जीवन कौशल शिक्षा कार्यक्रम- Life Skills Education Program
जीवन कौशल शिक्षा कार्यक्रम- Life Skills Education Program
जीवन कौशल शिक्षा कार्यक्रम
संपूर्ण विश्व में जीवन कौशल शिक्षा कार्यक्रम के क्षेत्रों में बड़ी तीव्रता के साथ वृद्धि को देखा जा सकता है। भिन्न-भिन्न संस्कृतियों के माध्यम से जीवन कौशल की मांग को देखा जा सकता है। अनेक भिन्नताओं को ध्यान में रखते हुए जीवन कौशल शिक्षा के विभिन्न तत्वों को सदस्यों की आवश्यकतानुसार व्यापक और सामान्य बनाने का प्रयास किया गया है। अनेक विद्वानों ने जीवन कौशल शिक्षा को अपने शब्दों में समझाने का प्रयास किया है किंतु आज तक कोई सर्वमान्य परिभाषा विकसित नहीं कि जा सकी है। व्यक्ति की आवश्यकता एवं स्थानीय स्थितियों के अनुसार विभिन्न जीवन कौशलों का प्रयोग किया जाता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने युवा वर्ग के लिए जीवन कौशलों का विशिष्टीकरण किया है तथा इस विषय को ध्यान में रखते हुए जीवन कौशलों के क्षेत्र में कार्य करने वाले शिक्षकों और व्यावसायिकों हेतु महत्वपूर्ण कुछ मार्गदर्शन उपलब्ध कराये हैं।
WHO द्वारा जीवन कौशल शिक्षा हेतु विशेष रूप से चल प्रदान किया जाता है। सर्वप्रथम वर्ष 1977 में WHO द्वारा जीवन कौशल क्षेत्र के विभिन्न मुद्दों को उठाया गया और इसको बेहतर बनाने हेतु अनेक प्रकार के शोध किए गए। “जीवन कौशल जीवित कौशल अथवा अनुकूलता और सकारात्मक व्यवहार के लिए योग्यताएँ व सक्षमताएँ हैं जो व्यक्ति को दैनिक जीवन की आवश्यकताओं तथा चुनौतियों से निपटने के लिए सक्षम व प्रभावी रूप से तैयार करती है, उसे योग्य बनाती हैं।"
WHO ने 1977 में मुख्य रूप से निम्नकौशलों को बताया है, जिनके आधार पर उसने कहा कि इनकी सहायता से समाज में परिवर्तन किया जा सकता है।
• आलोचनात्मक विचारधारा: आलोचनात्मक विचारधारा के माध्यम सूचना को विश्लेषित करने का प्रयास किया जाता है एवं उद्देश्यपूर्ण तरीके में अनुभव प्राप्त किए जाते हैं।
• रचनात्मक विचारधारा: इस विचारधारा के माध्यम से ऐसी योग्यता का विकास किया जाता है जिससे कि व्यक्ति स्वयं ही प्रत्यक्ष अनुभव से आगे देखने की क्षमता प्राप्त करता है। यह व्यक्ति के जीवन में नवीनता और लचीलापन लाती है।
• निर्णय लेना: अनेक प्रभावकारी कार्यों को करने के पश्चात उपलब्ध विकल्पों में से उपयुक्त विकल्प की पहचान कर उपयोग करने का प्रयास किया जाता है जिससे प्रभावकारी निर्णय लिए जा सकते हैं।"
• समस्या समाधान करना: निर्णय लेने की प्रक्रिया के पश्चात उपयुक्त विकल्प की खोज कर समस्या समाधान का प्रयास किया जाता है जिससे सकारात्मक परिणाम प्राप्त किए जा सकें।
• अन्तवैयक्तिक संबंध: अंतवैयक्तिक संबंध के माध्यम से दूसरे लोगों के साथ हमारे संबंधों को समझने का प्रयास किया जाता है। यह सिखाया जाता है की हैं कि दूसरे व्यक्तियों के साथ किस प्रकार का व्यवहार किया जाए। यह मित्रों या परिवार के सदस्यों से संबंधों को बनाए रखने में सहायता करता है और हमें सकारात्मक संबंध स्थापित करने के योग्य भी बनाता है।
• प्रभावकारी संचार (संप्रेषण): इस कौशल के माध्यम से प्रक्रिया में उपयुक्त तरीके से संचार करना शामिल होता है। इसमें मौखिक तथा गैर-मौखिक दोनों ही माध्यमों से व्यक्ति में अपनी बातें रखने की योग्यता का विकास किया जाता है जिससे व्यक्ति में व्याप्त भय, कुंठा को दूर किया जा सके।
• मनोभावों साथ साझेदारी करना: इस योग्यता के माध्यम से दूसरे व्यक्ति के मनोभावों को समझने का प्रयास किया जाता है।
• तनाव की स्थिति से निपटना: प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में किसी-न-किसी प्रकार कष्ट या तनाव होता है जिससे उसका समस्त सांसारिक जीवन प्रभावित होता है। इस योग्यता के माध्यम से व्यक्ति की आवश्यकता एवं समस्या को जानकर प्रभावी रूप से हल करने का प्रयास किया जाता हैं।
• स्व-जागरूकता: इस प्रक्रिया में व्यक्ति स्वयं की पहचान करता है। वह अपनी ताकतों एवं कमजोरियों
से अवगत होता है और आवश्यकतानुसार परिवर्तन का स्वयं में जागरूकता लाने का प्रयास करता है।
• तदानुभूतिः तदानुभूति की विधा से व्यक्ति दूसरों को महसूस करने का प्रयास करता वह इस विधा के माध्यम से अन्य व्यक्ति जीवन शैली को जानने का प्रयास करता है।
अत: उपयुक्त तथ्यों के आधार पर कहा जा सकता है कि जीवन कौशल एक व्यापक विषय है, जिसके आधार पर विभिन्न विषयों और विभिन्न क्षेत्रों को शामिल किया जाता है। इसका अंतिम लक्ष्य स्व जानकारी, आत्म प्रतिष्ठा तथा अन्य को स्वीकार करने की प्रवृत्ति है।
वार्तालाप में शामिल हों