स्पेंसर की सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक पृष्ठभूमि (2) - Spencer's social, economic and political background
स्पेंसर की सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक पृष्ठभूमि (2) - Spencer's social, economic and political background
स्पेंसर इंग्लैंड में मध्य विक्टोरिया काल के प्रतिनिधि माने जाते हैं। लेविस कोजर के अनुसार, हम मध्य विक्टोरिया काल का आरंभ 1851 से मान सकते हैं। जब महारानी विक्टोरिया ने क्रिस्टल महल का उद्घाटन किया था, यह संयोग की बात है कि उसी वर्ष स्पेंसर की पहली पुस्तक का प्रकाशन हुआ। यह समय इंग्लैंड के लिए समृद्धि और संतोष का काल था। औद्योगिकरण एवं औद्योगिक विकास में इंग्लैंड ने अन्य देशों को पीछे छोड़ दिया था। कहा जाता है कि 1848 में एक ऐसा देश था जो कि विश्व के लगभग स्पेंसर की सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक पृष्ठभूमि (2) - Spencer's social, economic and political backgroundआधा लोहे का उत्पादन कर रहा था और विश्व व्यापार में इंग्लैंड की भागीदारी फ्रांस और जर्मनी से दुगनी से भी अधिक थी। इस कारण इंग्लैंड के मध्यम वर्ग के लोगों की स्थिति काफी अच्छी थी। इस काल में बड़े किसान कुशल मजदूर शिल्पकार काफी खुशहाल हो गए थे।
लेकिन निचला तबका इस समय भी अभाव ग्रस्त था। इस सामाजिक परिस्थिति जिसमें इंग्लैंड के लोगों को निजी व्यापार व्यवसाय अनुशासन और कुशलता पर अधिक विश्वास था और उस समय लोगों का मानना था कि वही सरकार सबसे अच्छी होती है जो सबसे कम शासन करें इन परीस्थितियों का प्रभाव स्पेंसर के विचारों पर पड़ा और उन्होंने इसे अपनी रचनाओं में व्यक्त किया। स्पेंसर के अनुसार राज्य को उद्योगों का विकास करने के लिए सभी चीजें निजी उद्यमियों के हवाले कर देना चाहिए क्योंकि इससे स्वस्थ प्रतियोगिता को बढ़ावा मिलेगा और योग्य व्यक्ति आगे आएंगे और एक समृद्ध समाज का निर्माण होगा। हालांकि ब्रिटिश की यह समृद्धि बहुत दिनों तक नहीं टिक सकी थी और ब्रिटिश शासन का स्वर्ण युग 1877 आते-आते समाप्त हो गया था। अमेरिका विकास की दौड़ में आगे आ गया था, इसके अतिरिक्त जर्मनी भी इंग्लैंड का प्रतिद्वंदी बनता जा रहा था।
इंग्लैंड में 1890 की मंदी ने मजदूर संघों की सक्रियता को बढ़ा दिया था। लोकप्रिय जनतंत्र की गतिविधियों में मजदूर अधिक से अधिक सम्मिलित होने लगे थे। उस समय जो परिस्थितियां उत्पन्न हुई स्पेंसर उन सबके विरोधी थे।
विश्व में अपना साम्राज्य फैलाने के लिए दौड़ जारी थी। उसने भारत पर अपना कब्जा जमाया दक्षिण अफ्रीका पर भी करना चाह रहा था पर फ्रांस और अन्य यूरोपीय देश उसे ऐसा करने से रोक रहे थे। उसका दक्षिण अफ्रीका से मिस्र तक अपना झंडा फहराने का सपना पूरा नहीं हुआ था। 1899 में इंग्लैंड बोअर युद्ध में फँस गया था। इसके बावजूद भी उसने उत्तरी वर्मा एवं उत्तरी बोन एरिया अपने नियंत्रण में ले लिया था। इंग्लैंड ने पूरे विश्व में फैले साम्राज्य के माध्यम से जिन देशों को अपने नियंत्रण में किया था वहां पर उनको कल्याणकारी राज्य बनाने के लिए बाध्य किया था
लेकिन उन देशों में कल्याण कम हुआ था पर ब्रिटिश सरकार के हाथ लंबे होते, स्पेंसर जो की स्वयं एक स्वतंत्र प्रतियोगिताओं के समर्थक थे घटनाओं की गवाह थे। इंग्लैंड में इतनी समृद्धि के बाद भी धार्मिक उदारता नहीं थी इंग्लैंड में ऐसे लोग थे जो की लीक पर नहीं चलते थे। उन्हें नान कानफरमर्स्टि कहा जाता था। चर्च ऑफ इंग्लैंड ऐसे लोगों के प्रति भेदभाव करते थे। ए धर्मनिरपेक्षता के समर्थक अनुशासित और परिश्रमी थे स्पेंसर भी उनमें से एक थे।
स्पेंसर ने उस समय मध्यम वर्ग के लिए लिखा उद्विकास की धारणा और सिद्धांत से उन्होंने इस बात की व्याख्या की कि क्यों कुछ समाज पिछड़ गए और विश्व में विभिन्न समाजों में असमानता है। उद्विकासवादी धारणा एवं योग्यतम की जीविता की चर्चा से उन्होंने मध्यम वर्ग की कल्पना, विलासिता को भी विराम दिया। जो कभी समृद्धि में दरिद्रता के अंधकार से विचलित हो जाता है। हालांकि स्पेंसर ने उस समय जो विचार व्यक्त किए थे उनके जीवन के अंतिम दिनों में वे स्वयं उसके संबंध में प्रश्नों का उत्तर देने में समर्थ नहीं थे।
वार्तालाप में शामिल हों