औद्योगिक क्रांति - Industrial Revolution

औद्योगिक क्रांति - Industrial Revolution

इंग्लैंड में व्यापार एवं वाणिज्य का विकास होने के बाद 18वीं शताब्दी में यात्रिक आविष्कार के कारण उत्पादन व्यवस्था में क्रांतिकारी परिवर्तन हो रहे थे। जहां लघु एवं कुटीर उद्योगो का स्थान बड़े-बड़े कारखाने ले रहे थे। वस्तुओं के उत्पादन में व्यापक वृद्धि हो रही थी। साथ ही साथ यातायात एवं संचार के साधनों, व्यापारिक संगठनों का तेजी से विकास हो रहा था। उत्पादन व्यवस्था एवं आर्थिक व्यवस्था में होने वाले इस क्रांतिकारी परिवर्तन को ही औद्योगिक क्रांति कहा गया। जिसने इंग्लैंड की आर्थिक व्यवस्था ही नही अपितु सामाजिक व्यवस्था को भी पूरी तरह से बदल दिया। बाद में जिसका प्रभाव पूरे विश्व पर पड़ा। औद्योगिक क्रांति क्या है?, इस क्रांति के कारण कौन से है? इस क्रांति के प्रभाव क्या हुए? इस अध्याय में हम इन्हीं तथ्यों पर विचार करेंगे।

18 वीं शताब्दी में इंग्लैंड में उत्पादन विधियों तथा यान्त्रिक अविष्कारों के कारण वस्तु उत्पादन, यातायात एवं संचार के साधनों में जो व्यापक परिवर्तन हुएं उन्होनें सम्पूर्ण उत्पादन व्यवस्था को ही बदल दिया। जिसके फलस्वरूप लघु एवं कुटीर उद्योगों के स्थान पर बर्डे कारखाने स्थापित होने लगे। वाष्प यंत्रों द्वारा संचालित इन कारखानों के माध्यम से कम लागत पर अधिक उत्पादन होने लगा। जिसके कारण सामाजिक, आर्थिक व्यवस्था में व्यापक बदलाव आने लगे। बदलाव की यह प्रक्रिया अत्यधिक तीव्र और बड़े पैमाने पर हुई। इसी कारण इतिहासकार अर्नाल्ड टायनवी अपनी पुस्तक 18 वीं शताब्दी की औद्योगिक क्रांति' में इन परिवर्तनों के लिए सर्वप्रथम औद्योगिक क्रांति' शब्द का प्रयोग किया।


औद्योगिक क्रांति सुनियोजित और एकाएक घटना वाली घटना नही बल्कि कई क्रमिक घटनाओं का व्यापक परिणाम थी। जिसने इंग्लैंड ही नही अपितु सम्पूर्ण विश्व के मानवीय समाज को प्रभावित किया। देखा जाय तो इसकी शुरूवात वैज्ञानिक क्रांति एवं मशीनीकरण के बाद ही हो गयी थी। लेकिन कुछ विचारकों का मानना है कि औपचारिक रूप से इंग्लैंड में सन 1760 से 1830 के बीच औद्योगिक क्रांति की घटना प्रभावी रूप से घटी। प्रारम्भिक अवस्था में औद्योगिक क्रांति सर्वाधिक प्रभाव वस्त्र एवं खनन उद्योग पर पड़ा जिसके लिए इंग्लैंड में सर्वाधिक अनुकूल दशाएं मौजूद थी।