समूह कार्य का सामाजिक क्रिया प्रणाली के साथ संबंध - Relationship of Group Work with Social Action Method

समूह कार्य का सामाजिक क्रिया प्रणाली के साथ संबंध - Relationship of Group Work with Social Action Method

सामाजिक क्रिया प्रणाली का उपयोग समाजकार्य की द्वितीयक प्रणाली के रूप में किया जाता है। इस प्रणाली का वर्तमान स्वरूप मेरी रिचमंड द्वारा 1922 में दिया गया। 1940 में जॉन फिच द्वारा एक कान्फ्रेंस में सामाजिक क्रिया की प्रकृति के ऊपर एक महत्त्वपूर्ण लेख प्रस्तुत किया गया जिसने सामाजिक क्रिया को समाज कार्य के क्षेत्र में एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि बताया। 1945 में केनिथ एलियम ने सोशल वर्क एण्ड एक्शन नामक लेख लिखा जिसके अनुसार यह माना जाने लगा कि सामाजिक क्रिया सामुदायिक संगठन का एक अंग नहीं है बल्कि यह समाज कार्य की एक अलग विधि है। कुछ विद्वानों ने सामाजिक क्रिया की निम्नलिखित परिभाषाएँ दी हैं-


मेरी रिचमंड (1922) के अनुसार - सामाजिक क्रिया प्रचार एवं सामाजिक विधान के माध्यम से जन समुदाय के कल्याण को प्रोत्साहित करती है।' 


ग्रेस क्वायल (1937) के अनुसार, 'समाज कार्य के एक भाग के रूप में सामाजिक क्रिया सामाजिक पर्यावरण को इस प्रकार बदलने का प्रयास है जो हमारे विचार में जीवन को अधिक संतोषजनक बनाएगा। यह मात्र व्यक्ति विशेष को ही प्रभावित नहीं करता वरन् सामाजिक संस्थाओं कानूनों प्रथाओं और समूहों एवं समुदायों को भी प्रभावित करता है।"


सैनफोर्ड सोलेण्डर (1957) के अनुसार, समाज कार्य के परिप्रेक्ष्य में सामाजिक क्रिया वैयक्तिक सामूहिक या अंतरसामूहिक प्रयास की प्रक्रिया है जो समाज कार्य के दर्शन ज्ञान और निपुणताओं की सीमा के अंदर संपादित की जाती है। 


इसका उद्देश्य सामाजिक नीति और सामाजिक संरचना में संशोधन करके समुदाय के कल्याण को प्रगति के पथ पर अग्रेसित करना है एवं कार्यक्रमों और सेवाओं की प्राप्ति के लिए कार्य करना है। फ्रीडलैंडर ने सामाजिक क्रिया को स्पष्ट करते हुए कहा था कि सामाजिक क्रिया एक वैयक्तिक, सामूहिक एव सामुदायिक प्रयास है जिसे समाज कार्य के दर्शन एवं व्यवहार की संरचना के अंतर्गत किया जाता है।। उपर्युक्त परिभाषाओं से स्पष्ट है कि सामाजिक क्रिया सामाजिक उद्देश्यों और मानवीय आवश्यकताओं की पूर्ति नीति के निर्माण में आवश्यक परिवर्तन हेतु जनसमुदाय के सहयोग के साथ प्रयोग में लाई जाती है।


सामाजिक क्रिया की विशेषताएँ -


1. सूदन के अनुसार सामाजिक क्रिया की निम्नलिखित विशेषताएँ है 


2. सामाजिक क्रिया के उद्देश्य स्पष्ट होते हैं।


3. सामाजिक क्रिया के कार्यक्रमों की प्राथमिकता एवं रूपरेखा स्पष्ट होती है। 


4. संस्था के संगठन के अनुसार ही सामाजिक क्रिया का रूप परिभाषित किया जाता है।


5. सामाजिक क्रिया में कार्यक्रमों का निर्धारण करने के लिए समाजिक कार्यकर्ता को सेवाएँ एवं सुविधाएँ कराई जाती है।


6. सामाजिक क्रिया के माध्यम से अन्य संस्थाओं के साथ सहयोग स्थापि किया जा सकता है।


7. सामाजिक क्रिया समाज में व्यापक परिवर्तन हेतु प्रयोग में लाई जाती है।


8. प्रमुख सरकारी विभागों और अधिकारियों से निरंतर कार्यात्मक संबंध स्थापित किया जाता है।


9. सामाजिक के क्रिया के माध्यम म से व्यापक कार्यक्रम निर्धारित किए जाते हैं। 


10. सामाजिक क्रिया एक सामूहिक गतिविधि है, जिसके माध्यम से व्यक्ति, समूह या समुदाय के माध्यम से इसे प्रारंभ किया जा सकता है।


11. सामाजिक क्रिया में सदस्यों के बीच आपसी सामंजस्य होता है। 


12. सामाजिक क्रिया के माध्यम से नीतियों में परिवर्तन लाया जाता है।


सामाजिक क्रिया के उद्देश्य


1. समाज में किसी व्यापक समस्या के निदान हेतु नीति का निर्माण करना एवं व्यापक दृष्टिकोण प्रदान करना।


2. समाज में स्वस्थ जनमत तैयार करना। 


3. समाज के अनेक क्षेत्रा हेतु स्थानीय प्रांतीय एवं राष्ट्रीय स्तर पर किए जा रहे कार्यों को संपादित करना 


4. समाज, संस्थाओं और सरकार के मध्य आपसी समझौता कराने का प्रयास करना।


5. समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक आवश्यक सूचनाओं सुलभता के साथ पहुंचाना।


6. समाज के कमजोर वर्गों के लिए आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराना।


7. सामाजिक आँकड़ों को एकत्रित करते हुए सूचनाओं का विश्लेषण करना।


8. सामाजिक समस्याओं के प्रति समुदाय में जागरूकता और प्रबोध का विकास करना और सामुदायिक नेताओं नाओं का समर्थन प्राप्त करना।


9. समाज कार्य के मूल्यों की मान्यता और सरकारी तथा गैर-सरकारी कार्यक्रमों के विकास एवं सरकार द्वारा समाज कार्य का प्रयोग कराने के लिए समर्थन प्राप्त करना।


10. सामाजिक क्रिया की परिभाषाओं, विशेषताओं एवं उद्देश्योंके आधार पर कहा जा सकता है कि सामाजिक क्रिया समाज में व्याप्त समस्याओं के समाधान करने का एक संगठित रूप है। 


समूह कार्य में यह प्रक्रिया किस प्रकार से अपनी भूमिका को अदा करती है और किस प्रकार इसमें अंतःसंबंध पाया जाता है इसे निम्नलिखित तथ्यों के माध्यम से स्पष्ट किया जा सकता है।