मैक्स वेबर जीवन परिचय एवं कृतियाँ (2) - Max Weber Biography and Works (2)
मैक्स वेबर जीवन परिचय एवं कृतियाँ (2) - Max Weber Biography and Works (2)
बौद्धिक पृष्ठभूमि
बौद्धिक क्षेत्र में उनके सैद्धांतिक योगदान की यात्रा 1889 में प्रारंभ हुई। जब उन्होंने पहली बार मध्य विभिन्न संगठनों के इतिहास के लिए एक दैन नामक एक शोध कार्य कानूनी परिपेक्ष्य से प्रस्तुत किया। अल्पायु से ही वेबर प्रतिभाशाली शिक्षार्थी के रूप में जाने जाने लगे। थयोडर थोमसन एवं एडोल्फ गोल्ड स्मिथ उनके प्रमुख अध्यापकों में से थे। बाद में वेबर बर्लिन विश्वविद्यालय में ही कानून के प्राध्यापक नियुक्त हो गए। उन्होंने सन 1891 में उन्होने रोम का कृषि सम्बंधी इतिहास तथा सार्वजनिक और व्यक्ति कानून के लिए महत्ता नामक ग्रंथ तैयार किया। 1892 में 900 पृष्ठों की एक विशाल पुस्तक तैयार की, जो एलबी नदी के पूर्वी प्रांतों के खेतिहर मजदूरों के अध्ययन से संबंधित थी। इस पुस्तक में उन्होंने रोमन समाज के सामाजिक आर्थिक और राजनीतिक जीवन का विश्लेषण किया। 1894 में मैक्स वेबर को फ्रेलबर्ग विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर पद पर नियुक्ति प्रदान की गई।
1896 में वह हाईडेलवर्ग विश्वविद्यालय आ गए और इस विश्वविद्यालय में जहां अपने शिक्षा ग्रहण की थी प्रोफेसर के रूप में कार्य किया। 1897 में जब आपकी उम्र केवल 33 वर्ष की थी तब आप गंभीर बीमारी से ग्रसित हो गए। इसलिए कुछ समय तक शैक्षिक कार्य बंद करना पड़ा । चार वर्ष तक आप इस बीमारी से जूझते रहे यह समय आपके लिए तनाव का समय था मैक्स वेबर घंटों खिड़की पर बैठे रहते और आकाश निहारा करते थे। यात्रा या भ्रमण ही केवल एक ऐसी गतिविधि रह गई थी जिसमें उनको रुचि थी। वे अधिकांश समय इटली और रोम में रहे करीब चार वर्ष के बाद धीरे-धीरे स्वस्थ होने लगे तब पढ़ने लिखने का कार्य पुनः आरंभ किया। बीमारी की अवस्था में उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी थी। स्वस्थ होने के बाद 1901 में अपने बौद्धिक दृष्टि से रचनात्मक कार्य प्रारंभ किया स्वस्थ होने के पश्चात उन्हें प्रोफेसर के पद पर पुनः आमंत्रित किया गया लेकिन उन्होंने इसे अस्वीकार कर दिया इसका कारण संभवत यह था कि उन्हें लगा कि वे इतने बड़े दायित्व को इस अवस्था में नहीं संभाल पाएंगे।
1904 मे बेवर को अमेरिका यात्रा का पहला अवसर मिला यहां आपको आपके एक साथी ने हार्वर्ड में सैंट लुइ में आयोजित वैज्ञानिक विश्व कांग्रेस में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया।
यहां आप ने जर्मनी की सामाजिक व्यवस्था पर एक लेख पढ़ा। तीन माह की अमेरिका यात्रा से वेबर अमेरिका की संस्कृति से काफी प्रभावित हुए बीसवीं शताब्दी के अर्थ अभिज्ञान का अनुभव उन्होंने अमेरिका में ही किया और यही से उनका संपर्क अमेरिका जैसे बृहद समाज के उत्कर्ष और उनके शासन के लिए कर्मचारी तंत्र की संरचना के साथ हुआ। यहां वेबर ने प्रोटेस्टेंट इथिक्स तथा पूंजीवाद का अध्ययन, नौकरशाही, अमरीकी राजनीतिक संरचना में राष्ट्रपति की भूमिका पर अध्ययन किया। 1918 में उन्होंने अपने अध्यापन कार्य प्रारंभ किया और विश्वविद्यालय में विजिटिंग प्रोफेसर के रूप में कार्य करने लगे। इसी वर्ष वेबर को वारसाई में जर्मन युद्ध विश्रांति आयोग और बेमर संविधान का मसौदा तैयार करने के लिए सलाहकार बनाया गया। 1919 में दो लूजो ब्रेन्टानो के उत्तराधिकारी के रुप में वेबर को म्यूनिख विश्वविद्यालय में प्रोफेसर नियुक्त किया गया। वेबर ने एक सामाजिक पत्रिका सोशल रिफॉर्म एंड सोशल पॉलिटिक्स का संपादन कार्य भी किया था।
