सामािजक समूह कार्य में मूल्य और सिद्धांत -Values and Principles in Social Group Work

सामािजक समूह कार्य में मूल्य और सिद्धांत -Values and Principles in Social Group Work

सामाजिक समूह कार्य मे मूल्य एवं दर्शन


मूल्य समाज द्वारा मान्यता प्राप्त इच्छाएं एवं लक्ष्य हैं जिनका आंतरीकरण समाजीकरण की प्रक्रिया के माध्यम से होता है। मूल्यों के आधार पर ही व्यक्ति की जीवन शैली का निर्धारण होता है तथा अंत क्रियाएँ संभव होती हैं। मूल्यों को परिभाषित करते हुऐ डोरौथी ली ने कहा है कि मानवीय मूल्यों से किसी एक मूल्य या मूल्यों की एक पद्धति से मेरा अभिप्राय है कि वह आधार जिस पर व्यक्ति किसी एक मार्ग को किसी दूसरे मार्ग की अपेक्षा अच्छा या बुरा, उचित या अनुचित समझते हुए ग्रहण करता है।

हम मानवीय मूल्यों के विषय में केवल व्यवहार द्वारा ही जान सकते हैं। मानव व्यवहार द्वारा समूह निर्माण में मूल्य सामाजिक नियंत्रण के साधन के रूप में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं इन्हीं मूल्यों द्वारा एक समूह समुदाय और व्यक्ति अपने व्यवहार पर नियंत्रण रखते हैं। समाज कार्य मूल्यों को आगे विस्तार से समझा जाएगा।


समाज कार्य में दर्शन सामाजिक जीवन के मौलिक सिद्धांतों और धारणाओं की व्याख्या करता है। दर्शन सामाजिक संबंधों के सर्वोच्च आदर्श का निरूपण करता है। लियोनार्ड ने दर्शन को परिभाषित करते हुए कहा है कि- दर्शन विश्व के विभिन्न दृष्टिकोणों की प्रत्ययात्मक अभिव्यक्ति से अधिक कुछ और है- आदर्शात्मक शाप के अतिरिक्त यह मनुष्य के बीच तथा मनुष्य व संपूर्ण जगत के बीच संबंधों की मूल सत्यताओं का निरूपण करता है मानव विज्ञानों को वैज्ञानिक होने के लिए दार्शनिक होना होगा। विलियम जेम्स ने दर्शन के संबंध में कहा है कि प्रत्येक  प्राणी का एक दर्शन होता है, जो उसके जीवन का मार्गदर्शन करता है। अतः कहा जा सकता कि दर्शन से तात्पर्य कार्य को एक दिशा देना है जो व्यक्ति के अपने मतानुसार हो सकती है यह समान भी हो सकती है और भिन्नता भी प्रकट कर सकती है।


सामाजिक समूह कार्य में मूल्य और सिद्धांत


फ्रीडलैंडर के मतानुसार समाज कार्य के मौलिक मूल्यों एवं सिद्धांतों का जन्म स्वतः नहीं हुआ है, अपितु इनकी जड़ें उन गहरे एवं उपजाऊ विश्वासों में मिलती हैं जो सभ्यताओं को सीखते हैं। अमेरिका की प्रजातांत्रिक व्यवस्था का आधार नैतिक एवं आध्यात्मिक समानता, वैयक्तिक विकास की स्वतंत्रता सुअवसरों के स्वतंत्र चुनाव की स्वतंत्रता, न्यायपूर्ण प्रतिस्पर्धा, वैयक्तिक स्वतंत्रता पारस्परिक प्रतिष्ठा एवं सर्वजन के अधिकार हैं। प्रजातंत्र के यह सभी आदर्श अभी तक पूर्ण रूप से प्राप्त नहीं किए जा सके हैं तथा समाज कार्य इन्हीं आदर्शात्मक की प्राप्ति का प्रयास कर रहा है। हर्बर्ट बिस्नो ने समाज कार्य के मूल्यों को चार क्षेत्रों में विभाजित किया है. प्रथम व्यक्ति की प्रकृति के संदर्भ में, द्वितीय समूहों, व्यक्तियों एवं समूहों और व्यक्तियों के आपसी संबंधों के संदर्भ में तृतीय समाज कार्य प्रणालियों एवं कार्यों के संदर्भ में एवं चतुर्थ सामाजिक कुसमायोजन एवं सामाजिक परिवर्तन के संदर्भ में। हर्बर्ट बिस्नो द्वारा कहे गए इन समस्त मूल्यों को यदि हम समायोजित करके अध्ययन करें तो यही स्पष्ट होता है कि अपने अस्तित्व के कारण ही प्रत्येक व्यक्ति मूल्यवान है, यह मूल्य समस्त समाज कार्य दर्शन का आधार स्तंभ है। साथ ही स्पष्ट होता है कि समाज कार्य का द्विमुखी दृष्टिकोण है।

