अगस्त कॉम्ट का प्रारंभिक जीवन (2) - The Early Life of August Comte
अगस्त कॉम्ट का प्रारंभिक जीवन (2) - The Early Life of August Comte
बौद्धिक पृष्ठभूमि
फ्रांसीसी क्रांति और ज्ञानोदय के गवाह अगस्त कॉम्ट थे परंतु उनकी भावना इसके विरुद्ध थी। उनके धार्मिक विचार तात्कालिन फ्रांसीसी धार्मिक विचारकों डी. बोनाल्ड एवं डी. मात्रे के समान होते हुए भी उससे भिन्न थे। अगस्त कॉम्ट स्वयं को बेकन डी कार्टेस की बौद्धिक परंपरा को आगे बढ़ाने वाला मानते थे। वे हीगल से परिचित थे और इमानुएल कॉम्ट से प्रभावित थे। उन्होने मोटेस्क्यू, डेविड ह्यूम आदि को भी पढ़ा था। सेंट साइमन के विचारों से गंभीर रूप से प्रभावित थे हालांकि उनसे उनका विवाद लगातार बना रहा। समाज का विज्ञान, विज्ञानो का वर्गीकरण कॉम्ट ने साइमन से ही लिए थे। इन सभी विद्वानों के अतिरिक्त कॉम्ट सबसे अधिक टरगट से प्रभावित थे क्योंकि टरगट का कहना था कि मनुष्य प्रगति की राह पर चल पड़ा है और उसे कोई नहीं रोक सकता। सब की प्रगति तभी होगी जब की गणित एवं प्राकृतिक विज्ञानों की प्रगति होगी और प्रगति की इसी धारणा को अगस्त कॉम्ट ने टरगट से लिया था।
अगस्त कॉम्ट ने समाज के इतिहास समाज की बनावट, समाज में परिवर्तन और समाज के भविष्य के बारे में खूब लिखा। हांलाकि कॉम्ट किसी भी तरह की कोई शास्त्रीय बौद्धिक मंडली में सम्मिलित नहीं थे और न ही वे किसी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर थे और न ही किसी बौद्धिक संस्थान में काम करते थे। कॉलेज की परीक्षा विभाग में जब कॉम्ट थे तब उनका संपर्क केवल पूर्ववर्ती छात्रों एवं शिक्षकों के संपर्क में रहा है।
एल. ए. कोजर ने लिखा है कि इकॉल के अनेक ऐसे छात्र थे, जो अपने जमाने के होनहार विद्वान कहे जाते थे। वे फ्रांस के समाज को बदलना और सवारना चाहते थे और कॉम्ट तुलनात्मक रूप से अधिक गंभीर थे। उन्होंने अपनी पुस्तकों में अपने विचारों को प्रस्तुत किया एवं स्वयं घूम-घूम कर बौद्धिक भाषण दिया कि प्रत्यक्षवादी समाज बनाएं।
कॉम्ट की व्यवस्था और श्रंखला के पक्षधर थे। व्यवस्था को हिंसक रूप में बदलने के पक्ष में कभी नहीं रहे। परंतु क्रमिक परिवर्तन के समर्थक थे।
पूंजीवाद के समर्थक होते हुए भी उन्होंने पूंजीवाद के नकारात्मक पक्षों की आलोचना की। उन्होंने पूंजीवाद को एक नवीन मानवीय चेहरा प्रदान करने की वकालत की। फ्रांसीसी क्रांति की उठापटक से चिंतित कॉम्ट श्रंखला एवं व्यवस्था चाहते थे। वह नैतिकता के समर्थक थे। उनकी कल्पना का समाज नैतिक समाज होगा। समाचार रूपी विज्ञान के निर्देश में वे एक नैतिकवादी, प्रत्यक्षवादी समाज का निर्माण करना चाहते थे। अपने प्रेम प्रसंग के कारण स्त्री संबंधी उनके विचार एवं सार्वभौमिक प्रेम के विचार और अप्रासंगिक जरूर है परंतु इतिहास को समझने के लिए उन्होंने एक शैली विकसित की थीं।
अगस्त कॉम्ट ने डी मात्रे और डीबोनाल्ड की भी बहुत अधिक प्रशंसा की है। यह दोनों विद्वान धर्म के स्वर्ण युग की वापसी चाहते थे।
