समाज कार्य की प्रणाली के रूप में सामाजिक समूह कार्य - Social Group Work as a Method of Social Work

समाज कार्य की प्रणाली के रूप में सामाजिक समूह कार्य - Social Group Work as a Method of Social Work


प्रणाली से आशय


किसी भी कार्य को सुव्यवस्थित एवं सुचारू रूप से कार्य करने की पद्धति को प्रणाली कहा जा सकता है। यह कौशल एवं तकनीकों का संग्रह है। प्रत्येक कार्य को करने की एक विशिष्टप्रणाली होती है जिससे उस कार्य के लक्ष्य को आसानी से प्राप्त किया जा सके। प्रत्येक कार्य एवं व्यक्ति की अपना विशिष्ट प्रणाली होती है जिसका उपयोग करके वह अपना संपूर्ण कार्य करता है। प्रणाली की विशेषताओं को निम्नानुसार समझा जा सकता है- 


1. यह किसी भी कार्य को करने का एक सुव्यस्थित और सुनियोजित तरीका है।


2. यह व्यावसायिक कार्य की एक मुख्य पद्धति है जो सभी को सर्वमान्य होती है।


3. किसी भी प्रणाली का उपयोग किसी भी कार्य को करने के लिए सूझबूझ के साथ किया जाता है।


4. प्रणालियों का जन्म अनेक अनुसंधानों के पश्चात होता है इसलिए इसे अनेक विद्वानों द्वारा स्वीकारा जाता है।


5. प्रणाली के माध्यम से वैयक्तिक, समूह व समाज की सहायता की जाती है।


अतः उक्त विशेषताओं के आधार पर यह कहा जा सकता है कि प्रणालियों की सहायता किसी भी कार्य को सरलता के साथ संपन्न किया जा सकता है। समाज कार्य एक व्यवसाय आधारित कार्य है जो एक वैज्ञानिक पद्धति के साथ संपन्न किया जाता है। इसी संदर्भ में मिलरसन ने व्यवसाय की निम्नलिखित विशेषताओं का वर्णन किया है-

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1. सैद्धांतिक ज्ञान पर आधारित निपुणताएँ।


2. प्रशिक्षण तथा वृत्ति का प्रावधान 


3. सदस्यों की सक्षमता का परीक्षण।


4. संगठन


5. व्यावसायिक आचरण संहिता एवं 


6. परोपकारी सेवा


इस प्रकार से मिलर द्वारा दी गई विशेषताओं से यह कहा जा सकता है कि समूह कार्य एकव्यवसाय आधारित कार्य है, जो एक समाज कार्य की प्रणाली के रूप में कार्य करती है।


समाज कार्य में कार्यों को करने की कुछ प्रणालियों होता है जिनके माध्यम से कार्यों को क्रमबद्ध एवं वैज्ञानिकरूप से किया जाता है इसमें कुछ निपुणताओं एवं यंत्रों के साथ समाज कार्य की संपूर्ण प्रक्रिया को किया जाता है। आगे आप यह जानने का प्रयास करेंगे कि समाज कार्य की कौन-कौन सी प्रणालियाँ होती हैं और यह किस प्रकार अंर्तसंबद्धता के साथ कार्यों को करती है।