स्व-सहायता समूह बैंक लिंकेज - Self Help Group Bank Linkage
स्व-सहायता समूह बैंक लिंकेज - Self Help Group Bank Linkage
स्व-सहायता समूह बैंक लिंकेजअनौपचारिक ऋण प्रणाली के लचीलेपन, सुग्रहिता, अनुक्रियाशीलता जैसे गुणों को औपचारिक ऋण संस्थाओं की तकनीकी क्षमताओं और वित्तीय संसाधनों के साथ संयोजित करने और ऋण वितरण प्रणाली में सकारात्मक नवीनताएं लाने की दृष्टि से राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने फरवरी 1992 में स्व-सहायता समूहों को वाणिज्य बैंकों से जोड़ने के लिए पायलट परियोजना शुरू की थी, जिसमें (बाद में) सहकारी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को भी शामिल कर लिया गया। यह जुड़ाव इस विचार से भी किया गया था कि औपचारिक और अनौपचारिक ऋण प्रणाली के अच्छे गुणों को समायोजित कर सके।
कुछ चयनित गैर सरकारी संस्थाओं एवं बैंकों की मदद से ही पायलट परियोजना का कार्यान्वयन हुआ वर्ष 1992-93 में स्व-सहायता समूह को विभिन्न बैंकों से जोड़ा गया। पायलट परियोजना में मात्र 500 स्व-सहायता समूह जोड़ने का लक्ष्य रखा गया था, जबकि वर्ष 1993-94 में 650 समूहों को जोड़ा गया। वर्ष 1994-95 में या लिंकेज की संख्या 2212 हुई, जिसमें बैंक कर्ज रु० 224.5 लाख थी। इस प्रायोगिक खंड के स्व-सहायता समूह बैंक लिकेंज कार्यक्रम की सफलता से आकर्षित होकर भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर ने एक कार्यकारी समूह का गठन किया, जिसमें प्रसिद्ध गैर-सरकारी संस्था एकेडेमेशियन (प्रबुद्ध), बैंक पदाधिकारीगण और नाबार्ड के प्रबंध निदेशक इत्यादि थे। इन सभी सदस्यों के द्वारा पूर्ण अध्ययन किया गया। इसी आधार पर भारतीय रिजर्व बैंक ने दिनांक 2 अप्रैल 1996 को अपने परिपत्र के जरिए स्व-सहायता समूहों को दिए गए ऋण में प्राथमिकता क्षेत्र अग्रिमों के तहत शामिल किए जाने का निर्देश दिया।
स्व-सहायता समूह बैंक लिंकेज के निम्नलिखित उद्देश्य हैं -
1) गरीबों की ऋण ज़रूरतों को पूरा करने के लिए पूरक ऋण नीतियों का विकास करना।
2) बैंकों एंव ग्रामीणों गरीब जनता के बीच परस्पर विश्वास /भरोसा पैदा करना।
3) ग्रामीण गरीब जनता में बचत व ऋण दोनों तरह के बैंकिंग कार्यकलापों को प्रोत्साहित करना।
स्वयं सहायता समूह बैंक लिकेंज कार्यक्रम से लाभ
1. ऋण चक्र में मूल्यांकन निर्गत, निरीक्षण एंव भुगतान प्रक्रिया में होने वाली लागत में कमी
2. बड़े स्तर पर छोटी बचत का जमागतिमान होना।
3. सुनिश्चित एवं समय पर भुगतान होने केकारण कोष का तेजी से पुनः चक्रीय होना।
4. गरीब वर्ग को समाहित करने के साथ-साथ व्यापार में विस्तार करने का अवसर।
5. दूरदर्शितापूर्ण ग्राहक आधारित भविष्य तैयार करना।
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