स्व-सहायता समूह का उद्देश्य - Purpose of Self Help Group
स्व-सहायता समूह का उद्देश्य - Purpose of Self Help Group
स्व-सहायता समूह का उद्देश्य
1. गरीबों के बीच बचत आदत विकास करने का माध्यम।
2. बृहत पैमाने पर संसाधन की उपलब्धता
3. एक स्थान से बेहतर तकनीकी एवं बौद्धिक ज्ञानवर्द्धन की सुविधा।
4. अपने क्षेत्र में ही आपातकालीन, उपयोग एवं उत्पादन कार्य हेतु कर्ज की उपलब्धता
5. विभिन्न प्रकार का प्रोत्साहन सहायता का उपलब्ध होना।
6. स्वंत्रता, समानता, आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण सुनिश्चित होना।
7. महिला और कमज़ोर वर्गों का सशक्तिकरण ।
स्वयं सहायता समूह बैंक के चयन हेतु मापदंड
1. समूह के सदस्यों की संख्या 10 से 20 के बीच होनी चाहिए।
2. समूह निबंधित भी हो सकता है और नहीं भी
3. समूह को अपने लिए एक आचार संहिता बनानी चाहिए जो सभी कोबाँध सके।
4. आंतरिक बचत प्रक्रिया समूह की मूलाधार है। अतः यह भावना प्रत्येक सदस्य में होनी चाहिए।
5. सदस्यों को प्रदत्त ऋण और बचत की ब्याज दर उनके द्वारा ही तय की जानी चाहिए।
6. समूह को लोकतांत्रिक ढंग से कार्य करना चाहिए जिसमें सदस्यों को विचारों के आदान-प्रदान व सहभागिता की छूट हो।
7. सभी समूह को सामान्य रिकार्ड रखना चाहिए।
8. समूह कम-कम-से छह माह से सक्रिय रूप से अस्तित्व में हो और वे दूसरे बैंक का डीफाल्टर न हो।
9. समूह की स्थापना के औचित्य तथा इसके उद्देश्यों के प्रति बैंक संतुष्ट होना चाहिए।
स्वयं सेवी संस्थाओं की भूमिका
स्व-सहायता समूह के निर्माण से लेकर संपूर्ण क्रियान्वान क्रार्यक्रमों तक स्वयं सेवी संस्थाओं ने अपनी महती भूमिका अदा की है, जिसे निम्न बिंदुओं के माध्य से समझा जा सकता है:
1. समस्त ग्रामीणों में जनजागरूकता उत्पन्न करना।
2. समूह सदस्यों में बचत की भावना को प्रोत्साहित करते हुए संस्थागत और व्यक्तिगत विकास की ओर ले जाना।
3. समूह के सदस्यों को सभी दस्तावेजों, जैसे- खाता-बही इत्यादि का रख-रखाव करना एवं बैठक संचालन और कोष प्रबंधन हेतु शिक्षण प्रशिक्षण का आयोजन करना।
4. बैंक के सहबद्ध, सभी गैर सरकारी संगठनों को एक सुविधाजनक संस्थान के रूप में कार्य कर करने हेतु प्रेरित करना।
5. संसाधन का अधिकतम उपयोग करते हुए समूह सदस्यों की तकनीकी और बौद्धिक क्षमता का विकास करें।
6. समूह के साथ एक मित्र, दार्शनिक और मार्गदर्शक एवं सहायक के रूप में करना ।
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