर्ता के लिए एक आवश्यक गुण होता है, क्योंकि किसी भी प्रक्रिया में साधनों का उपयोग एक महत्वपूर्ण अंग माना जाता है। इस प्रक्रिया द्वारा कार्यकर्ता यह अनुभव प्राप्त करता है कि किसी भी समूह या सामुदायिक प्रक्रिया में उपलब्ध साधनों का उपयोग कैसे किया जाए, जिससे लक्ष्य को आसानी से प्राप्त किया जा सके।
• साधनों के उपयोग के संदर्भ में कार्यकर्ता को मुख्य रूप से निपुण होना चाहिए जिससे किसी भी प्रकार की कोई समस्या उत्पन्न ना हो और साधनों का उचित उपयोग किया जा सके। संस्था एवं संपूर्ण वातावरण और समुदाय मिलकर बहुत सेसाधन रखते हैं। सामाजिक सामूहिक कार्य में संस्था तथा समुदाय के इन साधनों का प्रयोग व्यक्तियों और समस्त समूह के हित के लिए जाता है। कार्यकर्ता की भूमिका केवल समूह में ही नहीं होती वरन वह समूह से बाहर भी उतनी ही भूमिका अदा करता है। वह समुदाय से संबंधित सभी आवश्यक जानकारी को एकत्रित करता है तथा समस्त सदस्यों को वह जानकारी साझा करता है, जिससे वह एक प्रकार से मध्यस्थता की भूमिका भी अदा करता है और आवश्यकता पड़ने पर समूह को उपलब्ध साधनों के उपयोग के लिए प्रेरित भी करता है।
→ मूल्यांकन में निपुणता
• मूल्यांकन एक सतत और निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। यह प्रक्रिया कार्य प्रारंभ होने के साथ ही प्रारंभ हो जाती है। इस प्रक्रिया द्वारा यह तय किया जाता है कि कार्य में कितनी सफलता प्राप्त हुई है और कार्य के दौरान क्या कमियाँ रह गई है, इस संबंधी प्रक्रिया में अभिलेखित करने में कार्यकर्ता को निपुण होना चाहिए, जिससे समूह में आने वाली समस्याओं का निपटारा किया जा सके।
• मूल्यांकन द्वारा समूह की अंतःक्रियाओं समूह की शक्तियों, सदस्यों की कमज़ोरियों, समूह के अनूभव एवं उनकी क्षमताओं का आकलन करने की निपुणता कार्यकर्ता में होनी चाहिए समूह कार्यकर्ता द्वारा निम्न स्थितियों के मूल्यांकन की निपुणता होनी चाहिए
• कार्यक्रम मूल्यांकन की निपुणता
• सदस्यों की भागीदारी का तथा अनुभव का मूल्यांकन करने की निपुणता • कार्यकर्ता द्वारा स्वयं अपनी भूमिका का मूल्यांकन करने की निपुणता
→ कार्यक्रम
→ समापन की निपुणता
• कार्यक्रम समापन में कार्यकर्ता को मुख्य रूप से निपुण होना चाहिए वह सदस्यों के कार्यों का मूल्यांकन करे। उनके तथा समूह की Achievements के बारे में तथा उनकी कमज़ोरियों के बारे में बताए ।
• कार्यकर्ता को समूह के सदस्यों के व्यक्तिगत भावों, भावनाओं तथा सफू समापन के संदर्भ में एक सकारात्मक माहौल बनाने की निपुणता होनी चाहिए, जिससे समूह के मध्य सामंजस्य कायम रह सके।
• समूह कार्यकर्ता द्वारा सदस्यों को समूह छोड़ने के लिए मानसिक रुप से तैयार करने हेतु निपुण होना चाहिए।
अत: समाज समूह कार्यकर्ता को समूह का नेतृत्व करने हेतु अनेक कौशलों की आवश्यकता होती है। इसके अतिरिक्त किंतु कुछ अन्य महत्वपूर्ण कौशलों पर चर्चा नीचे चर्चा की जा रही है:
