पुनर्जागरण का सामाजिक चिंतन पर प्रभाव - Impact of Renaissance on Social Thought

पुनर्जागरण का सामाजिक चिंतन पर प्रभाव - Impact of Renaissance on Social Thought

1. पुनर्जागरण ने धार्मिक अंधविश्वास एवं पारलौकिक चिंतन के स्थान पर तार्किक एवं वैज्ञानिक चिंतन को प्रधानता दी। जिससे मानव बुद्धि को चिंतन की स्वतंत्रता प्राप्त हुई, परिणाम स्वरूप विभिन्न वैज्ञानिक अविष्कार हुए।


2. धार्मिक रूढिवादिता के विरोध के कारण यूरोप के लोगों के जीवन पर धर्म का नियंत्रण कमजोर हुआ जिससे धर्मनिरपेक्ष चिंतन की शुरूवात हुई।


3. मानवतावादी एवं भौतिकतावादी चिंतन को प्रोत्साहन मिला जो इस बात पर बल देता था कि मानव से अद्भुत कुछ भी नहीं। मानव एक महान चमत्कार है। अपनी चिंतन शाक्ति बुद्धि के कारण वह समस्त प्राणियों में श्रेष्ठ है।


4. पुनर्जागरण में समाज के प्रति नये दृष्टिकोण को जन्म दिया जो प्रकृतिक घटनाओं के साथ सामाजिक घटनाओं का भी निरीक्षण, परीक्षण जैसी तार्किक एवं वैज्ञानिक पद्धतियों के माध्यम से अध्ययन पर बल दिया। इस तरह से पुनर्जागरण ने मानवीय चिंतन को अंधविश्वासों तथा रूढिवादी परम्पराओं से मुक्त कर तर्क एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण की स्थापना की इससे मानव बुद्धि को ज्ञान एवं विज्ञान के क्षेत्र में असीमित अवसर प्राप्त हुए।