स्व-सहायता समूह एवं समूह कार्यकर्ता - Self Help Groups and Group Workers

स्व-सहायता समूह एवं समूह कार्यकर्ता - Self Help Groups and Group Workers

स्व-सहायता समूह एवं समूह कार्यकर्ता

स्व-सहायता समूह (Self Help Group) भारत सरकार द्वारा स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना के अंर्तगत अप्रैल 1999 से प्रारंभ किया गया है। इस योजना के अंर्तगत गरीब परिवारों को स्वरोजगार की सहायता देना है।

ऐसे ग्रामीण जो गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करते हैं तथा जिनकी आय और गतिविधियाँ एक हो स्व - सहायता समूह के तीन ओ सदस्य अपनी दैनिक आय अथवा मासिक आय से कुछ बचत कर समूह के पास जमा करते हैं तथा समूह आवश्यकता पड़ने पर जरूरतमंद सदस्य को ऋण देती है, जिससे सदस्य अपनी आवश्यकता पूरी कर ऋण राशि आसान किश्तों में वापस जमा कर सकें। ब्याज से आय समिति के कार्यकलापों में खर्च किया जाता है। स्व-सहायता समूह में 10 से 20 सदस्य हो सकते हैं, जो अपनी गतिविधियों के अनुसार समूह का नामरख सकते हैं। स्व-सहायता समूह के माध्यम से लोग अपनी मूलभूत आवश्कताओं की पूर्ति करने में सक्षम होते हैं। स्व-सहायता समूह के लिए मुख्य रूप से कुछ महत्त्वपूर्ण बातों को ध्यान में रखने की आवश्यकता होती है, जैसे


1. स्व-सहायता समूह गठन के बाद नियमित बैठक आवश्यक है।


2. समूह के सदस्यों को बैठक में भाग लेना आवश्यक है। 


3. बैठक में समूह की गतिविधियों, समूह को सुदृढ़ करने समूह की आय बढ़ाने सदस्यों को ऋण की आवश्यकता, गाँव की समस्या, बच्चों/बच्चियों को पढ़ने/बढ़ने पर चर्चा आदि पर विचार करना चाहिए 


4. बैठक में की गई चर्चा का ब्यौरा कार्यवाही रजिस्टर में दर्ज करना आवश्यकतानुसार ऋण दिया जा सके।


5. समिति से प्राप्त ऋण का सही उपयोग करें- जैसे, अपने व्यवसाय में लगाएँ, बच्चों/बच्चियों के पढ़ने बढ़ने पर खर्च करें अथवा अपने अन्य महत्त्वपूर्ण कार्यों में लगाए।


6. समिति से प्राप्त ऋण समिति की शर्तों के अनुसार समय के अंदर दें।


7. समूह के छह माह सफल संचालन के उपरांत समिति सदस्य अथवा अध्यक्ष अपने ग्राम के ग्राम सहायक विस्तार अधिकारी अथवा विकास खंड अधिकारी से संपर्क कर समिति के चयनित व्यवसाय के ऋण के लिए संपर्क करें। तो इस प्रकार उपर्युक्त स्व-सहायता समूह की गतिविधियों को संचालित किया जा सकता है। स्वसहायता समूह समूह कार्य प्रणाली का एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण उदाहरण है जिसके माध्यम से संपूर्ण विधि को संचालित किया जा सकता है। स्व-सहायता समूह के कुछ महत्त्वपूर्ण अभिलेख भी होते हैं, जिनके माध्यम से इसका संचालन किया जाता है, जिनमें मुख्य रूप से रोकड़ पंजी का संधारण समूह की रोकड़ पूँजीसदस्य खाता, सदस्य का व्यक्तिगत पास बुक, समूह की कार्यवाही पूँजी, ग्राम सभा में अनुमोदन, इत्यादि होते हैं। इस प्रकार समूह कार्य में स्व सहायता समूह गतिविधि एक महत्त्वपूर्ण कार्य विधि हो सकती है। जिस प्रकार स्व-सहायता समूह में कार्यों संचालित किया जाता है, उसी प्रकार समूह कार्यों को भी एक निश्चित लक्ष्य प्राप्ति के लिए किया जाता है।