विद्यार्थी मैत्रीपूर्ण वातावरण - Student Friendly Environment
विद्यार्थी मैत्रीपूर्ण वातावरण - Student Friendly Environment
विद्यार्थी मैत्रीपूर्ण वातावरण
समूह कार्य करने के दौरान इस बात का ध्यान रखा जाता है कि विद्यालय में विद्यार्थियों के बीच मैत्रीपूर्ण वातावरण हमेशा बना रहे। इस सन्दर्भ में कार्यकर्ता को कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए-
1. सभी विद्यार्थियों की भावनात्मक समस्याओं को अध्यापकों द्वारा संवेदनशीलता से समझना चाहिए।
2. अध्यापकों को भी समय-समय पर प्रशिक्षण एवं विशेष परामर्श देना चाहिए।
3. अध्यापकों को ऐसे विद्यार्थियों की पहचान करनी चाहिए जिन्हें व्यावसायिक, मानसिक स्वास्थ्य चिकित्सा की आवश्यकता हो ।
4. विद्यार्थियों को यौन शिक्षा का प्रशिक्षण देना चाहिए।
5. शैक्षिक दवाबों का सामना करने के लिए विद्यार्थियों की सहायता करनी चाहिए।
बच्चों के साथ काम करते समय अनुपालन किए जाने वाले सिद्धांत:
1. गोपनीयता का ध्यान रखना बहुत ही महत्वपूर्ण है, वैयक्तिक समस्याओं को सदा गोपनीय रखना चाहिए।
2. पक्षपात कभी नहीं करना चाहिए, कभी भी किसी एक व्यक्ति का पक्ष नहीं लेना चाहिए।
3. समूह के सदस्यों को समूह के उद्देश्य और उनके लक्ष्यों को स्पष्ट किया जाए।
4. सदस्यों के विचारों को ध्यानपूर्वक सुनना चाहिए चाहे आप उन से असहमत क्यों ना हो।
5. मनोरंजनात्मक और अन्य गतिविधियों का चयन करना चाहिए जिनसे सदस्यों को लाभ मिल सके।
6. आयु, लिंग, तथा वर्ग की शर्तो में समरूपता होनी चाहिए।
स्कूल में समूह कार्य
स्कूली संस्थाएं समूह कार्य अभ्यास के लिए विविध अवसरों को प्रदान करती है। समूह सदस्य भी पहले से ही उपस्थित रहते है तथा कभी-कभी उन्हें एकत्रित करने के लिए विशेष प्रयास की आवश्यकता नहीं होती। तथा हम यह कह सकते है कि इसमें समूह निर्माण नहीं होता, वह तो पहले से ही मौजूद रहता है।
इस प्रकार की संस्थाओं में विद्यार्थी समूह स्वयं प्रवेश लेते है याकभी-कभी ये संस्था जरूरतमंद और शिक्षा से वंचित बच्चों को यहाँ दाखिल करवा कर एक स्वस्थ समूह का निर्माण करती है। विद्यार्थी समूह में अध्ययन करते है इसलिए वे स्वयं को यहाँ सहज महसूस करते हैं। साथ ही समूह के साथ विभिन्न गतिविधियों में भाग लेते है। विद्यालयों में समूह कार्य अभ्यास व्यापक सामाजिक व्यवस्था से प्रभावित होते है। स्कूली समूहों के साथ कई प्रकार से कार्य किया जा सकता है। ये सभी उस स्कूली संस्थान के प्रबंधन और लक्ष्य विचारधारा पर निर्भर करता है कि वे समूह को किस तरह के दिशा-निर्देश द्वारा मार्गदर्शित करते हैं। वर्तमान में अधिकांश स्कूलों में शिक्षण का अभ्यास पाठ्य सामग्री या पाठ्यक्रम पर केन्द्रित होता है इसलिए स्कूलों के पास अन्य गतिविधियों के लिए बहुत कम समय रहता है या कभी-कभी बिल्कुल भी समय नहीं रहता। ऐसी स्थिति में समूह कार्यकर्ता का यह दायित्व बनता है कि वह स्कूली प्रबंधन समेत बच्चों के माता-पिता को भी समूह कार्य की महत्ता और उससे होने वाले लाभ से परिचित करवाएं और विभिन्न पदाधिकारियों को इस कार्य हेतु सहमत करे।
