सामूहिक कार्य में कार्यक्रम एक प्रक्रिया के रूप में - Program as a Process in Group Work
सामूहिक कार्य में कार्यक्रम एक प्रक्रिया के रूप में - Program as a Process in Group Work
सामूहिक कार्य में कार्यक्रम एक प्रक्रिया के रूप मेंट्रैकर ने सामाजिक समूह कार्य में कार्यक्रम के महत्व को स्पष्ट करते हुए निम्न प्रक्रिया के रूप में दर्शाया है:
कार्यक्रम के माध्यम के रूप में नाटकों, मनोरंजन, संगीत, नृत्य, वाद-विवाद, वार्तालाप, खेलकूद, कला, शिल्प आदि कार्यक्रम को लिया जाता हैं। ये कार्यक्रम व्यक्तिकरण की प्रक्रिया के माध्यम से व्यक्तिकरण के विशिष्ट साधन होते हैं, जिनके द्वारा समूह किसी विशेष क्षेत्र में क्रियाएं संपन्न करता है।
समूह कार्यकर्ता सर्वप्रथम कार्यक्रम बनाने के लि को संचालित करने हेतु समूह को कार्यात्मक संगठन बनाने के लिए सहायता करता है। कार्यकर्ता का यह प्रयास होता है कि वह समूह सदस्यों को कार्यक्रम की विषय वस्तु एवं क्षेत्र से अवगत कराए साथ ही इसके पूर्व समूह सदस्यों की रूचियों से भी वह अवगत हो जाए। कार्यकर्ता समूह की सहायता इस प्रकार करता है कि समूह सदस्यों अपने संसाधनों की पहचान कर सकें, ताकि वह समूह की समस्या का निपटारा स्वयं ही कर सकें। ट्रेकर ने बताया कि कार्यकर्ता का संबंध मुख्यरूप से तीन बातों से होता है:
1. क्या कार्यक्रम है (अर्थात कार्यक्रम की विषयवस्तु)
2. कार्यक्रम किस प्रकार चलेगा, और
3. इस माध्यम से कार्यक्रम क्यों चलाया जायेगा।
इस प्रकार यह स्पष्ट होता है कि कार्यक्रम के तीन आवश्यक अंग है।
कार्यक्रम के प्रमुख अंग
कार्यक्रम की व्याख्या में कार्यक्रम के निम्नलिखित तीन अंगों का उल्लेख आवश्यक है
1. विषयवस्तु एवं क्षेत्र
कार्यक्रम की विषय वस्तु से तात्पर्य है कि जो कार्यक्रम समूह द्वारा संचालित किया जा रहा हैं उसमें किन-किन क्रियाओं एवं गतिविधियों का समावेश किया जा रहा है एवं समूह क्या अनुभव प्राप्त कर रहा है और उसका विकास किस दिशा में हो रहा है। कार्यक्रम की विषयवस्तु को मुख्य रूप से मनोरंजन, शिक्षा, मनोवैज्ञानिक सहायता, शारीरिक विकास इत्यादि के क्षेत्र में देखा जा सकता है।
2. माध्यम
माध्यम से तात्पर्य उन साधनों से है जिनका उपयोग समूह अपने अनुभव के लिए करता है कार्यकर्ता द्वारा क्षेत्र एवं विषय-वस्तु के चयन करने के पश्चात कार्यक्रम के कार्यान्वयन के लिए एक माध्यम निर्धारित करता है। कार्यकर्ता द्वारा आवश्यक साधनों का उपयोग कर समूह की विभिन्न क्रियाओं को आयोजित करने का प्रयास करता हैं। कार्यकर्ता द्वारा समूह कार्य करते समय मुख्य रूप से निम्न माध्यमों को लिया जाता हैं, जैसे- नाच, गाना, कहानी, ड्रामा, खेल, कला आदि । समूह सदस्यों को इन कार्यक्रमों के माध्यम से केवल रचनात्मक सहयोग प्राप्त नहीं होता वरन समूह की आवश्यकताओं को समझने में भी सहायता मिलती है। जैसे यदि किसी नाटक के माध्यम से स्वास्थ्य की समस्याओं को दूर करने हेतु उसके उपायों के बारेमें बताया जा रहा है तो समूह के सदस्यों में केवल स्वास्थ्य के विषय में जानकारी प्राप्त नहीं होती, बल्कि सदस्यों को सामुदायिक स्वास्थ्य स्तर की भी जानकारी प्राप्त हो जाती है।
