समूह कार्य का सामाजिक शोध प्रणाली के साथ संबंध - Relationship of Group Work with Social Research Method

समूह कार्य का सामाजिक शोध प्रणाली के साथ संबंध - Relationship of Group Work with Social Research Method


सामाजिक अनुसंधान वर्तमान समय में एक अत्यंत ही प्रभावी रूप से समाज कार्य अनुसंधान के रूप में कार्य कर रहा है। समाज कार्य अनुसंधान एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है जिसके माध्यम से समाज में घटित होने वाली घटना का अध्ययन एवं उसके कार्यकारणों की खोज एक वैज्ञानिक प्रक्रिया के अंर्तगत की जाती है। इस प्रक्रिया के अंतर्गत व्यक्ति समूह एवं समुदाय की समस्याओं का ध्यान कर एक उचित समाधान प्रस्तुत किया जाता है।

समाज कार्य शोध के माध्यम से व्यक्ति समूह एवं समुदाय के विभिन्न पक्षों को ध्यान में रखकर विभिन्न प्रकार के तथ्य संकलन की प्रविधियों के माध्यम से आंकड़ों का संकलन किया जाता है और उसके पश्चात कार्य योजना का निर्माण कर समाधान की संपूर्ण प्रक्रिया को क्रियान्वित किया जाता है। अनेक विद्वानों द्वारा समाज कार्य अनुसंधान को परिभाषित करने का प्रयास किया गया है-  पीवी. यंग के अनुसार हम सामाजिक अनुसंधान को एक वैज्ञानिक कार्य के रूप में परिभाषित कर सकते हैं, जिसका उद्देश्य तार्किक एवं क्रमबद्ध पद्धतियों द्वारा नवीन तथ्यों की खोज या पुराने तथ्यों को और उनके अनुक्रमों, अंतःसंबंधों कारणों एवं संचालित करने वाले प्राकृतिक नियमों को खोजना है।" सी.ए. मोज़र ने सामाजिक शोध को स्पष्ट करते हुए लिखा है कि, सामाजिक घटनाओं एवं समस्याओं के संबंध में नए ज्ञान की प्राप्ति हेतु व्यवस्थित अन्वेषण को हम सामाजिक शोध कहते हैं। वास्तव में देखा जाए तो, सामाजिक यथार्थता की अंतरसंबंधित प्रक्रियाओं की व्यवस्थित जाँच तथा विश्लेषण सामाजिक शोध है।'

(पी. वी. यंग 1960 पेज क्रं. 44 )।


उपर्युक्त परिभाषाओं से स्पष्ट है कि सामाजिक शोध विभिन्न घटनाओं ध्यान अपने वैज्ञानिक ज्ञान से करती है जिससे नए ज्ञान के साथ समस्या का समाधान प्रस्तुत किया जा सके। समूह कार्य को समाज कार्य में एक प्रणाली के रूप में जाना जाता है। यह समूह गतिविधियों के माध्यम से समाज में उत्पन्न समस्याओं का निराकरण करने का प्रयास करती है। समाज कार्य अनुसंधान प्रविधि इस प्रविधि के साथ मिलकर एक सहायक प्रणाली के रूप में कार्य करती है जिससे समूह की समस्या का निर्धारण कर उससे समाधान का प्रयास किया जाए। सामाजिक अनुसंधान के मुख्यतः वैसे ही उद्देश्य होते हैं जो समूह कार्य के भी होते हैं जिनमें प्रमुख रूप से सामाजिक समस्याओं का अध्ययन सामाजिक तथ्यों के संबंध में फैली भ्रांतियों को दूर करने का प्रयास, सामाजिक प्रगति एवं विकास हेतु योजना का निर्माण एवं क्रियान्वयन सामाजिक नियंत्रण में सहायक सामाजिक संगठनों को दृढ़ता व स्थिरता प्रदान करने में सहायक एवं समूह एवं समुदाय में से एवं समुदाय में समाज कार्य सेवाओं की आवश्यकता का मापन एवं मूल्यांकन करना शामिल होता है।

इन उद्देश्यों को ध्यान में रखकर कार्यकर्ता निम्न चरणों के माध्यम से इन उद्देश्यों को पूर्ण करने का प्रयास करता है- सर्वप्रथम समस्या का निर्धारण एवं निरूपण कर समस्याओं के मूल कारणों को जानने का प्रयास करता है फिर समस्या से संबंधित उपलब्ध साहित्यों का अध्ययन करता है, अनुसंधान के क्षेत्र का निर्धारण किया जाता है अध्ययन इकाइयों का चयन किया जाता है, अनुसंधान के उद्देश्यों का निर्धारण किया जाता है. प्राक्कल्पना का निर्माण किया जाता है, सूचना खातों का अध्ययन किया जाता है, सूचना एकत्र करने की प्रविधियों का निर्धारण किया जाता है, तथ्यों का संकलन किया जाता है संकलित तथ्यों का वर्गीकरण किया जाता है, वर्गीकृत तथ्यों का विश्लेषण व विवेचन किया जाता है, सामान्यीकरण व सिद्धांतो का प्रतिपादन किया जाता है एक प्रतिवेदन का निर्माण किया जाता है, इस प्रकार से कार्यकर्ता द्वारा शोध के चरणों का उपयोग कर समस्त शोध प्रक्रिया को किया जाता है और वही प्रक्रिया कहीं-न-कहीं समूह कार्य प्रक्रिया में भी लागू की जाती है। 