स्कूलों में समूह कार्य के लाभ
• बच्चों की झिझक मिटाने व प्रश्न पूछने के कौशल को बढ़ावा मिलना- बच्चों की झिझक मिटाने के लिए बाल सभा में थिएटर का अधिकाधिक प्रयोग यहाँ स्थानीय समस्याओं और कहानियाँ बालसभा में बच्चों के समूह द्वारा प्रस्तुतियाँ करवाई जाती हैं। प्रार्थना सभा में बच्चों को अलग-अलग विषय पर अपने मौलिक विचार प्रस्तुत करने एवं सवाल-जवाब का मौका दिया जाता है।
• बच्चे में सहयोग की भावना का विकास बच्चों को प्रोजेक्ट कार्य करने के अवसर दिए जाते हैं जिनमें प्रोजेक्ट के लिए दिए जाने वाले विषय बच्चों के वास्तविक जीवन से जुड़े हुए होते हैं जैसे खेती की जानकारी, तालाब और अवशिष्ट पदार्थों से प्रदूषण आदि। ऐसे प्रोजेक्ट कार्य कराने से बच्चे उस विषय विशेष से संबंधित ज्ञान का सृजन तो करते ही साथ ही उनमें मिल-जुलकर काम करने की समझ भी बनती है।
• सृजनात्मक कार्यों के लिए अवसर प्रदान करना-बच्चों को सृजनात्मक गतिविधियों के लिए नियमित अवसर दिए जाते हैं। बच्चों द्वारा बनाए गए चित्र, लेख, कविता या कहानियों और हस्तशिल्प को अब बच्चों के पोर्टफोलियों में लगाया जाता है। बच्चों के प्रयासों को उत्साहित करने के लिए ऐसी सभी कृतियों को कक्षाओं की दीवार पर लगा दिया जाता है।
श्रम- श्रम की प्रतिष्ठा की ओर बच्चों का उन्मुखीकरण प्रति वर्ष बच्चों को कम से कम एक आयवर्धक गतिविधि का प्रशिक्षण दिया जाता है जैसे अब तक मेंहदी लगाने, कागज़ के खिलौने बनाने, राखी व ग्रीटिंग्स एवं लिफाफे बनाने का प्रशिक्षण एवं सभी बच्चे कुछ-न-कुछ बनाकर उनका उपयोग करते हैं।
नेतृत्व विकास नेतृत्व विकास के लिए बच्चों के समूह को अलग-अलग कार्य सौंपा जाता है और कोई एक के बच्चा साथियों से समन्वय करते हुए उस गतिविधि को पूरा कराता है। बारी-बारी से बच्चों को नेतृत्व के मौके सौंप जाते हैं। खोजी प्रवृत्ति का प्रोत्साहन / विज्ञान शिक्षण स्कूल में प्रयोगशाला के कुछ उपकरण रखे जाते हैं जिनका उपयोग बच्चे विज्ञान की अवधारणा व सिद्धांतों को समझने के लिए करते हैं। प्रयोग के लिए बच्चे स्थानीय सामग्री का उपयोग करते है। लौकी, करेला एवं विभिन्न सब्जियों का लिटमस परीक्षण या विभिन्न खाद्य सामग्री की घुलनशीलता, विभिन्न बर्तनों की धारिता, आयतन ज्ञात करने आदि का काम बच्चे स्वयं करते हैं। वे अनेक प्रयोग करते हैं एवं स्वयं करके सीखते हैं।
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