3. कार्यक्रम के सम्पादन की प्रणाली / पद्धति
कार्यक्रम के संपादन प्रणाली अथवा पद्धति से तात्पर्य समूह की संपूर्ण प्रक्रिया से है। कार्यकर्ता का सर्वप्रथम दायित्व होता है कि वह सदस्यों की आवश्यकताओं एवं समस्याओं की पहचान करसमूह को कार्यात्मक संगठन के रूप में संगठित करे, जिससे समूह अपने निर्णय लेने हेतु स्वयं सक्षम बन सके। इस प्रक्रिया में वह कार्यक्रम की विषय वस्तु एवं माध्यमों को निर्धारित कर कार्यक्रम को संचालित करने का प्रयास करता है और आवश्यक निदान करने का प्रयास करता है। साथ ही साथ अंत में उपचार की प्रक्रिया एवं समापन प्रक्रिया को संपादित करता है।
4.3 कार्यक्रम की प्रकृति तथा उद्देश्य
किसी भी कार्यक्रम की सफलता का प्रभाव सदस्यों के व्यवहार मूल्यांकन द्वारा ज्ञात होता है। कार्यक्रम के माध्यम से व्यक्ति के जीवन के सामान्य अनुभवों का निरूपण किया जाता है, जो व्यक्ति विशेष के लिए विकास की दृष्टि से अर्थपूर्ण होते हैं। समाज कार्य की समूह कार्य प्रणाली मुख्य रूप से मनोरंजन पर आधारित कार्यों को क्रियान्वित करती है। इस प्रकार के मनोरंजनात्मक कार्यक्रमों के माध्यम से सभी सदस्यों की सहभागिता पर जोर दिया जाता है, जिससे कि समूह सदस्यों में हम की भावना का भी विकास किया जा सके। साथ ही साथ व्यक्ति अपने खाली समय में सामूहिक कार्यक्रमों में भाग लेता है और नए प्रयोगों के माध्यम से कुछ नया सीखने का प्रयास करता है। वह समाज के प्रति अपनी जवाबदारी एवं उत्तरदायित्व का भी विकास करता है।
समूह कार्य प्रक्रिया में कार्यक्रम की सफलता एवं असफलता कार्यकर्ता की दक्षता एवं निपुणता पर अत्यधिक निर्भर करती है। कार्यकर्ता द्वारा अपनी कुशलता एवं निपुणता के आधार पर ही कार्यक्रमों का निर्माण किया जाता है। और यह कार्यक्रम कार्यकर्ता अपने व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर आयोजित करने का प्रयास करता है जो कि व्यक्ति के विकास हेतु अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। कार्यकर्ता द्वारा निम्नउद्देश्यों को ध्यान में रखकर कार्यक्रम को क्रियान्वयन किया जाता है:
• समूह सदस्यों में हम की भावना का विकास करने हेतु ।
• समूह सदस्यों में अपने-अपने उत्तरदायित्व निभाने की योग्यता का विकास करने हेतु ।
• व्यक्ति के व्यक्तित्व विकास हेतु।
• प्रत्येक समूह सदस्य की सहभागिता निर्धारित एवं सुनिश्चित करने हेतु
• प्रत्येक समूह सदस्य को अपने व्यक्तिगत जीवन के सामान्य अनुभवों से सीख लेते हेतु प्रेरित करना एवं
• समाज के प्रत्येक सदस्य की जानकारी के स्तर में वृद्धि करना।
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