सामाजिक वैयक्तिक कार्य प्रणाली के साथ संबंध - Relationship with social individual work system
सामाजिक वैयक्तिक कार्य प्रणाली के साथ संबंध - Relationship with social individual work system
सामाजिक वैयक्तिक सेवा कार्य समाज कार्य में एक प्राथमिक प्रणाली के रूप में कार्य करता है यद्यपि यह एक व्यक्ति के साथ कार्य करता है किंतु यह उसी तक सीमित नहीं रहता वरन सेवार्थी के आवश्यकतानुसार उसके प्रत्येक आंतरिक एवं बाह्य रूप से भी कार्य करता है।
मेरी रिचमंड ने 1915 में प्रकाशित अपनी पुस्तक में इसका वर्णन करते हुए लिखा था कि विभिन्न व्यक्तियों के लिए उनके साथ मिलकर उनके सहयोग से विभिन्न प्रकार के कार्य करने की एक कला है जिसमें एक ही साथ स्वयं अपनी एवं समाज की उन्नति की जाती है। मेरी रिचमंड ने प्रारंभ में वैक्तिक सेवा कार्य में समस्या का तो उल्लेख किया था परंतु यह उल्लेख नहीं किया था कि व्यक्ति की समस्या का समाधान कैसे किया जाए अतः 1922 में प्रकाशित दूसरी परिभाषा में उन्होंने इन कमियों को दूर करते हुए स्पष्ट किया और कहा कि सामाजिक वैयक्तिक सेवा कार्य में वे प्रक्रियाएँ आती है जो एक-एक करके व्यक्तियों एवं उनके सामाजिक पर्यावरण के बीच संवेतन रूप से समायोजन स्थापित करती हैं।
सामाजिक वैयक्तिक सेवा कार्य को एक प्रक्रिया के रूप में भी देखा जा सकता है जिसमें पलमैन द्वारा 1957 में दिए गए 4 अंगों को उल्लेखित किया जाता है ये अंग है- व्यक्ति, समस्या, स्थान और प्रक्रिया। इन अंगों के माध्यम से को स्पष्ट करते हुए कहा गया है कि व्यक्ति इस प्रक्रिया में सबसे महत्त्वपूर्ण माना जाता है, उसकी आंतरिक एवं के माध्यम से वैयक्तिक कार्य बाह्य समस्या एवं उसकी आवश्यकता की पहचान कर कार्यकर्ता द्वारा उसकी समस्या का समाधान प्रस्तुत किया जाता है। दूसरा महत्त्वपूर्ण अंग समस्या है समस्या के कई कारण और कई रूप हो सकते हैं परंतु कार्यकर्ता द्वारा यह निर्धारित किया जाता है कि व्यक्ति की व्यक्तित्व से संबंधित कौनसी समस्या है और इसका निराकरण किस प्रकार से किया जाए। तीसरा अंग स्थान है स्थान कार्यकर्ता एवं सेवार्थी के लिए एक महत्त्वपूर्ण अंग है जिससे परिवार कल्याण केंद्र माध्यम से कार्यकर्ता एक संस्था का चयन कर इसका उपयोग कर सेवार्थी की सेवाएँ प्रदान करने हेतु करता है। जो सेवार्थी की सहायता कर सकें, ये संस्थाएँ मुख्य रूप से बाल निर्देशन केंद्र, मंत्रणा केंद्र करता। केंद्र, व्यावसायिक मंत्रणा केंद्र इत्यादि होती है जो सेवाओं की सहायता भिन्न-भिन्न प्रकार से आवश्यकता अनुसार स करती है। चौथा अंग जिसे प्रक्रिया के रूप में जाना जाता है इसमें कार्यकर्ता द्वारा सेवार्थी की समस्या के कार्यकारण संबंधों का अध्ययन कर तथ्य संकलन किए जाते हैं समस्या का व्यक्तिक विधियों द्वारा निदान किया जाता है और कार्य प्रक्रिया के प्रमुख तीन विभिन्न अंगों अध्ययन निदान एवं मूल्यांकन और चिकित्सा के आधार पर इसका समाधान प्रस्तुत किया जाता है। इस प्रकार से इन परिभाषाओं एवं अंगो अध्ययन के पश्चात यह कहा जा सकता है कि वैयक्तिक कार्य प्रणाली के माध्यम से व्यक्ति की समस्या का समाधान किया जा सकता है जिसमें केंद्र बिंदु सेवार्थी (व्यक्ति) होता है। समाजिक कार्यकर्ता इस प्रकार से इस प्रणाली का प्रयोग कर व्यक्ति को समायोजन करने में सहायता करता है और यह प्रणाली समूह कार्य के साथ भी मुख्य प्रयोग में लाई जाती प्रणाली समूह कार्य के साथ भी मुख्य प्रयोग में लायी जाती है।
