कार्यक्रम नियोजन - Program Planning

कार्यक्रम नियोजन - Program Planning


कार्यक्रम नियोजन

कार्यक्रम की संपूर्ण प्रक्रिया के अध्ययन पश्चात नियोजन को समझना भी अत्यंत आवश्यक होता है, क्योंकि कार्यक्रम-नियोजन द्वारा ही समूह सदस्यों द्वारा लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। नियोजन किसी भी कार्य को करने का एक सुव्यवस्थित और सुनियोजित तरीका है जिससे लक्ष्यों को आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। नियोजन के अंतर्गत विद्यमान स्थितियों तथा संभावित परिवर्तनों की उपयोगिता को ध्यान में रखकर एक व्यवस्थित तथा सुसंगठित रूपरेखा तैयार की जाती है, जिससे भविष्य के परिवर्तनों को अपेक्षित लक्ष्यों के अनुरूप नियंत्रित, निर्देशित तथा संशोधित किया जा सके। समाजशास्त्रीय शब्दकोष में नियोजन की धारणा को निम्न प्रकार से स्पष्ट किया गया है :-

“नियोजन लक्ष्यों का आरोपण, उनकी पूर्ति के लिए साधनों की व्यवस्था और क्रियाओं के व्यवस्थित रूपों, जो कि सामान्य सामाजिक व्यवस्था से उत्पन्न होते हैं, का प्रयोग है।”

समूह का निर्माण हमेशा ही सुनियोजित होना चाहिए। सामूहिक कार्यकर्ता द्वारा सुनियोजित तरीके से समूह निर्माण का कार्य किया जाता है। यदि सामूहिक कार्यकर्ता नियोजित तरीके से कार्य करेगा तो निश्चित ही उसे लक्ष्य प्राप्त होगी। लक्ष्य नियोजन का सिद्धांत लक्ष्य प्राप्ति में अत्यंत ही सहायक होता है। कार्यकर्ता निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से ही कार्य करता है, जिससे उसे कार्य करने में आसानी होती है

• विकास के लक्ष्यों एवं मूल्यों का निर्धारण करना।


• परिस्थितियों का विश्लेषण करना।


• वर्तमान सेवाओं में गुणात्मक एवं परिमाणात्मक दृष्टि सेपाई जाने वाली कमियों की एवं परम जानकारी।

• विशिष्ट उद्देश्यों तथा रणनीतियों का निर्धारण


आगत लक्ष्यों, क्षेत्रों, साधन आदि का निर्धारण।


• प्रशिक्षण तथा संचार प्रक्रिया की सीमाओं की जानकारी।


क्रिया नियोजन तथा कार्यों का दस्तावेजीकरण करने के महत्व का ज्ञान होना। 


• कार्य करने हेतु आवश्यक उपकरणों के निर्माण की जानकारी का होना।


• संभावित साधनों-संसाधनों के उपलब्धता की जानकारी।


• शक्ति के साधनों का निर्धारण।

• समूह के सदस्यों की आर्थिक, सामाजिक, राजनैतिक, भौगोलिक और वर्तमान स्थिति के ज्ञान, अनुभव एवं जीवन स्तर की पहचान करना।


इसके अतिरिक्त समूह कार्यकर्ता को समूह सदस्य संख्या शक्ति के स्रोत, उद्देश्य तथा लक्ष्यों के बीच संतुलन स्थापित कर यह ध्यान रखना पड़ता है, जिससे कि समूह कार्य में कार्यक्रम को नियोजन उचित प्रकार किया जा सके।