सामाजिक समूह कार्य में जीवन कौशल शिक्षा की प्रासंगिकता - Relevance of Life Skills Education in Social Group Work

सामाजिक समूह कार्य में जीवन कौशल शिक्षा की प्रासंगिकता - Relevance of Life Skills Education in Social Group Work

जीवन कौशल शिक्षा की समझ


वास्तव में जीवन कौशल एक ऐसा तरीका है जिसके माध्यम से समस्या समाधान करने का प्रयास किया जाता है। इस प्रकार के प्रयास से व्यक्ति व्यवहार को नियंत्रित करके उसे समाज के लिए उपयुक्त और कर्तव्यनिष्ठ बनाया जा सकता है। जीवन कौशलों के प्रशिक्षण हेतु मुख्य रूप से कार्ययोग्य घटकों तथा समूह सदस्यों को पढ़ाना इत्यादि शामिल किया जाता है।

जीवन कौशल के माध्यम से विशेषकर व्यक्ति (स्वयं), परिवार, कार्य विद्यालय, अवकाश के समय, और समुदाय के साथ मिलकर कार्य सकता है और इनके विकास हेतु आवश्यक प्रयास करता है। इस प्रकार से कहा जा सकता है कि जीवन कौशल शिक्षा के अंर्तगत विभिन्न विषयों की व्यापक परिधियों को समाहित कर इसे समूह विकास प्रयोग में लाया जा सकता है।

यूनिसेफ (UNICEF) के अनुसार जीवन कौशल आधारित शिक्षा एक व्यवहार परिवर्तन है अथवा व्यवहार विकास दृष्टिकोण है जिसकी अभिकल्पना तीन क्षेत्र ज्ञान, अभिवृति और कौशलों को संतुलित करने के लिए की गई है।


जीवन कौशल शब्द के अर्थ से स्पष्ट होता है कि यह मनो-सामाजिक तथा अंतर्वैयक्तिक कौशलों के व्यापक समूह के अर्थ को प्रकट करता है जो व्यक्तियों को निर्णय लेने की क्षमता एवं उन्हेंप्रभावकारी बनाने हेतु उपयोग में लाया जाता है, जिससे व्यक्ति को अच्छा स्वास्थ्य और सफल जीवन प्राप्त हो सके।


जीवन कौशल शिक्षा समूह


जीवन कौशल शिक्षा समूह शिक्षा कार्यक्रम एवं अन्य सदस्यों की भागीदारी के साथ क्रियान्वित किया जाता है। जो एक कुशल प्रशिक्षित समूह कार्यकर्ता के नेतृत्व के माध्यम से संचालित किया जाता है। कार्यकर्ता का प्रयास होता है कि वह विभिन्न समूहों जैसे पेशेवर युवा समूह स्वास्थ्य समूह व्यावसायिक विकास समूह इत्यादि के -साथ मिलकर कार्य करे जिससे अपेक्षाएं इस प्रकार के समूहों के मध्य स्व-जागरूकता को उत्पन्न कर सके। कार्यकता द्वारा निम्न प्रकार की अपेक्षाएं समूह सदस्यों से की जाती हैं।


● समूह सदस्य स्वयं समस्या समाधान हेतु सक्षम बन सके।


● समूह सदस्यों के आत्म विश्वास में बढ़ोतरी हो


● समाज के साथ उचित प्रकार का समायोजन स्थापित कर पाए।