फिलिप्स ने मुख्य रूप से चार प्रकार की समूह कार्य में कार्यकर्ता द्वारा उपयोग में लाई जाने वाली निपुणताओं का वर्णन प्रस्तुत किया है, जो कि निम्न प्रकार से है:
1. संस्था के कार्यों के प्रयोग की निपुणता
2. भावनाओं के संचार की निपुणता
3. वर्तमान की वास्तविकता के प्रयोग की निपुणता
4. सामूहिक संबंधों को उत्तेजित करने तथा उपयोग करने में निपुणता
1. संस्था के कार्यों के प्रयोग की निपुणता:
समूह कार्य प्रक्रिया संस्थाके माध्यम से ही आयोजित की जाती हैं। अनेक सामाजिक संस्थाओं के विकास के द्वारा ही समूह कार्य प्रक्रिया का विकास हुआ है। जो भी सामाजिक संस्थाएँ समाज के हित में कार्य कर रही है भले ही उनके कार्य एवं स्परूप भिन्न-भिन्न हो परंतु उनके उद्देश्य एक समान ही होते है। सर्वप्रथम कार्य प्रारंभ के दौरान कार्यकर्ता को यह जान लेना आवश्यक होता है कि जो संस्था कार्य कर रही है, वह क्या करने का प्रयास कर रही है ? सामूहिक कार्यकर्ता के लिए संस्था के कार्यों के सकारात्मक क्षेत्र हैं, जिनका उपयोग वह समूह के साथ अपने कार्यों में करता है। इस प्रकार से कार्यकर्ता को उस संस्था के कार्यों का स्पष्ट ज्ञान हो जाता है, जिस प्रकार से वह समूह की सहायता करता है और समूह को लाभन्वित करता है।
संस्था के कार्यों के उपयोग के संदर्भ में कार्यकर्ता में निम्न कुशलताओं का होना अंत्यत महत्वपूर्ण होता है
• अंर्तग्राही कुशलता
• समूह का संस्था से संबंध स्थापित करने की कुशलता
• समूह कार्य प्रक्रिया के द्वारा किस प्रकार की सहायता कि जाए इस प्रकार की कुशलता
• समूह कार्य प्रक्रिया के पश्चात भी समूह सदस्यों को समझने तथा आवश्यकतानुसार सहायता करने की निपुणता ।
• समूह को संदर्भित करने की कुशलता
3 भावनाओं के संचार की निपुणता:
इच्छाएँ या भावनाएँ व्यक्ति की प्रकृति व स्वभाव एक अंग है तथा व्यक्तित्व विकास के लिए इनका स्वास्थ विकास होना आवश्यक होता है। सहायता के आधुनिक व्यवसाय में एक सुनिश्चित भावनात्मक जीवन की महत्ता को प्रमुख रूप में मान्यता प्रदान की जाती है। मनोचिकित्सा और मनोविज्ञान दोनों विज्ञानों में व्यक्तित्व की संरचना में भावनाओं की सामान्यस्वस्थ भूमिका का अध्ययन किया गया है। इन विज्ञानों ने सामाजिक कार्य को मानव प्रगति और विकास के बारे में ज्ञान का एक आयाम दिया है। इससे समाज कार्य सहायता प्रक्रिया और अधिक प्रभावी हुई है।
व्यक्ति की मनोवैज्ञानिक मूलभूत आवश्यकता को अंतर्गत प्रेम, सुरक्षा, प्रस्थिति, भावनाओं का स्फटीकरण, उपलब्धि तथा आत्मनिर्भरता के रूप में पहचाना गया है। समूह में कार्य करना, समूह स्वीकृत लेना, समूह के तरीकों को व्यवहार में लाना यह सभी मनोसामाजिक आवश्यकताएँ है। इन आवश्यकताओं का स्त व्यक्ति-दर व्यक्ति घटता-बढ़ता रहता है। यदि इन भावनाओं का उद्देश्यपूर्ण प्रगटन नहीं होता है तो निराशा उत्पन्न होती है। अत: यदि किसी भी स्थिति के संबंध में दूसरे को बतलाना है तो उससे संबंधित भावनाएं भी स्ष्ट होनी चाहिए। इन सब प्रक्रिया में संचार का अत्यंत ही महत्वपूर्ण कार्य है संचार के माध्यम से ही संबंध स्थापित किया जाता हैं।
