संदर्भ-समूह के महत्त्व - Importance Of Reference Group
संदर्भ-समूह के महत्त्व - Importance Of Reference Group
संदर्भ समूहों को परिभाषित करते हुए, न्यूकॉब तथा टर्नर ने कहा है कि एक संदर्भ-समूह वह समूह है जिसका व्यक्ति तुलना के लिए एक प्रामाणिक समूह के रूप में प्रयोग करता है, अर्थात एक ऐसा समूह जिससे व्यक्ति अपने मूल्य प्राप्त करता है।
डॉ. एस. सी. दुबे के अनुसार संदर्भ-समूह वह समूह होता है जिसके नियमों, व्यवहार प्रतिमानों, मनोवृत्तियों, आदर्शों एवं मूल्यों को व्यक्ति आदर्श मानकर अपने आचरण या व्यवहार में ढालने का प्रयत्न करता है। यह वह समूह है, जिसका अस्तित्व प्रायः व्यक्ति के मस्तिष्क में होता है।
अतः इन परिभाषाओं के आधार पर कहा जा सकता है कि वर्तमान समय में मनुष्य को अनेक समस्याओं एवं परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। आज व्यक्ति यह चाहता है कि वह अपने को किसी ऐसे समूह से संबंधित
कर ले जिसकी समाज में प्रतिष्ठा हो तथा साथ ही जिसके माध्यम से उसकी आवश्यकताओं और अभिलाषाओं की पूर्ति हो सके। संदर्भ-समूह व्यक्ति की उच्च अभिलाषाओं का ही परिणाम है। इसी प्रकार व्यक्ति के व्यवहार पर उसके संदर्भ-समूह (Reference-Group) का भी काफी प्रभाव पड़ता है। यह बात अवश्य है कि अलग अलग व्यक्तियों के संदर्भ समूह भिन्न भिन्न होते हैं। यह भी संभव है कि कई व्यक्तियों का एक संदर्भ-समूह हो इतना निश्चित है कि वह संदर्भ समूह जिससे व्यक्ति अपने को संबंधितमानता है अर्थात जिसका वह सदस्य तो नहीं है परंतु जिसका सदस्य बनने की वह आकांक्षा या अभिलाषा रखता है, उसके सम्मुख एक व्यवहार प्रतिमान प्रस्तुत करता है।
संदर्भ समूह का महत्व
संदर्भ समूहों का मानव जीवन में अत्यंत ही महत्व है। संदर्भ समूह के महत्व को निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से समझा जा सकता है-
1. व्यक्ति की सामाजिक स्थिति को ऊँचा उठाने में सहायक:- संदर्भ समूह व्यक्ति की सामाजिक स्थिति को ऊँचा उठाने में अधिक सहायक होता है। समाज में व्यक्ति किसी न किसी समूह का सदस्य अवश्य ही रहता है, इसलिए वह अपने लिए किसी संदर्भ-समूह को चुन लेता है और उसके मूल्यों आदर्शों एवं आचरणों को अपने व्यक्तित्व में ढालने का प्रयत्न करता है तो इस बात की संभावना रहती है कि कालांतर में उसकी सामाजिक स्थिति ऊँची उठ जाए। अतः प्रकार संदर्भ समूह के माध्यम से वह अपनी सामाजिक स्थिति को ऊँचा उठा सकता है।
2. सामाजीकरण हेतु - सामाजीकरण प्रक्रिया मनुष्य के जन्म के साथ ही प्रारंभ हो जाती है वह जन्म से ही ऐसा व्यवहार करना प्रारंभ कर देता है जैसा व्यवहार उसका समूह कर रहा होता है। व्यक्ति अपने संदर्भ समूह की अभिवृत्तियों मूल्यों, आदर्शों, आचरणों एवं व्यवहारो- प्रतिमानों को अपना लेता है। वह उसी प्रकार का व्यवहार करने लगता है जिस प्रकार के व्यवहार की उसके संदर्भ-समूह के सदस्यों से अपेक्षा की जाती है।
3. सामाजिक गतिशीलता - समाज को गतिशीलता प्रदान करने में संदर्भ समूह का अत्यंत ही महत्व होता है। एक समाज विशेष में सामाजिक गतिशीलता को बढ़ाने में संदर्भ समूह सिद्धांत सहायक प्रमाणित हुआ है। तथापि इस सिद्धांत का महत्व इस तथ्य में है कि यह हमें समाज के समूह-व्यवहार तथा उस दिशा, जिसमें किसी विशेष सामाजिक पर्यावरण में व्यक्ति का व्यवहार बदल सकता है, के विषय में ज्ञान कराता है। यह वर्तमान औद्योगीकृत एवं जटिल समाज में वर्तमान खिंचावों एवं दबावों की मनोवैज्ञानिकव्याख्या में सहायक हो सकता है।
समूहों के लाभ
सामाजिक जीवन में ही मानवीय आवश्यकताओं की पूर्ति से लेकर समस्त सामाजिक आर्थिक एवं राजनैतिक कार्य समूहों के माध्यम से ही संपन्न हो पाते हैं। इसके अतिरिक्त समूहों के अन्य लाभों को निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से समझा जा सकता है
> मानव अपनी लगभग सभी आवश्यकताओं की पूर्ति समूह के माध्यम से ही करता है। चाहें वह मनोरंजन संबंधी हो या रोज़गार संबंधी -
1. यदि किसी समस्या का समाधान समूह के माध्यम से किया जाए तो उस समस्या को बेहतर तरीके से हल किया जा सकता है।
2. समूह सदस्यता के माध्यम से हम दान-धर्म, परोपकार, दया, करूणा, उत्तरदायित्व तथा इसी तरह के अन्य कार्यों को कर सकते है।
3. चाहें मित्रता हो, प्रेम हो, दुःख हो या सुख हो इन सभी कार्यों हेतु समूह अपनी भूमिका निभाते हैं।
वर्तमान समय में सरकारी एवं गैर-सरकारी योजनाओं परियोजनाओं में समूह संबंधी कार्यों को अधिक प्रधानता दी जा रही है। स्वयं सहायता समूह (Self Help Group) आदि कार्यक्रमों के माध्यम से महिलाओं में समूह की भावना जाग्रत कर उन्हें सशक्त करने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही मिल-जुलकर समस्याओं का समाधान एवं आजीविका के साधन को कैसे खोजा जाता है? यह समूह के माध्यम से पूर्ण किया जा रहा है। अनेक अध्ययन करने के पश्चात यह निर्णय निकलकर सामने आ रहे हैं कि व्यक्ति और समाज के विकास में समूहों का अत्यंत ही महत्व है और इन समूहों को और अधिक सशक्त बनाने की आवश्यकता है। समाज कार्य अभ्यास में भी समूह की समझ प्रत्येक कार्यकर्ता को होनी चाहिए, जिससे कि वह समाज में जाकर समस्याओं का समाधान उचित प्रकार से कर सके।
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