समाजशास्त्र के उदय की सामाजिक परिस्थितियाँ - Social Conditions of the Rise of Sociology
समाजशास्त्र के उदय की सामाजिक परिस्थितियाँ - Social Conditions of the Rise of Sociology
15वीं, 16वीं शताब्दीं से यूरोप मे वाणिज्यिक क्रांति एवं वैज्ञानिक क्रांति होती है जो 18 वी शताब्दी तक चलती है जिसनें यूरोप में मानवीय चिंतन की दिशा ही बदल दी। और वहाँ व्याप्त परम्परावादिता, अंधविश्वास, अतार्किकता, रूढवादिता को चुनौती दीं। जिन्हें सयुक्त रूप से पुनर्जागरण कहा गया। पुनर्जागरण की यह घटना 16 वीं शताब्दी से लेकर 17 वीं शताब्दी के अन्त तक चलती है। जिसे पुनर्जागरण काल कहा गया। पुनर्जागरण काल ही 18वीं शताब्दी मे यूरोप में प्रबोधन काल का आधार बना जिसमे प्रमुख रूप से इग्लैंड की औद्योगिक क्रांति एवं फ्रांसीसी क्रांति की घटनाए हुई। जो समाज के लिए वैज्ञानिक मानवीय चिंतन का आधार बनी। इस लिए समाजशास्त्र के उद्भव के कारण को विस्तृत समझने के लिए पुनर्जागरण काल एवं प्रबोधन काल की घटनाओं को समझना आश्यक होगा।
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