समूह कार्य में सिद्धांत के आधार पर समानता एवं अंतर्संबंध - Theory of Similarities and Interrelationships in Group Work

समूह कार्य में सिद्धांत के आधार पर समानता एवं अंतर्संबंध - Theory of Similarities and Interrelationships in Group Work

समाज कार्य की संपूर्ण प्रणालियों के सिद्धांत भी लगभग समान होते हैं जिनका प्रयोग कर कार्यकर्ता समस्याओं के समाधान का प्रयास करता है। चाहे वह वैयक्तिक कार्य के सिद्धांत हो वा समूह कार्य के या फिर समुदाय संगठन के इन सब प्रणालियों में सिद्धांत का अपना विशेष महत्त्व होता है।

समूह कार्य और सामाजिक क्रिया में सिद्धांतो आधार पर यदि अध्ययन किया आए तो सामाजिक क्रिया में मुख्य रूप से विश्वसनीयता का सिद्धांत सर्वप्रथम प्रयोग में लाया जाता है। इस सिद्धांत के उपयोग से कार्यकर्ता समूह एवं समुदाय के मध्य विश्वमा पैदा करता है। के दूसरा सिद्धांत होता है जिसे हम स्वीकृति के सिद्धांत के नाम से जानते हैं। इस सिद्धांत के माध्यम से कार्यकर्ता द्वारा प्रयास किया जाता है कि वह समूह एवं समुदाय के सदस्य जैसे है वैसे ही उन्हें स्वीकार करें और समूह एवं भी कार्यकर्ता के प्रति विश्वास रखे। इस प्रकार स्वस्थ जनमत को तैयार किया जा सकता है। तीसरे सिद्धांत के रूप में हम वैधता के सिद्धांत को लेते इस सिद्धांत के माध्यम से समुदाय प्रयास किया जाता है कि जिस समूह एवं जिन कार्यक्रमों का कार्यान्वयन किया जा रहा है उनको विश्वास हो कि कार्यक्रम नैतिक एवं सामाजिक उत्थान के लिए उचित है। संवेगात्मक सिद्धांत के माध्यम कार्यकर्ता द्वारा यह प्रयास किया जाता कि जनसमुदाय भावात्मक रूप से कार्यक्रम के साथ जुड़े। बहुआयामी रणनीति के सिद्धांत के माध्यम से संपूर्ण क्रिया की रणनीतियों को तैयार किया जाता है एवं मूल्यांकन के सिद्धांत का प्रयोग कर कार्यक्रम की सफलता एवं समुदाय असफलता को ज्ञात किया जाता है। इस प्रकार सामाजिक क्रिया में सिद्धांत का परिपालन किया जाता है। समूह कार्य के भी कुछ विशिष्ट सिद्धांत होते हैं जिनका उपयोग कर समूह कार्य की संपूर्ण प्रक्रिया को किया जाता है ये सिद्धांत है।


नियोजन का सिद्धांत:- 


नियोजन किसी भी कार्य को करने का एक सुव्यवस्थित और सुनियोजित तरीका है जिससे लक्ष्यों को आसानी से प्राप्त किया जा सका नियोजन के अंतर्गत विद्यमान स्थितियों तथा संभावित परिवर्तनों की उपयोगिता को ध्यान में रखकर एक व्यवस्थित तथा सुसंगठित रूपरेखा तैयार की जाती है जिससे भविष्य की परिवर्तनों को अपेक्षित लक्ष्यों के अनुरूप नियंत्रित निर्देशित तथा संशोधित किया जा सके। लक्ष्यों की स्पष्टता का सिद्धांत के माध्यम से समूह के लक्ष्यों को स्पष्ट किया जाता है। सोद्देश्य संबंध के सिद्धांत के माध्यम से समूह के सदस्य निश्चित किए जाए तथा उन्हीं के आधार पर संबंधों की स्थापना एवं विश्लेषण हो। निरंतर व्यक्तिकरण का सिद्धांत सामाजिक समूह कार्य में एक महत्त्वपूर्ण सिद्धांत के रूप में जाना जाता है जिसके माध्यम से समूह कार्यकर्ता ऐसे समूह के सदस्यों की सहायता करता है जो सदस्य समूह में सामंजस्य स्थापित नहीं कर सकते हैं। उन्हें समूह के सदस्यों के साथ सामंजस्य स्थापित करने के लिए प्रेरित करता है। इसके अलावा समूह सदस्यों की विभिन्न इच्छाओं और आवश्यकताओं को भी वह निरंतर व्यक्तिकरण के माध्यम जान सकता है।

