नशाबंदी केंद्रों एवं नशा सेवन करने वाले व्यक्तियों के साथ समूह कार्य - Group Work with De-Addiction Centers and Drug Users
नशाबंदी केंद्रों एवं नशा सेवन करने वाले व्यक्तियों के साथ समूह कार्य - Group Work with De-Addiction Centers and Drug Users
नशाबंदी केंद्रों एवं नशा सेवन करने वाले व्यक्तियों के साथ समूह कार्य
मादक द्रव्यों का सेवन / नशा/व्यसन करना आज के समाज में एक चुनौतीपूर्ण गंभीर सामाजिक समस्या बनती जा रही है, जिसने समाज के प्रत्येक वर्ग को प्रभावित किया है चाहे वह पुरूष हो या महिला, वृद्ध हो या जवान या फिर बच्चे और उच्च, निम्न या मध्यम वर्ग समाज के प्रत्येक वर्ग को इस नशाखोरी जैसी भयावह समस्या ने अपने चंगुल में कर लिया है।
समूह कार्यकर्ताओं के माध्यम से इसे दूर करने का प्रयास किया जा सकता है जिससे व्यक्ति समाज में कुशल जीवन यापन कर सके। समूह कार्यकर्ता द्वारा नियंत्रण रोकथाम और उपचार के माध्यम से इस कार्य को किया जाता है। यदि हम एक उदाहरण के रूप में समझें तो यदि समूह कार्यकर्ता एक शराबी व्यक्ति का अध्ययन करेगा तो सर्वप्रथम वह व्यक्ति के शराब पीने के कार्यकारणों का अध्ययन व्यक्ति से जुड़े समस्त पहलुओं से करेगा, जिसमें व्यक्ति के परिवार, आस-पड़ों स एवं मित्रगणों की भूमिका होगी। तत्पात निदान की योजना तैयार करेगा और फिर उपचार के माध्यम से शराब को नियंत्रित करने का प्रयास करेगा। इस प्रकार कार्यकर्ता द्वारा नशाखोरी जैसी भयानक समस्या से व्यक्ति को निजात दिलाई जा सकती है, जिसने संपूर्ण समाज को प्रभावित किया है।
सामाजिक समूह कार्यकर्ता मादक द्रव्य व्यसन करने वाले व्यक्तियों के क्षेत्र में निम्न प्रकार से अपनी भूमिका को सुनिश्चित करता है, जिसको मुख्य रूप से निम्नवत बताया जा सकता है -
1. समूह कार्यकर्ता व्यक्ति के अकेलेपन के विचारों को समूह के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर दूर कर करने का प्रयास करता है, जिससे व्यसन करने वाला प्रत्येक व्यक्ति इस का शिकार रहता है। उसे भी यह अनुभव होने लगता है कि अन्य लोग भी मेरी तरह ही सामान्य समस्याओं से ग्रसित है और इससे उसे उसके आत्मबल को संतुष्टि प्राप्त होती है।
2. समूह कार्यकर्ता समूह के माध्यम से सदस्यों को यह सीखने का अवसर प्रदान करता है कि मादक द्रव्य व्यसन कितनी बुरी आदत है, जिसको यदि नहीं छोड़ा गया तो व्यक्ति की जान तक जा सकती है। अतः कार्यकर्ता समूह के माध्यम से इससे निपटने हेतु व्यक्तियों को प्रेरित करता है, जिससे सदस्य एक दूसरे को देखकर व्यसन छोड़ने का प्रयास करते हैं।
3. समूह कार्यकर्ता द्वारा समूह के सदस्योंको द्रव्य व्यसन के संदर्भ में नई सूचनाओं को बतलाया जाता है।
4. समूह कार्यकर्ता अपने सदस्यों को भावात्मक रूप से सहयोग प्रदान करता है, जिससे कि द्रव्य व्यसन व्यक्ति बाहरी तनाव को सहने में सक्षम हो सके।
समूह सदस्यों को सामाजिक कौशलों को प्राप्त करने के लिए कार्यकर्ता सहायता करता है, ताकि वह जीवन की कठिन परिस्थितियों का सामना कर सके न कि द्रव्य मादक द्रव्यों पर निर्भर हो जाए। कोरी एंड कोरी (1987) ने समूहों की कार्य करने की शैली को प्रभावकारी बनाने के लिए महत्वपूर्ण सिद्धांत और तकनीक प्रदान की है जो कि निम्नवत है
1. मादक द्रव्यों के अंतर्गत आने वाले सभी उत्पादों के सेवन के परहेज के लिए दबाव डालना महत्वपूर्ण है।
2. समूह सदस्यों में न्यूनतम प्रोत्साहन की अति आवश्यकता होती है। प्रोत्साहन इसलिए भी आवश्यक है कि परिवार के मादक ग्रस्त रोगियों को परिवार के सदस्य समूहों में शामिल होने के लिए मजबूर करते हैं। अतः वे समूह प्रक्रिया में सहयोग प्रदान करते हैं।
3. समूह के सदस्यों में मादक ग्रसित व्यक्तियों की शारीरिक और मानसिक स्थिति में सुधार करने के योग्य तरीके का ज्ञान होना आवश्यक है। मादक ग्रसित व्यक्ति के अत्यधिक नशा करने की वजह से उनकी क्षमता नष्ट हो जाती है, सोचने की शक्ति मंद हो जाती है। अतः समूह के सदस्यों के लिए यह आवश्यक है कि विष मुक्त करने के लिए उचित दवाओं का सेवन कराएँ।
4. सामाजिक समूह में एक विशिष्ट समूह उच्च शक्ति' निर्मित किया गया है। इस प्रकार के समूह में मादक सेवन करने की वजह से मानसिक रोग से पीड़ित व्यक्तियों को रखा जाता है। इस प्रकार मानसिक रोगियों के सुधार में वृद्धि की जा सकती है।
5. समूह कार्य में सदस्यों को नवीन दृष्टिकोण का प्रयोग करने के लिए स्वतंत्रता दी जानी चाहिए।
6. सामूहिक सदस्यों को विशिष्ट कार्यक्रम आयोजित करने चाहिए जैसे कि मादक ग्रसित अपंग व्यक्तियों के लिए शारीरिक संचालन के लिए योग शिविर की व्यवस्था।
7. कुछ महत्वपूर्ण तकनीकें, जिनके माध्यम से सामाजिक कार्यकर्ता अपने उद्देश्यों को स्पष्ट रूप से जन-जन तक पहुंचा सके।
• समस्या का समाधान
• उचित सामग्री
• विरोध करना ।
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