सामाजिक समूह कार्य प्रणाली के साथ संबंध
मानव समाज के इतिहास में सभी देशों एवं युगों में निर्धन निराश्रित, अपंग अनाथ, बेरोजगार, रोगी व्यक्ति रहे है तथा ऐसी अनेक समस्याएँ आई है जहाँ इन व्यक्तियों को अनेक कठिनाईयों का सामना करना पड़ा है। अतः इन व्यक्तियों की समस्याओं का समाधान करने तथा इसके परेशानियों को समझने के लिए आदिकाल से प्रयास किए जा रहे हैं। समाज कार्य की उत्पत्ति इन्हीं प्रयासों के फलस्वरुप हुई है। मानव और समाज पूर्ण रूप से एक-दूसरे पर आश्रित है। जिस आयत जिस प्रकार समाज ने मनुष्य को अनेक प्रकार के मानवीय अस्तित्व प्रदान किए हैं वहीं समाज में अनेक प्रकार की समस्याएं जैसे बेरोजगारी आदि भी व्याप्त सभी समस्याओं को दूर प्रयास किए जा रहे हैं। इन्हीं प्रयासों फलस्वरूप कार्यों को समाजकार्य के नाम से जाना जाता हेतु अनेक आज समाजकार्य के लिए केवल दया, करुणा, प्रेम की भावना ही पर्याप्त नहीं है। आज समाजकार्य ने व्यवसाय का रूप ले लिया है। सामाजिक समूह कार्य को समाज कार्य की एक प्रणाली के रूप में प्रयुक्त किया जाता है जो वैयक्तियों की सहायता समूह के माध्यम से कुछ रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से एवं व्यक्तियों में नेतृत्व का विकास कर उन्हें सक्षम बनाने प्रयास किया जाता है। विभिन्न विद्वानों द्वारा समूह कार्य के क्षेत्र में कुछ परिभाषाएँ दी गई है न्यूज टेट्र के द्वारा 1935 में दी गई परिभाषा में कहा गया है कि स्वैच्छिक संघ द्वारा व्यक्ति के विकास तथा सामाजिक समायोजन पर बल देते हुए तथा एक साधन के रूप इस संप का उपयोग सामाजिक इच्छित उद्देश्याको आगे बढ़ाने के लिए शिक्षा प्रक्रिया के रूप में सामूहिक कार्य को परिभाषित किया जा सकता है।
क्वायल, प्रेस ने 1939 में कहा कि सामाजिक सामूहिक कार्य का उद्देश्य सामूहिक स्थितियों में व्यक्तियों की अंतः क्रियाओं द्वारा व्यक्तियों का विकास करना तथा ऐसी सामूहिक स्थितियों को उत्पन्न करना जिससे समान उद्देश्यों के लिए एकीकृत सहयोगिक सामूहिक क्रिया हो सकेा विल्सन एण्ड राइलैंड (1949) सामाजिक सामूहिक सेवा कार्य एक प्रक्रिया और एक प्रणाली जिसके द्वारा सामूहिक जीवन एक कार्यकर्ता द्वारा प्रभावित होता है जो समूह की परस्पर संबंधी प्रक्रिया को उद्देश्य प्राप्ति के लिए सचेत रूप से निर्देशित करता है। जिससे प्रजातांत्रिक लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सके हैमिल्टन ने सामाजिक समूह कार्य को 1949 में स्पष्ट करते हुए कहा कि सामाजिक सामूहिक कार्य एक मनोसामाजिक प्रक्रिया है जो नेतृत्व योग्यता और सहकारिता के विकास से उतनी ही संबंधित है जितनी सामाजिक उद्देश्य के लिए सामूहिक अभिरूचियों के निर्माण सेकले आइम (1950) सामूहिक कार्य के एक पक्ष के रूप में सामूहिक सेवा कार्य का उद्देश्य समूह के अपने सदस्यों के व्यक्तित्व परिधि का विस्तार करना और उनके मानवीय संपर्कों को बढ़ाना है। यह एक ऐसी प्रणाली है जिसक उपका माध्यम से व्यक्ति के अंदर ऐसी क्षमताओं का विकास किया जाता है जो उसके अन्य व्यक्तियों के साथ संपर्क बढ़ाने की ओर निर्देशित ती है।' ट्रैकर - सामाजिक सामूहिक कार्य एक प्रणाली है। जिसके द्वारा व्यक्तियों की सामाजिक संस्थाओं के अंतर्गत समूहों में एक कार्यकर्ता द्वारा सहायता की जाती है। यह कार्यकर्ता कार्यक्रम संबंधी क्रियाओं में व्यक्तियों के परस्पर संबंधी प्रक्रिया का मार्ग दर्शन करता है जिससे वे एक-दूसरे से संबंधी स्थापित कर सके और वैयक्तिक, सामूहिक एवं सामुदायिक विकास की दृष्टि से अपनी आवश्यकताओं एवं क्षमताओं के अनुसार विकास के सुअवसरों का अनुभव कर व कर सकें।