पी. वी. यंग ने एक सामाजिक कार्यकर्ता के लिए विभिन्न क्षेत्रों का उल्लेख किया है जिनमें वह कार्य करता है-


1. यह उन कारकों का अध्ययन करता है जो व्यक्ति के सामाजिक व्यवस्था में समस्या उत्पन्न करती है।


2. सामाजिक संस्थाओं का विभिन्न इकाइयों के साथ अंतसंबंध को ज्ञात करता है।


3. सामाजिक कार्यकर्ता की स्थिति का अध्ययन करता है। 


4. समाज में चल रही विभिन्न प्रक्रियाओं का अध्ययन प्रस्तुत करता है।


5. समाज में व्यक्ति, समूह एवं समुदाय की आवश्यकता का अध्ययन कर उन्हें पूर्ण करने का प्रयास करता है। 


6. समाज कार्य क्रिया के प्रभावों का परीक्षण एवं मूल्यांकन कर समाज कार्य व्यवहार हेतु उपयोगी साधनों को ज्ञात करता है। 


7. समाज कार्य में व्यक्ति, समूह एवं समुदाय के व्यवहार प्रक्रिया का अध्ययन करता है।


8. समूह एवं समुदाय में सामाजिक समूहों के मूल्यों तथा वरीयता का अध्ययन जिनके ऊपर समाज कार्य के व्यावहारिक रूप को समर्थन तथा सहयोग के लिए निर्भर होना पड़ता है। 


9. समाज की विविध प्रक्रियाओं का अध्ययन करता है।


10. इस प्रकार से समाज कार्य शोध के क्षेत्रों को देखा जा सकता है जो वैयक्तिक, समूह एवं समुदाय में उनके समस्या समाधान के लिए कार्य करते हैं।


समाज कार्य अनुसंधान की कुछ विशेषताओं को यदि ध्यानपूर्वक देखा जाए तो इससे यह प्रतीत होता है कि यह किस प्रकार समूह कार्य के साथ अंतसंबंध रखते हुए एक सहायक प्रणाली के रूप में कार्य करती है। 


1. सामाजिक अनुसंधान सामाजिक पटनाओं खांबंधित तथ्यों का अध्ययन करता है। समूह कार्य प्रक्रिया में समूह सदस्य में उत्पन्न होने वाली समस्याओं का अध्ययन कर उसे दूर करने का प्रयास किया जाता है 


2. समाज कार्य अनुसंधान की प्रकृति वैज्ञानिक होती है समूह कार्य भी एक प्रक्रियाबद्ध प्रणाली के साथ किया जाता है।


3. समाज कार्य अनुसंधान अनुभवपरक होते हैं वहीं कार्यकर्ता अपने अनुभवों से ही समूह का निर्माण करता है एवं गतिविधियों को संचालित करता है।


4. सामाजिक अनुसंधान में पटनाओं के कार्यकारणों का अध्ययन किया जाता है, जबकि समूह कार्य में समूह में उत्पन्न होने वाली समस्याओं के कार्य कारणों का अध्ययन किया जाता है। 


5. सामाजिक अनुसंधान द्वारा व्यक्ति। सहायता अप्रत्यक्ष रूप से की जाती है तो वहाँ समूह कार्य द्वारा इसे प्रत्यक्ष रूप में दिया जाता है। 


6. सामाजिक अनुसंधान में समस्याओं को शाव कर उन्हें दूर करने का प्रयास किया जातछे तो समूह कार्य में भी समूह की समस्याओं को ज्ञात कर उन्हें दूर करने का प्रयास किया जाता है।


7. सामाजिक अनुसंधान एक उद्देश्यपूर्ण प्रक्रिया है समूह का निर्माण भी विशिष्ट उद्देश्य की पूर्ति के लिए किए जाते हैं और यह भी एक उद्देश्य पूर्ण प्रक्रिया है। 


इस प्रकार से कहा जा सकता है कि सामाजिक अनुसंधान समाज कार्य की एक सहायक प्रणाली के रूप में कार्य करती है और समूह कार्य प्रक्रिया के साथ इसका अंतसंवधमुख्य रूप से होता है, जिसके माध्यम से कार्यकर्ता अपने लक्ष्यों की प्राप्ति करता है।