कॉम्ट ब्रिटिश विद्वान एडम स्मिथ के विचारों से भी प्रभावित थे। पर एडम स्मिथ की इस बात पर आलोचना की थी कि उन्होंने बाजार को ही सब कुछ बना दिया। कॉम्ट उदारवादी नहीं थे परंतु उन्होंने पूंजीवाद का समर्थन किया। कहते थे कि प्रत्यक्षवादी समाज में उद्योग के कप्तान ही समाज के कप्तान होंगे तब शायद वे पूंजीवाद की ही वकालत कर रहे थे। अगस्त कॉम्ट, सेंट साइमन के अनेक विचार और धारणाएं अपना ली थी। मानव के प्रत्यक्षवादी विज्ञान की अवधारणा, विज्ञानों के वर्गीकरण की धारणा मूलत: सेंट साइमन की थी जिन्हें की वह सही और सुसंगत रूप में प्रस्तुत नहीं कर सके थे।
अगस्त कॉम्ट एडोल्फ क्विटलेट से प्रभावित नहीं थे। सोशल फिजिक्स शब्द का प्रयोग 1822 में ही किया था। बाद में पॉजिटिव फिलॉसफी के प्रथम खंड में उन्होंने इसका फिर प्रयोग किया।
क्विटलेट ने अपनी पुस्तक 'ऑन मैन एंड डेवलपमेंट ऑफ ह्यूमन फैकल्टीज' का उपशीर्षक 'एस्से आन सोशल फिजिक्स रख दिया कॉम्ट क्वीटलेट के विचारों से नाराज थे और शब्दावली को उठा लिए जाने से और नाराज हुए। बाद में उन्होंने सोशियोलॉजी नाम का शब्द नए विषय के लिए अपना लिया।
व्यवसायिक जीवन
अगस्त कॉम्ट का अध्ययन एक योजना के अनुसार ही होता था। अध्ययन के अलावा उनके सभी कार्य पूर्व निर्धारित हुआ करते थे। यहां तक कहा जाता है कि अगस्त कॉम्ट जब घूमने निकलते थे तो आस पास के लोग घड़ी मिलाया करते थे। अध्ययन के अतिरिक्त लेखन का कार्य भी नियमित तौर पर करते थे उनके लेखन में दो विशेषताएं देखने को मिलती थी। पहला उन्हें जो लिखना होता था उसकी संक्षिप्त रूपरेखा बना लेते थे। इससे इसमें स्पष्टता एवं विषय का विस्तृत रूप दिखाई देता था। सामग्री को इतना स्पष्ट कर देते थे कि उसमें स्वाभाविक रूप से क्रमबद्धता आ जाती थी उनकी रचनाओं में यह क्रमबद्धता स्पष्ट रूप से देखने को मिलता है।
अपनी असाधारण प्रतिभा, बौद्धिक क्षमता, बौद्धिक प्रखरता, स्वतंत्रता व तार्किक विचारधारा के कारण कॉम्ट ने शीघ्र ही शिक्षित समाज में एक प्रतिष्ठित स्थान प्राप्त कर लिया था। परंतु दूसरी ओर कुछ लोगों का कहना था कि कॉम्ट के लेखों में एकरूपता का पर्याप्त अभाव था शायद उनकी प्रथम कृति के पश्चात उनकी असाधारण प्रतिभा व क्षमता का विनाश होना प्रारंभ हो गया था।
अगस्त कॉम्ट ने एक व्यवस्थित एकेडमिक नौकरी करने का भी बड़ा प्रयास किया। उन्होंने कभी बहुत सुखद जीवन नहीं जिया। वे प्रत्यक्षवाद के पैगंबर हो गए। उन्होंने 1848 में प्रत्यक्षवादी संघ का गठन किया। झोला टांग कर पैगंबरी की और खूब भाषण दिए प्रारंभ में उनके भाषणों में बड़े-बड़े दिग्गज जैसे कि जर्मनी के सामाजिक दार्शनिक हंबोल्ट, इंग्लैंड के दार्शनिक एवं उपयोगिता वादी विद्वान जे. एस. मिल आदि शामिल होते थे। बाद के दिनों में उनके भाषणों में केवल मजदूर गरीब शिल्पकार और बेरोजगार लोग ही श्रोता होते थे।
अगस्त कॉम्ट के अनुयायियों की संख्या कम होने के बाद भी उनके प्रशंसकों की संख्या काफी अधिक थी। उन्होंने अपने विचारों व विज्ञान व्याख्यानों के द्वारा अनेक लोगों को प्रभावित किया।
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