कोनोप्का सामाजिक सामूहिक कार्य समाज कार्य की एक प्रणाली है जो व्यक्तियों की सामाजिक कार्यात्मकता बढ़ाने में सहायता प्रदान करती है, उद्देश्यपूर्ण सामूहिक अनुभव द्वारा व्यक्तिगत सामूहिक और सामुदायिक समस्याओं प्रभावकारी ढंग से सुलझाने में सहायता प्रदान करती है। उपर्युक्त समस्त परिभाषाओं के विश्लेषण के पश्चात यही कहा जा सकता है कि. न्यूज ने ट्रेट परिभाषा दी है उसमें केवल सामूहिक कार्य को एक शिक्षात्मक प्रक्रिया बताया है और कहा कि स्वैच्छिक संघ ही इस दिशा में काम करते हैं। अनेक परिभाषाओं से स्पट हो जाता है कि यह केवल केवल शिक्षात्मक कार्य ही नहीं करता बल्कि इसके द्वारा सेवा प्रदान की जाती है। यह कार्य स्वैच्छिक सार्वजनिक संगठनों दोनों के माध्यम से किया जाता है।
हैमिल्टन ने अपनी परिभाषा में सबसे अलग प्रकार समूह कार्य को प्रस्तुत किया है और बताया है कि सामूहिक कार्य एक मनोसामाजिक प्रक्रिया है। उनका मानना है कि इसके द्वारा व्यक्ति को मानसिक रूप से तथा सामाजिक रूप से दोनों प्रकार से प्रभावित किया जाता है। यह सामाजिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए सामूहिक अभिरूचियों के विकास का प्रयत्न करता है। साथ ही साथ उनके ने नेतृत्व एवं सहकारिता की भावना के विकास पर बल देता है। टैकर ने सामाजिक सामूहिक कार्य की सबसे उपर्युक्त परिभाषा दी है। उनके अनुसार सामाजिक सामूहिक सेवाकार्य को एक प्रणाली या पद्धति कहा गया है जो एक विशेष प्रणाली द्वारा योजनाबद्ध व सुव्यवस्थित कार्यक्रम से समूह को सेवा प्रदान की जाती है। इसमें सेवा प्रदान करने के दौरान वैज्ञानिक ज्ञान, समूह बोध सिद्धांत एवं कौशल का समावेश होता है।
ट्रेकर ने सामाजिक समूह कार्य को और आगे स्पष्ट करते हुए कहा है कि सामूहिक कार्यकर्त्ता स्वीकृति, वैयक्तिक, कार्यक्रम एवं उद्देश्य निर्धारण में समूह की सहायता, प्रेरणा व निर्देशन, संगठन तथा साधनों के उपयोग पर आधारित संबंधों द्वारा समूह का मार्गदर्शन करता है। उन्होंने कार्यक्रम नियोजन पर भी बल प्रदान किया है इसमें उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्यक्रम आयोजन समूह सदस्यों की योग्यता क्षमता के अनुसार किया जाना चाहिए। आगे उन्होंने और विस्तृत रूप से कहा कि व्यक्ति एवं समूह के व्यवहार में इस प्रकार सुपरिवर्तन लाया जाना चाहिए जिससे वे प्रजातांत्रिक सिद्धांतों जैसे समानता स्वतंत्रता सौहार्ड व्यक्ति का आदर, व्यक्ति की योग्यता में विश्वास, कर्तव्य एवं अधिकार, व्यक्ति की आत्म विकास की क्षमता विश्वास और इस संबंध में अवसर प्रदान करने में विपास किया जा सके। अत उपर्युक्त तथ्यों से समाज कार्य में समूह कार्य की उपयोगिता एवं इसके एक प्रणाली के रूप में कार्य करने को समझा जा सकता है।
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