कार्यकर्ता में इस प्रकार की निपुणता का होना अंत्यत ही महत्पूर्ण होता है, जिससे वह अपनी भावनाओं को नियंत्रित रूप से प्रगट करें, ताकि समूह को इसका लाभ प्राप्त हो। भावनाओं के संचार हेतु कार्यकर्ता में निम्न प्रकार की कुशलता का होना महत्वपूर्ण होता है
• कार्यकर्ता को स्वयं की भावना को नियंत्रित करने उसे समझने तथा उपयोग करने की कुशलता होनी चाहिए।
• समूह के सभी सदस्यों की भावनाओं को समझने एवं उनकी भावनाओं से निपटने की कुशलता सी चाहिए।
• सामूहिक भावनाओं के संचार की निपुणता आवश्क होनी चाहिए।
4 वर्तमान की वास्तविकता के प्रयोग की निपुणता :
समूह कार्यकर्ता के लिए यह आवश्यक है कि वह समूह सदस्यों को वास्तविक स्थिति से अवगत करा सके और उसके अनुसार चलने के लिए निर्देशित कर सके। कई बार ऐसा होता है कि समूह कार्यकर्ता समूह सदस्यों की आवश्यकता की पूर्ति वर्तमान समय में नहीं कर सकता ऐसी स्थिति में कार्यकर्ता के लिए यह आवश्यक हो जाता है कि वह समूह सदस्यों को इस प्रकार की मांग को रोके और उन्हें कुंठित होने से भी बचाएं इस हेतु कार्यकर्ता समूह में सामूहिक उद्देश्योंकी क्रियाओं के लिए उपयोग करने की निपुणता होना आवश्क होता है। साथ ही यह भी आवश्यक है कि वह समूह को उत्तरदायी निर्णय लेने में सहायता कर सके।
5 सामूहिक संबंधों को उत्तेजित करने तथा उपयोग करने में निपुणता
संबंध का मानव जीवन में एक विशेष महत्व होता है। समूह कार्य में संपूर्ण प्रक्रिया की सफलता एवं असफलता मुख्य रूप से समूह के संबंधों पर निर्भर करती है। समूह कार्य में संपूर्ण सदस्योंके मध्य सकारात्मक संबंध होने चाहिए, जिससे कि एक सौहार्द पूर्ण वातावरण का निर्माण किया जा सके। कार्यकर्ता के लिए यह भी आवश्यक होता है कि यदि समूह में किसी प्रकार का कोई आपसी मनमुटाव है तो उसे अपनी कुशलता से सुलझाने का प्रयास करें और समूह को सही दिशा में निर्देशित करे। समूह कार्यकर्ता को समूह संबंधों को उत्तजित करने और संबंध के माध्यम से लक्ष्य प्राप्ती हेतु निपूर्ण होना चाहिए। इस कार्य हेतु कार्यकर्ता में निम्न प्रकार की कुशलताओं का होना आवश्यक होता है।
• सामूहिक संबंधों को सुदृढ़ करने के लिए कार्यक्रम उपयोग की निपुणता।
• सदस्यों की अंतर्निहित शक्तियों को समझने तथा उनका उपयोग करने की निपुणता ।
इस प्रकार से समूह कार्य में कार्यकर्ताओं की निपुणताओं को समझा जा सकता है जो कि प्रत्के समूह कार्यकर्ता में होना नितांत आवश्यक है इन निपुणताओं के अभाव में समूह कार्य का सफल संचालन करना असंभव प्रतीत होता हैं। अत: प्रत्येक समूह कार्यकर्ता में इस प्रकार की निपुणता कुशलता एक आवश्यक अंग होती है।
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