राजनैतिक पृष्ठभूमि
मैक्स वेबर के पिता एक प्रतिष्ठित उदारवादी राजनैतिज्ञ थे। उनके यहां प्रमुख राजनीतिज्ञों का आना जाना लगा रहता था।
इससे मैक्स वेबर को उनकी संपर्क में रहने तथा उनकी भावनाओं और विचारों से अवगत होने का मौका मिलता था। इसके अतिरिक्त वह अपने पिता के साथ भी यहां वहां जाते रहते थे। इसका परिणाम यह हुआ कि बचपन से ही उन्हें बौद्धिकता का विकास हुआ।
जब प्रथम विश्व युद्ध प्रारंभ हुआ था उस समय उसकी उम्र 50 वर्ष की थी वह राष्ट्रवादी थे पर जर्मन नेताओं की नीतियों से संतुष्ट नहीं थे इसलिए उसने युद्ध के संचालन तथा जर्मनी के नेतृत्व की कटु आलोचना की थी इसलिए उन्होने सत्ता में आए हुए नेताओं के विचारों तथा सलाह को कभी नहीं माना था। अपने जीवन के अंतिम वर्षों में वेबर ने राजनीतिक गतिविधियों में बहुत सक्रिय हो गए इन्होने प्रमुख समाचार पत्रों में अनेक लेख लिखे, कई ज्ञापन पत्र तैयार किए तथा उस समय की जर्मनी की राजनीतिक गतिविधियों पर काफी कुछ लिखा। 1918 में मैक्स वेबर उस कमीशन के सदस्य रहे जिसने वरसैलिज शांति सम्मेलन के संबंध में अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। इसी तरह उन्होंने वीमर संविधान बनाने हेतु आरंभिक रूपरेखा तैयार की। उन्होंने तार्किक प्रजातांत्रिक दृष्टिकोण को स्पष्ट करने के लिए अनेक छात्र सभाओं तथा शैक्षिक समूह को समय-समय पर संबोधित किया। वेबर प्रजातंत्र विरोधी, दक्षिणपंथी एवं वामपंथी राजनीतिज्ञों के विरोधी थे इसलिए सरकार में उनको सम्मिलित करने के प्रस्ताव को राजनेताओं का समर्थन नहीं मिला।
मैक्स वेबर ने अपनी राजनैतिक रचनाओं में जो कुछ भी लिखा वह बहुत ही निर्भीकतापूर्वक लिखा। उनके लेख एक राजनैतिक की भूमिका का वास्तविक मूल्यांकन है।
वेबर में एक कर्मठ कार्यकर्ता के समान उत्साह था। वेबर क्रिया में विश्वास करने वाले ऐसे व्यक्ति थे जिसमें नैतिक दृष्टि से काफी कठोरता थी। साथ ही व्यक्तिक तटस्थता थी जो एक सामाजिक वैज्ञानिक में ही देखने को मिलती है वेबर की दृढ़ मान्यता थी कि महान लक्ष्यों की प्राप्ति केवल शक्ति राजनीति के द्वारा ही हो सकती है। आप राजनीतिक जीवन को सही रूप में देखने समझने की अभ्यस्त हो गए थे। वे इसे परस्पर विरोधी विश्वासों तथा हितो वाले व्यक्तियों और समूहों के बीच संघर्ष में देखते थे। इस संघर्ष में अंत में विजय उसे उसी पक्ष की होती है जिसके पास शक्ति का भंडार है और जो उस शक्ति को प्रभावशाली ढंग से काम मे लेने की योग्यता रखता है।
