चिकित्सालय / अस्पतालों में कार्य करने वाले समूहों के प्रकार - Types of Groups Working in Hospitals
चिकित्सालय / अस्पतालों में कार्य करने वाले समूहों के प्रकार - Types of Groups Working in Hospitals
चिकित्सालय / अस्पतालों में कार्य करने वाले समूहों के प्रकार
1. शैक्षिक समूह:- ये समूह रोग से संबंधित सूचनाओं को जन-जन तक प्रसारित करते हैं, साथ ही रोग का ये शरीर पर होने वाला प्रभाव किस तरह हानिकारक हो सकता है और इससे बचाव के उपाय भी ये लोग प्रसारित करते हैं। उदहारण एड्स के मरीज को एड्स से संबंधित जानकारी और उपचार हेतु सही जानकारी देकर उसका मार्गदर्शन करना।
2. सहायता समूह:- ये समूह रोगी को आवश्यक सामाजिक और भावनात्मक सहयोग प्रदान करते हैं ये रोगियों को समुचित सामना करने वाली तकनीकें उपलब्ध करवा सकता है, ऐसा करते समय वे व्यक्ति की आवश्यकताओ और पर्यावरण को ध्यान में रखते हैं।
3. प्रशिक्षण समूह:- ये समूह रोगियों को नए कौशल पढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करता है, जो उनके अस्पताल से छुट्टी मिलने पर उनकी सहायता करता है।
इस संबंध में कुछ सुझाव निम्नवत हैं-
1. अस्पताल में समूह कार्यकर्ता को यह समझना अत्यंत आवश्यक है कि वह किसी भी बैठक में शामिल होने के लिए रोगी पर दबाव ना बनाए
2. कार्यकर्ता को लचीला दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
3. रोगी का व्यक्तिकरण एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है।
गली (स्ट्रीट चाइल्ड) के बच्चों के साथ समूह कार्य
एक राष्ट्रीय संगठन चाइल्ड लाइन देश भर में 0 से 18 साल तक के बच्चों के लिए 24 घंटे सेवा हेतु कार्यरत रहता है। ये संस्थान अपने स्वयं सेवकों के साथ मिल कर पूरे देश में जरूरतमंद बच्चों की मदद करता है, साथ ही लोगों को जागरूक करते हुए चाइल्ड लाइन की जानकारी देता है। ये संगठन लोगों से आह्वान करता है कि आज का बचपन राष्ट्र का भविष्य है, इसलिए चाइल्ड लाइन सब सेंटर के दोस्ती अभियान में सक्रिय भूमिका निभा कर गुमशुदा बच्चे शोषित बच्चे, घर से भागे हुए बच्चे, ऐसे बच्चे जिन्हें देखभाल की जरूरत है बाल मज़दूर ऐसे बच्चे जहां भी दिखे तो 1098 पर निशुल्क कॉल कर जानकारी दें ताकि ऐसे बच्चों की मदद की जा सके। इस क्षेत्र चाइल्ड लाइन सब सेंटर का कार्य सराहनीय है।
ये संगठन बेघर बच्चों को आश्रय देते हैं बच्चे जब चाहे इन आश्रय स्थलों में आ सकते हैं और जब चाहे इन्हें छोड़ सकते हैं, इन आश्रय स्थलों में इन्हें भोजन, कपडे, रहने और शिक्षा तथा मनोरंजन की व्यवस्था कराई जाती है (इसे शेल्टर सुविधा कहा जाता है)। अनेक बच्चे इन एजेंसियों तथा इनके स्टाफ सदस्यों के साथ जुड़ जाते हैं और एक बार सौहार्द स्थापित होते ही स्टाफ सदस्य बच्चो को विभिन्न तरीके से प्रभावित करने का प्रयास करते हैं, जैसे- जीवन कौशलों और जीवन जीने के तरीकों पर प्रयोग करते हैं, इस हेतु वे विभिन्न साधनों का प्रयोग करते है, इसमें सभी कार्यकलाप मुख्य रूप से समूह आधारित होते हैं जैसे- खेल, चल चित्र दिखाना आदि। किसी एक क्षेत्र में अपना कार्य पूरा करने के पश्चात ये संगठन अपना एक कार्यक्रम करता है, जिसे ओपन हॉउस कहा जाता है। ओपेन हाउस कार्यक्रम बच्चों के लिए खुला मंच है जहां बच्चे अपने अनुभूतियों अपनी समस्याओं को खुलकर रखते हैं एवं चाइल्ड लाइन से अपनी समस्याओं के वकालत की आशा करते हैं। चाइल्ड लाइन ओपेन हाउस में बच्चों द्वारा उठाई गई समस्याओं का लिखित प्रतिवेदन तैयार करते हैं एवं संबंधित विभाग को उससे अवगत कराने का कार्य करते हैं।
इस कार्यक्रम में मुद्दे सीधे ही बच्चों से जुड़े हुए होते हैं। विभिन्न बीमारियों, मादक द्रव्यों के सेवन सवाल से दुष्प्रभाव शोषण संबंधी आदि प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की जाती है। विषयों को बहुत ही सरल और औपचारिक तरह से पेश किया जाता है। विषय से संबंधित प्रश्नों को श्रोताओं के सामने खुले तौर पर रखा जाता है तथा उनके उत्तर देने हेतु भी उन्हें प्रोत्साहित किया जाता है। जब आवश्यकता समझी जाती है तो स्पष्टीकरण भी प्रस्तुत किया जाता है। समिति इस प्रकार की कार्यनीति का पालन करती है जिससे सबसे संवेदनशील तथा ऐसे बच्चों के वर्गों को शामिल किया जा सके जो पहुँच से बाहर होते है। कभी कभी वे लोग संस्थान के इस माहौल में खुद को मुक्त नहीं पाते ऐसे में संस्थान स्वयं को उन बच्चों के अनुसार दालने का प्रयास करता है तथा कभी-कभी खुद की नीतियों में भी बदलाव लाता है।
इस दृष्टिकोण के साथ ही समूह कार्य में संशोधन किया जाता है। लो समय तक समूह कार्यकर्ता को पूर्व निश्चित स्थान और नियमित समय पर समूह की बैठकों के लिए दबाव नहीं दिया जाता है। बहरहाल, इस दृष्टिकोण में समूह कार्य के अनेक सिद्धांतों को देखा जा सकता है।
उपर्युक्त संशोधनों के साथ स्वीकार्यतास्व-समूह निर्धारण, कार्यात्मक लचीलापन जैसे सिद्धांतों का प्रयोग किया जाता है। सदस्यों को परस्पर सीखने और भाग लेने के लिए उत्साहित करते हैं, सहयता परिवारों के लिए बच्चों के नेटवर्क के अंतर्गत अनुपूरक कार्यों को प्रोत्साहित किया जाता है एंजेंसी के संस्थागत समूह कार्य में नवीनीकरण देखा जा सकता है। समूह कार्य की स्वीकार्यता को सर्जन के रूप में देखा जा सकता है और इसका प्रयोग अन्य एजेंसियों में किया जाता है।
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