सामुदायिक संगठन कार्य प्रणाली के साथ संबंध - Relationship with Community Organization Methodology

सामुदायिक संगठन कार्य प्रणाली के साथ संबंध - Relationship with Community Organization Methodology


सामुदायिक संगठन कार्य प्रणाली के साथ संबंध के चलते आज आधुनिक सामुदायिक संगठन का विकास हुआ है। सामुदायिक संगठन को समाज की एक प्रणाली रूप में भी प्रयोग में लाया जाता है।

यह समुदाय में उत्पन्न समस्याओं का निराकरण एक प्रविधि के सामुदायिक संगठन की उत्पत्ति 19 वीं शताब्दी में दान संगठन समिति आंदोलन से हुई यही दान संगठन समितियों माध्यम से करता है जिसमें समुदाय के प्रत्येक सदस्यों की आवश्यकता को महत्त्व दिया जाता है। सामुदायिक संगठन प्रमुख रूप से समुदाय के हितों को ध्यान में रखकर कार्य करता है। समुदाय में मुख्य रूप से हम' की भावना का बोध होता है, लोगों का यह विश्वास होता है कि यह समुदाय हमारा है और यही लोग हमारे ही लोग हमारे सुखदुख में साथ देते हैं। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए लोगों में आपसी स्नेह और सहयोग की भावना होती है। छ विद्वानों ने कुछ ने सामुदायिक संगठन को अपने-अपने विचारों से व्यक्त करने का प्रयास किया है। लिण्डमैन 1921 ने सामुदायिक संगठन को परिभाषित करते हुए कहा कि सामुदायिक संगठन सामाजिक संगठन का वह स्तर है जिसमें समुदाय द्वारा चेतन प्रयास किए जाते हैं तथा जिसके द्वारा वह अपने मामलों को प्रजातांत्रिक ढंग से नियंत्रित करता है तथा अपने विशेषज्ञों संगठनों, संस्थाओं तथा संस्थानों से जाने पहचाने अंतर संबंधियों के द्वारा उनकी उच्च कोटि की सेवाएँ प्राप्त करता है।


पैटिट (1925) के अनुसार सामुदायिक संगठन एक समूह के लोगों तथा उनकी सामान्य आवश्यकताओं को वश्यकताओं की पूर्ति में सहायता करने के रूप में उत्तम प्रकार से परिभाषित किया जा सकता पहचानने तथा इन आवश्यकताओं की पू है।' सैण्डरसन एण्ड पोल्सन ने 1993 में वर्तमान स्थिति के ध्यान में रखते हुए सामुदायिक संगठन को परिभाषित किया और कहा कि, सामुदायिक संगठन का उददेश्य समूहों तथा व्यक्तियों के मध्य ऐसे स किया और संबंध विकसित करना है जिससे उन्हें सुविधाओं का निर्माण तथा समस्याओं का निराकरण करने तथा उन्हें बनाए रखने के लिए एक साथ कार्य करने में सहायता मिलेगी तथा उच्चतम मूल्यों का अनुभव कर सके।

 

एम जी रौस ने 1956 में सामुदायिक संगठन को स्पष्ट करते हुए - सामुदायिक संगठन के कार्यकर्ता द्वारा समुदाय एम. जी. गैस ने 1956 में की सहायता करने की एक प्रक्रिया कहा है। उनके अनुसार सामुदायिक संगठन एक प्रक्रिया है। जिसके द्वारा समाज कार्यकर्ता अपनी अंतर्दृष्टि एवं निपुणता का प्रयोग करके समुदायों भौगोलिक तथा कार्यात्मक) को अपनी अपनी समस्याओं को पहचानने और उनके समाधान हेतु कार्य करने में सहायता देता है। उपर्युक्त परिभाषाओं के माध्यम से यह कहा जा सकता है कि सामुदायिक संगठन वैयक्तिक सेवा कार्य समूह कार्य के समान ही कार्य करती है एवं यह भी एक प्रत्यक्ष रूप से कार्य करने वाली प्रणाली है जिसके उद्देश्य समूह एवं वैयक्तिक कार्य जैसे ही हैं जिसमें समुदाय की समस्या का समाधान किया जाता है। समुदाय कार्यकर्ता निम्न चरणों के माध्यम से समुदाय की सहायता करने का प्रयास करता है जो मुख्य रूप से लिण्डमेन द्वारा दी गई है - सर्वप्रथम, वह समुदाय में चेतना जाग्रत करने का प्रयास करता है, चरण में वह समुदाय में आवश्कता की चेतना का प्रसार करता तीसरे चरण में आवश्यकता की चेतना का प्रक्षेपण करता है, चौथे चरण में वह आवश्यकता की पूर्ति के लिए समाधानों का प्रस्तुतीकरण करता है, पाँचवे चरण में वह आवश्यकता पूर्ति के लिए समस्याओं को समाप्त करने का प्रयास करता है, छठवें चरण में समस्या के विषय में वाद-विवाद विशाल सभा या कुछ व्यक्तियों के सामने परियोजना या समस्या को रखा जाता है और जो समूह अधिक प्रभाव रखते हैं, अपनी योजनाओं की स्वीकृति लेने का प्रयास करते हैं. सातवें चरण में कार्यकर्ता द्वारा समाधानों का एकीकरण कर उचित समाधान प्रस्तुत किया जाता है एव आठवें चरण में अस्थायी प्रगति के आधार पर समझौता कराया जाता है।

अनेक विद्वानों द्वारा चरणों को भिन्न रूप से प्रयोग में लाने हेतु बताया गया है, यह आवश्यक नहीं है कि एक ही चरण को समस्त परियोजनाओं में लागू किया जाए इस प्रकार से सामुदायिक संगठन प्रणाली के माध्यम से समाज कार्य की प्रक्रिया को किया जाता है।