वैज्ञानिक क्रांति - scientific revolution

वैज्ञानिक क्रांति - scientific revolution

पुनर्जागरण काल की दूसरी प्रमुख घटना वैज्ञानिक क्रांति थी। जिसकी शुरूवात लगभग 15वीं शताब्दी हुई, जब यूरोप मे समद्री यात्रियों के लिए दिशाओं एवं मानचित्रों की सटीक जानकारी की आश्यकता हुई तो इनका तार्किक एवं वैज्ञानिक तरीकों से निर्माण किया गया। यही से वैज्ञानिक क्रांति की शुरूवात मानी जाती है। मध्यकालीन यूरोप में मानवीय चिंतन का क्रेन्द धर्म था प्राकृतिक, भौतिक, भौगोलिक, राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक आदि जैसे सभी पहलुओं का चिंतन धार्मिक अंधविश्वासो एवं रूढिवादिता पर आधारित था लेकिन 16वीं शताब्दी आते-आते यूरोप मे नवीन बौद्विक चेतना का उदय हुआ जिसमे मानवीय चिंतन की दिशा ही बदल दी। धार्मिक चिंतन का स्थान तार्किक चिंतन ने ले लिया गणित, खगोलशास्त्र, भौतिकी, चिकित्सा आदि क्षेत्रों मे नवीन तार्किक चिंतन एवं अनुसंधान शुरू हुए। जिसके परिणाम स्वरूप विभिन्न वैज्ञानिक अविष्कार हुए। मानवीय चिंतन में इसी क्रांतिकारी बदलाव को वैज्ञानिक क्रांति के नाम से जाना गया । वैज्ञानिक क्रांति को विस्तार पूर्वक समझने के लिए समकालीन वैज्ञानिक घटनाओं एवं चिंतनों को समझना आवश्यक होगा।


भौतिकी एवं खगोलशास्त्र- निरीक्षण, परीक्षण एवं प्रयोगात्मक पद्वतियों पर आधारित भौतिक वैज्ञानिक एवं खगोलशास्त्रीयों के विचारों से वैज्ञानिक चिंतन में क्रांतिकारी परिवर्तन हुए। जिसने मनुष्य और प्रकृति के बीच नये चिंतन को जन्म दिया इन विचारकों में प्रमुख रूप से कापरनिकस, गैलीलियो, केपलर तथा न्यूटन आदि थे 


1. कापरनिकस- कापरनिकस के सिद्धन्त ने उस आधार को ही धराशायी कर दिया जिस पर पुराना विश्व खड़ा था। यह आम धारणा था कि पृथ्वी स्थिर है और सूर्य तथा अन्य नक्षत्र आदि उसके चारों ओर घूमते है, पृथ्वी सृष्टि का क्रेन्द है के मत को कापरनिकस ने अस्वीकार किया और बताया कि पृथ्वी सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करती हैं।


2. गैलीलियों- गैलीलियो ने नक्षत्रशास्त्र में विशेष योगदान दिया, इन्होनें दुरबीन का निर्माण किया। उसकी मदद से सिद्ध किया कि पृथ्वी अपनी धुरी पर घुमने के साथ-साथ सूर्य की परिक्रमा करती है। 


3. केपलर- केपलर ने गणितीय आधार पर कापरनिकस के सिद्धांत को पुष्ट किया था। इन्होंने अपने सिद्धांत मे बताया कि पृथ्वी और दुसरे नक्षत्र जो सूर्य के चारो ओर परिक्रमा करते है उनका मार्ग वृत्ताकार न होकर अण्डाकार है।


चिकित्सा क्षेत्र चिकित्सा में जाँच पडताल के लिए मृत मानव शरीर की स्वीकृत दे दी गयी। जिससे डाक्टरों एवं चिकित्सकों ने शरीर की रचना का प्रत्यक्ष रूप से निरीक्षण किया। विलियम हार्वे ने शरीर के रक्त परिसंचरण की खोज की।


मानवीय सावयव (शरीर) के तार्किक अध्ययन का प्रभाव सामाजिक चिंतन पर भी पड़ा जिसमे कॉम्ट, स्पेन्सर, दुर्खीम के विचार प्रमुख थे।