एक ओर समाज कार्य व्यक्तियों का संस्थागत समाज के साथ समायोजन स्थापित करने में सहायता करता है और दूसरी ओर यह संस्थागत समाज के आवश्यक क्षेत्रों में परिवर्तन लाने का प्रयास करता है। समाज कार्य में सिद्धांतों का भी अपना अलग ही महत्त्व है जो कार्य को एक क्रमबद्धता के साथ करने में हमारी सहायता करते हैं और यही क्रमबद्धता समूह कार्य के सिद्धांतों मे भी प्रतीत होती है। समूह कार्य के सिद्धांतों में मुख्य रूप से नियोजन का सिद्धांत, लक्ष्यों की स्पष्टता का सिद्धांत, सोद्देश्य संबंध का सिद्धांत, निरंतर व्यक्तिकरण का सिद्धांत निर्देशित सामूहिक अंतःक्रिया का सिद्धांत जनतंत्रीय सामूहिक आत्मनिश्चयिकरण का सिद्धांत लोचदार कार्यात्मक संगठन का सिद्धांत प्रगतिशील कार्यक्रम अनुभवों का सिद्धांत साधनों के उपयोग का सिद्धांत, मूल्यांकन का सिद्धांत भावनाओं के उद्देश्य पूर्ण प्रगटन का सिद्धांत, आत्म-संकल्प का सिद्धांत आदि मुख्य सिद्धांतों के रूप में देखे जाते हैं जिनके माध्यम से संपूर्ण समूह कार्य प्रक्रिया को लक्ष्य प्राप्ति हेतु आसानी से किया जा सकता है।


सामाजिक समूह कार्य में मूल्य (Values)


समाज कार्य एक व्यावसायिक कार्य है और बिना मूल्यों के कोई भी व्यवसाय नहीं बन सकता। समाज कार्य के माध्यम से व्यक्ति में सामाजिक एवं व्यक्तिगत परिवर्तन लाने का प्रयास किया जाता है, इसलिए समाज कार्य में मूल्यों का होना आवश्यक है। समाज कार्य की विभिन्न अवधारणाओं का ज्ञान और समाज कार्य की विधियोंका ज्ञान कार्यकर्ता के लिए पूर्ण रूप से उपयुक्त नहीं हो सकता जब तक वह इस ज्ञान और समाज कार्य के अभ्यास के फलस्वरूप एक विशेष प्रकार के व्यक्तित्व का विकास नहीं कर लेता। यह व्यक्तित्व समाज कार्य की मनोवृतियों एवं मूल्यों पर आधारित होता है। इसकी सहायता से समाज कार्यकर्ता व्यक्तिगत, सामूहिक एवं सामुदायिक क्षेत्रों में उत्पन्न होने वाली समस्याओं और विरोधी मूल्यों को दूर करने का प्रयास करता है। वह ऐसे मूल्यों को स्वीकार करने में सहायता देता है जो सभी को मान्य हों और जिससे संपूर्णसमुदाय, समूह एवं व्यक्तियों का विकास संभव हो सके। समाज कार्य के अनेक मूल्य हैं जो समाज कार्य को एक व्यावसायिकता प्रदान करते हैं अनेक विद्वानों के द्वारा समाज कार्य के इन मूल्यों को अलग-अलग रूप में परिभाषित किया गया है जो समाज कार्य व्यवसाय को एक दिशा प्रदान करते हैं और जिनका समावेश समूह कार्य प्रणाली में किया जाता है


कौस (koss) के अनुसार समाज समूह कार्य के मूल्य -


1. मनुष्य की योग्यता एवं उसकी गरिमा (The worth and dignity of man)।


2. संपूर्णमानवीय सामर्थ्य को प्राप्त करने की मानव प्रकृति की क्षमता का विकास करना (The human nature to achieve full human potential) 