अंतःक्रिया का सिद्धांत- संपूर्ण समूह कार्य प्रक्रिया सामूहिक गतिविधियों के माध्यम नियोजित की जाने वाला प्रक्रिया है जिसके माध्यम से ही संपूर्ण कार्य संपन्नकिए जाते हैं। यह सामूहिक प्रक्रिया कार्यकर्ता और समूह सदस्यों के मध्य होने वाली अंत क्रियाओं पर ही निर्भर करती है। सदस्यों में आपसी संबंध सकारात्मक रूप में हो तथा अंत क्रिया का प्रभाव एक ही दिशा में हो अन्यथा नकारात्मक अंतःक्रिया समूह कार्य प्रक्रिया में व्यवधान उत्पन्न कर सकती है। जनतंत्रीय सामूहिक आत्मनिश्चयीकरण का सिद्धांतः जनतंत्रीय सामूहिक क्रिया में कार्यकर्ता समूह का समूह के लिए समूह के द्वारा कार्य करने का कार्यकर्ता द्वारा बल प्रदान किया जाता है। लोचदार कार्यात्मक संगठन के सिद्धांत के माध्यम से समूह कार्यकर्ता इस प्रकार का प्रयास करता है कि किसी भी गतिविधि को इतना सरल आसान बनाया जाए जिससे प्रत्येक सदस्य गतिविधियों का हिस्सा बन जाए और समय व आवश्यकतानुसार कार्यक्रम में परिवर्तन संभव हो सके। प्रगतिशील कार्यक्रम अनुभवों का सिद्धांत प्रत्येक स्तर पर समूह को कार्यक्रम का हिस्सा बनने के लिए प्रेरित करता है जिससे कि प्रत्येक सदस्य कार्यक्रम का हिस्सा बन जाए और सदस्यों में आत्मनिर्णय की क्षमता का विकास हो। 

संपूर्ण प्रक्रिया प्रगतिशील समूह एवं कार्यकर्ता कार्यक्रम प्रगतिशील पर निर्भर करता है, अत: प्रगतिशील कार्यक्रमों के अनुभवों के सिद्धांत को समूह कार्य में विशिष्ट स्थान दिया जाता है। 


साधनों के उपयोग का सिद्धांत:- साधनों के उपयोग कुशलतापूर्वक करना चाहिए जिसमें कि किसी भी प्रकार की कोई समस्या उत्पन्न न हो और साधनों का उचित उपयोग किया जा सके। संस्था एवं संपूर्ण वातावरण और मिलकर बहुत से साधन रखते हैं जिनका प्रयोग इस सिद्धांत के माध्यम से किया जाता है। मूल्यांकन का समुदाय | सिद्धांत एक महत्त्वपूर्ण सिद्धांत है जो प्रत्येक प्रणाली में अपनी महती भूमिका को अदा करता है इस सिद्धांत के माध्यम से समूह की अंतःक्रियाओं समूह की शक्तियों सदस्यों की कमजोरियों, समूह के अनुभव एवं उनकी क्षमताओं का आँकलन किया जाता है। इस प्रकार कहा जा सकता है कि समाजिक क्रिया एवं समूह कार्य के सिद्धांतों में सिद्धांत पाया जाता है जो कि उनके सिद्धांत से स्पट होता है। अतः संक्षेप में कहा जाए तो यह प्रतीत होता है कि सामाजिक क्रिया समूह कार्य के साथ सिद्धांत तो है ही


इसके साथ-साथ समाज कार्य की अन्य प्रणालियों के साथ आपस में अंतसंबंध पाया जाता है और इसी के आधार पर यह एक साथ मिलकर कार्य करती है और समस्याग्रस्त व्यक्ति की समस्या का समाधान प्रस्तुत कर उसे समाज में सामंजस्य स्थापित करना सिखाती है।