कार्यक्रम नियोजन के सिद्धांत - Principles of Program Planning
कार्यक्रम नियोजन के सिद्धांत - Principles of Program Planning
कार्यक्रम नियोजन के सिद्धांत
किसी भी कार्य को सुव्यवस्थित और सुनियोजित तरीके से क्रियान्वित करने हेतु कुछ आवश्यक सिद्धांतों का पालन करना अत्यंत आवश्यक होता है, जिनके आधार पर कार्य को आसानी से संपन्न किया जा सकता है। इन सिद्धांतों को निम्न प्रकार से देखा जा सकता है:
• किसी भी कार्यक्रम का उपयोग समूह चिकित्सा के रूप में किया जाना चाहिए। अर्थात इसका तात्पर्य है कि किसी भी कार्यक्रम का उद्देश्य लघुकालीन न होकर दीर्घकालीन और स्थायी प्रभावकारी होना चाहिए।
• समूह सदस्यों को निर्णय लेने का अधिकार होना चाहिए।
• कार्यक्रम इस प्रकार का हो जिससे समूह प्रक्रिया को परिवर्तित किया जा सके।
• सदस्यों की आवश्यकताओं, समस्याओं, क्षमताओं एवं अभिस्चियों के अनुसार कार्यक्रम का आयोजन होना चाहिए।
• प्रत्येक सदस्य में उत्तरदायित्व की भावना का विकास हो।
• समय-समय पर कार्यक्रम के प्रभाव का मूल्यांकन होना चाहिए।
• कार्यक्रम इस आधार पर हो जिससे कि समूह के लक्ष्य को आसानी से प्राप्त किया जा सके। इन सिद्धांतों के आधार पर कहा जा सकता है कि कार्यक्रम नियोजन प्रक्रिया में
• समय-समय पर कार्यक्रम के प्रभाव का मूल्यांकन होना चाहिए।
• लक्ष्य स्थापित करना
• सदस्यों को उत्साहित करना
• लक्ष्यों की दिशा में कार्यक्रम नियोजन करना
• समूह का अनुमोदन प्राप्त करना
• व्यक्ति और उपसमूह की जिम्मेदारी निर्धारित करना
• कार्यक्रम का कार्यन्वयन करना
• सर्वाधिक मूल्यांकन और आधार सामग्री उपलब्ध करना
• अनुवर्ती कार्यवाही करना सम्मिलित है।
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