3. मतभेदों के लिए सहनशीलता (Tolerance of differences)


4. मनुष्य की मौलिक आवश्यकताओं की संतुष्टि Satisfaction of basic human needs)। 


5. स्वतंत्रता (Liberty


6. आत्म-निर्देशन (Self-direction)।


7. अनिर्णयात्मक प्रवृति (Non-judgemental attitude) |


8. रचनात्मक सामाजिक सहयोग (Constructive social cooperation) 


9. कार्य की महत्ता तथा अवकाश का रचनात्मक सदुपयोग (Importance of work and constructive use of leisure) |


10. मनुष्य एवं प्रकृति के खतरों से अपने अस्तित्व की सुरक्षा (Protection of one's existence from the dangers caused by man and nature)! 


कोनोपका (Konopka) के अनुसार -


1. प्रत्येक व्यक्ति के प्रति आदर की भावना एवं उसका अपनी क्षमताओं के संपूर्ण विकास का अधिकार (Respect for every person to the fullest development of his/her potential) | 


2. व्यक्तियों की पारस्परिक निर्भरता एवं एक-दूसरे के प्रति अपनी योग्यतानुसार उत्तरदायित्व (Mutual development of the individual and responsibility towards each other according to their abilities.)|


नोटः कोनोपका ने द्वितीयक मूल्यों के प्रति मतभेद को वैज्ञानिक अन्वेषण द्वारा दूर करने का सुझाव दिया है और लिन्डमैन (Lindman) के विचारों की व्याख्या करते हुए कहा है कि समाज कार्यकर्ता एक ऐसा प्रभावशाल अस्तित्व है जो समाज कार्य के प्राथमिक मूल्यों की रक्षा करता है और उन्हें व्यावहारिक रूप देने का प्रयास करता है।


हर्बर्ट बिनो (Herbert Bisno) ने समाज कार्य/समूह कार्य के चार प्रमुख मूल्यों को विभाजित करते हुए उसका वर्णन किया है. 


1. व्यक्ति की प्रकृति के संदर्भ में (Nature of the Individual) समूहों व्यक्तियों एवं समूहों और व्यक्तियों के आपसी संबंधों के संदर्भ में (The relation between Group Group and Individuals and between individuals) | 


2. समाज कार्य की प्रणालियों एवं कार्यों के संदर्भ में (Function and Method of social work ) | 


3. सामाजिक कुसमायोजन एवं सामाजिक परिवर्तन के संदर्भ में (Social Maladjustment and social change)।


फ्रीडलेंडर ने समाज समूह कार्य के मूल्य को परिभाषित करते हुए कहा था कि समाज कार्य (समूह कार्य) के मौलिक मूल्यों का जन्म राहों के किनारों पर उपजे जंगली पुष्पों की भाँत नहीं हुआ, बल्कि इन मूल्यों की जड़ें उन गहरे, उपजाऊ विश्वासों में देखने को मिलता है जो सभ्यताओं को सींचते आए हैं।

प्रो. मिर्जा आर. अहमद ने विभिन्न भारतीय एवं पाश्चात्य राजनैतिक एवं सामाजिक विचारकों, विशेषज्ञों, शिक्षाविदों के विचारों को उद्धरित करते हुए समाज कार्य के निम्नलिखित मूल्यों को प्रतिपादित किया है

रूददर दत्त (After Ruddar Dutt) के विचारों से प्रेरित होकर समाज कार्य आर्थिक एवं राजनैतिक प्रभुसत्ता के समान रूप से पुनर्वितरण पर विश्वास करता है ताकि आर्थिक प्रोग्राम के अंतर्गत निर्धनों को उनका पूरा लाभ मिल सके। गोल्ड स्मिथ (After Gold Smith) के विचारों से प्रेरित होकर समाज कार्य उत्पादन की सामाजिक व्यावहारिक पर विश्वास करता है तथा उत्पादन को सामाजिक उद्देश्य के अधीन मानता है। होसलाइज़ (After Hoselize) के विचारों से प्रेरित होकर समाज कार्य का विश्वास है कि आर्थिक भूमिका उपलब्धि के मानक के आधार पर ही निर्दिष्ट होनी चाहिए न कि प्रदत्त प्रस्थिति या सामाजिक स्थिति के अनुसार आरक्षित होनी चाहिए। इन उपर्युक्त आधारों पर प्रो. मिर्जा ने समाज समूह कार्य के मूल्यों को उल्लेखित किया है। अतः विभिन्न विद्वानों सामाजिक विचारकों, विशेषज्ञों, शिक्षाविदों के विचारों से अवगत होने के पश्चात समूह कार्य के मूल्यों को निम्नानुसार बताया जा सकता है -