प्रथम विश्वयुद्ध के समय से ही राष्ट्रीय विचारों के अनुरूप वेबर ने अपने आप को सेवा के लिए प्रस्तुत कर दिया था। जर्मन में जिस रूप में युद्ध लड़ा गया था जर्मनी के नेतृत्व की युद्ध की दृष्टि से जो भूमिका थी उसकी वेबर ने कटु आलोचना की थी लेकिन जर्मन नेतृत्व एवं सत्ता ने कभी भी उनकी आलोचना एवं राय की परवाह नहीं की। वेबर ने अपने लेखों के माध्यम से जर्मनी की राजनीतिक संरचना में परिवर्तन, उत्तरदायी संसदीय सरकार के विकास, केसर तथा चांसलर की शक्तियों पर प्रतिबंध लगाए जाने की बात कही जिसके परिणाम स्वरूप सरकार ने उनके विरुद्ध अदालती कार्यवाही करने का विचार किया। वेबर के सबसे प्रसिद्ध व्याख्यान विज्ञान एक पेशे के रूप में तथा राजनीति एक पेशे के रूप में है जो उन्होंने 1919 में विद्यार्थियों के बीच दिए गए थे। मैक्स वेवर के राजनीतिक विचारों और गतिविधियों का एक ओर सत्ता में आए नेताओं द्वारा और दूसरा वामपंथियों द्वारा जबरदस्त विरोध किया गया। पर वेबर के द्वारा राजनीतिक गतिविधियों के क्षेत्रों में बहुत अधिक योगदान दिया।
सामाजिक एवं आर्थिक पृष्ठभूमि
मैक्स वेवर के विचार जर्मन की सामाजिक आर्थिक एवं राजनीतिक परिस्थितियों से प्रभावित थे उन्होंने यह अनुभव किया कि इंग्लैंड और फ्रांस की तुलना में जर्मनी की भूमिका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुत ही कम है इसलिए वेबर सदैव राष्ट्र भावना से प्रेरित रहे इसी भावना से प्रेरित होकर उन्होंने करिश्माई प्रभुसत्ता की धारणा दी। वेबर का राष्ट्रवाद जर्मन भू स्वामियों के अंध राष्ट्रवाद से भिन्न था एवं यह जर्मन उद्योगपतियों के साम्राज्यवादी इरादों से भी मेल नहीं खाता था। जर्मन की तात्कालिक सामाजिक एवं राजनैतिक परिस्थितियों के कारण वेबर के विचारों में विरोधाभास था। विज्ञान के संबंध में बहस और सामाजिक दर्शन की अवस्था के कारण वेबर के विचारों में अस्पष्टता आ गई थी। तात्कालिक जर्मनी में दो शक्तियां एक दूसरे से संघर्ष कर रही
थी एक और बड़े भूस्वामी थे हो रहे थे जो कमजोर हो रहे थे परंतु आक्रामक थे इसलिए वह अपने हितों की रक्षा करना चाहते थे और दूसरी ओर जर्मन पूंजीपति वर्ग जो निरंतर मजबूत और मजबूत हो रहा था वह राजनीतिक स्वतंत्रता चाह रहा था दोनों वर्गों में निरंतर संघर्ष जारी था और इसका प्रभाव जर्मन के समाज विज्ञान पर पड़ा।
इंग्लैंड और फ्रांस के बाद जर्मन में पूंजीवाद का आरंभ हुआ। इस समय पूंजीपति वर्ग अपनी पहचान बनाने के लिए प्रयास कर रहा था उसी समय मजदूर वर्ग का भी उदय हो गया। जो इसलिए जर्मन उद्योगपतियों को दो मोर्चों पर संघर्ष करना पड़ रहा था। उस समय राजनैतिक अनिर्णय की स्थिति थी और मैक्स वेबर भी इस के परिणामों से अछूते नहीं थे। एल. ए. कोजर ने वेबर के समय की जर्मन अर्थव्यवस्था को उच्च विकसित औद्योगिक अर्थव्यवस्था कहा है।
जर्मनी की परिस्थिति के अनुरूप जर्मनी को अंतर्राष्ट्रीय क्षेत्र में एक अग्रणी राष्ट्र के रूप में देखना चाहते थे उद्विकासवादी विचारक टानीज के विचारों का समर्थन तो करते थे परंतु यह कभी स्वीकार नहीं करना चाहते थे कि पुराना समाज या गामिनसॉफ्ट अच्छा है और नया औद्योगिक समाज बुरा। वेबर को अमेरिका की समृद्धि अमेरिका की चुस्ती ने बहुत प्रभावित किया था। वह चाहते थे कि जर्मनी भी अमेरिका के सामान हो जाए और एक समृद्ध मजबूत और आधुनिक राष्ट्र बन जाए। वेबर ने संयुक्त राष्ट्र अमेरिका राष्ट्रपति पद और उसके अधिकारों की संस्थापक व्यवस्था को खूब पसंद किया। उन्होंने जर्मन लोकतांत्रिक दल के गठन में सक्रिय सहयोग किया इसका मुख्य कारण यह था कि वह विश्व में जर्मन को एक विकसित राष्ट्र के रूप में देखना चाहते थे।
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