1. आत्म निर्णय का अधिकार - इसके द्वारा समूह सदस्यों से यह विश्वास किया जाता है कि वे स्वयं अपने निर्णय लेने में सक्षम बन सकें और साथ ही अपने मार्ग को प्रशस्त कर सकें। 


2. समूह सदस्यों की योग्यता एवं महत्ता पर विश्वास - प्रत्येक व्यक्ति में अपनी कुछ विशेषताएँ होती हैं जो दूसरे किसी अन्य व्यक्ति में नहीं होती। प्रत्येक सदस्य को समान अवसर प्रदान करना चाहिए जिससे वह समस्या के समय स्वयं ही समस्या का निराकरण खोजने में सक्षम हो जाए। समूह कार्य का लक्ष्य तब तक पूरा नहीं हो पाएगा जब तक कि प्रत्येक सदस्य की योग्यता एवं महत्ता पर विश्वास नहीं किया जाएगा। इसी आधार पर कार्यकर्ता अपनी भूमिका का क्रियान्वयन करता है। 


3. आत्म पूर्णता - सामाजिक सामूहिक कार्य का मुख्य उद्देश्य समूह का पूर्ण विकास करना होता है। इसके अंतर्गत उन्हीं कार्यक्रमों को उपयोग में लाया जाता है, जिनसे सदस्यों का सर्वांगीण विकास संभव होता है।


4. विकास का मुख्य आधार संबंध - मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है, जिसका आधार संबंधों पर निर्भर करता है और व्यक्ति का सर्वांगीण विकास भी इन्हीं सकारात्मक संबंधों पर आधारित होता है।


5. व्यक्तित्व अंतरों की मान्यता एवं संस्कृति - प्रत्येक व्यक्ति विचारों, भावनाओं, चिंतन तथा सामाजिक पृष्ठभूमि में भिन्न होता है। उसकी शक्तियों तथा योग्यताओं में भी भिन्नता होती है। समूह कार्य में सभी व्यक्तिओं के विचारों को महत्त्व देकर उन्हें प्रोत्साहित करना चाहिए।


6. समूह पर संस्कृति का प्रभाव - प्रत्येक मनुष्य किसी-न-किसी संस्कृति, परंपरा व रीति-रिवाज इत्यादि को मान्यता प्रदान करता है एवं उसी के अनुसार अपना प्रभाव समूह में प्रदर्शित करता है। कार्यकर्ता यह ध्यान में रखता है कि किस समूह का निर्माण किया जा रहा है उसमें सदस्यों की संस्कृति में कम भिन्नता पाई जाए इसलिए समूह सदस्यों की संस्कृति का अध्ययन पूर्व मेंकर लेना चाहिए।


7. परिवर्तन का विरोध - परिवर्तन संसार का नियम है यह निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। समूह में भी निरंतर परिवर्तन स्वाभाविक ही है एवं इन परिवर्तनों के चलते कई बार समूह में विरोधाभास भी हो जाता है। अतः समूह कार्यकर्ता द्वारा इस विरोधाभास को समाप्त करने का प्रयास करना चाहिए। 


8. विकास के समान अवसर - समूह कार्य प्रक्रिया में सदस्यों को समान अवसर प्रदान करना चाहिए जिससे कि वे समूह की गतिविधियों में समान रूप से भाग ले सकें और समूह में सक्रियता बनाए रखें।


अतः उपर्युक्त मूल्यों का अध्ययन करने के बाद यह कहा जा सकता है कि सामाजिक समूह कार्य में मूल्य एक आधारशिला की भाँति कार्य करते हैं जो संपूर्ण समूह कार्य प्रक्रिया में प्रभावी भूमिका को अदा करते हैं अतः इन मूल्यों का समूह कार्य प्रक्रिया में अत्यंत ही महत्व है।