दुर्खीम के अनुसार पागलपन के अनेक रूप हैं - According to Durkheim there are many forms of madness
दुर्खीम के अनुसार पागलपन के अनेक रूप हैं - According to Durkheim there are many forms of madness
1. आत्महत्या एक उन्माद (Suicide as Insanity) - आत्महत्या पागलपन या उन्माद का एक विशेष रूप है। आत्महत्या भी एक ऐसा विशिष्ट अनुमान है जिसमें व्यक्ति अपने आपको समाप्त करने की सोचता है। जबकि अन्य क्रियाओं में आत्महत्या करने वाला व्यक्ति सामान्य दिखाई देता है। यह अत्यंत प्रबल तीव्र और गंभीर संवेग है। इसमें व्यक्ति किसी भी क्षण इसके अधीन होकर आत्महत्या कर लेता है।
2. उन्माद के परिणाम के रूप में आत्महत्या (Suicide as a result of Insanity) - इस विचारधारा के अनुसार आत्महत्या उन्माद का परिणाम है। इसके अनुसार आत्महत्या करने वाले व्यक्ति प्रायः पागल होते हैं। आत्महत्या मानसिक अलगाव के कारण की जाती है। स्वस्थ मस्तिष्क वाला व्यक्ति कभी आत्महत्या नहीं करता।
उन्मत्त आत्मह (Maniac Suicide) इस प्रकार की आत्महत्या मति या दीवानगी के होती है जैसे इसमें व्यक्ति काल्पनिक भय संकट और कभी-कभी अपमान से बचने के लिए आत्महत्या कर लेता है। कई बार ऐसे उदाहरण भी देखने को मिले हैं जिसमें उन्माद की स्थिति में व्यक्ति में तीव्र गति से एक के बाद एक विचार आते रहते हैं और व्यक्ति यह महसूस करने लगता है कि कोई दैवी शक्ति उसे आत्महत्या के लिए प्रेरित कर रही है और व्यक्ति के द्वारा आत्महत्या कर ली जाती है।
4. विषादपूर्ण आत्महत्या (Melancholy Suicide) इस प्रकार की आत्महत्या का कारण दुख निराशा, शोक या खिन्नता होता है। इसमें कई बार व्यक्ति को मानसिक आघात लगता है और वह अपना मानसिक संतुलन खो बैठता है, वह तनाव में आ जाता है और उसे ऐसा लगता है कि आत्महत्या ही उसके सुरक्षा का एक मात्र उपाय है।
5. सम्मोहित आत्महत्या (Obsessive Suicide) - प्रकार की आत्महत्या में व्यक्ति के मन मस्तिष्क पर हमेशा मृत्यु का विचार छाया रहता है और वह इससे सम्मोहित रहता है। जब उसकी यह विचारधारा उसके मन की केंद्रीय आकांक्षा बन जाती है तो वह आत्महत्या कर लेता है।
6. आवेगात्मक आत्महत्या (Impulsive or Automatic Suicide) यह ऐसी अवस्था है जिसमें व्यक्ति के मन में अचानक मृत्यु की इच्छा उत्पन्न हो जाती है। व्यक्ति अपनी इच्छा पूर्ति के लिए आत्महत्या कर बैठता है। सब कुछ क्षणिक होता है, इस प्रकार की आत्महत्या में व्यक्ति के मन में इच्छा जागृत हो जाना और आत्महत्या कर लेना आवेगा आवेगात्मक आत्महत्या कहलाती है।
7. स्नायु दोष और आत्महत्या (Neurastheuia and Suicide) मानसिक विकृतियों की अवस्थाओं को स्नायु दोष कहा जाता है और यह अवस्था आत्महत्या में विशेष सहायक होती है। जब स्नायु तंत्र पर गहरी चोट लगती है या व्यक्ति को कोई कठोर मानसिक पीड़ा जिससे वह बहुत अधिक कष्ट महसूस करता है तो वह स्नायु दोष के कारण छोटी-छोटी घटनाओं से उत्तेजित हो जाता है अथवा आनंदित हो जाता है। ऐसा व्यक्ति आत्महत्या कर सकता है। हालांकि दुर्खीम ने यह सिद्ध करने का प्रयास किया है कि पागलपन या स्नायु दोष आत्महत्या के मौलिक कारण नहीं हैं बल्कि इन रोगों से प्रभावित व्यक्ति तभी आत्महत्या करता है जब उसके साथ कुछ सामाजिक दशा अभिक्रियाशील हो ।
8. मद्यपान और आत्महत्या (Alcoholism and Suicide) मादक पदार्थों के प्रयोग को भी आत्महत्या का कारण माना जाता है। कई बार विपरीत परिस्थितियां उत्पन्न होने पर मादक पदार्थ का प्रयोग करने वाले व्यक्ति का मानसिक संतुलन ठीक नहीं रहता है और वह आत्महत्या कर लेता है। अध्ययनों में पाया गया है कि फ्रांस में जिन प्रदेशों में शराब का अधिक सेवन किया जाता है वहां पर अन्य प्रदेशों की तुलना में आत्महत्या अधिक होती है। दुर्खीम ने फ्रांस में आत्महत्याओं की संख्या तथा मद्यपान के अपराधियों की संख्या के आधार पर तुलनात्मक अध्ययन किया और यह स्पष्ट करने का भी प्रयास किया कि इन दोनों के बीच में संबंध नहीं होता। क्योंकि ऐसे अनेक क्षेत्र हैं जिसमें शराब का उपयोग कम किया जाता है पर वहां पर आत्महत्याओं की संख्या अधिक पाई जाती है।
9. मनोजैविकीय कारक और आत्महत्या (Psycho & Biological Factors and Suicide) - आत्महत्या के असामाजिक कारकों में मानसिक व्याधियों के अतिरिक्त कुछ सामान्य मानसिक अवस्था भी होती है। मनुष्य की शारीरिक एवं मानसिक रचनाओं में कुछ ऐसे गुण पाए जाते हैं जो आत्महत्या को प्रोत्साहन देते हैं। यह अवस्थाएं विशुद्ध मनोवैज्ञानिक हो सकती हैं और पैतृकता से प्राप्त गुण भी हो सकते हैं। जो व्यक्ति को आत्महत्या के लिए प्रेरित करते हैं। कुछ अनुसंधानकर्ता प्रजातीय विशेषताओं को भी आत्महत्या में सम्मिलित करते हैं और द्वारा उन्होंने अनेक उदाहरणों के द्वारा यह स्पष्ट करने का प्रयास किया कि विशिष्ट प्रजातियों में आत्महत्या के प्रति एक निश्चित झुकाव पाया जाता है।
10. प्रजाति और आत्महत्या (Race and Suicide) अनेक विद्वान प्रजाति लक्षणों से आत्महत्या का कारणात्मक संबंध स्थापित करने का प्रयास करते हैं। परंतु दुर्खीम प्रजाति और आत्महत्या के संबंध को अस्वीकार करते हैं। दुर्खीम इस सिद्धांत के विरुद्ध तर्क प्रस्तुत करते हैं कि आत्महत्या की जटिल और विशेष प्रकृति को प्रजाति के सामान्य लक्षण के द्वारा स्पष्ट नहीं किया जा सकता। अनेक उदाहरणों से यह स्पष्ट था कि कैल्ट प्रजाति के लोग पहले अधिक आत्महत्या करते थे किंतु वर्तमान समय में यह प्रवृत्ति कम हो गई है। अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि विभिन्न प्रांतों में कैल्ट प्रजाति के लोगों में आत्महत्या की दर भी भिन्न-भिन्न है। इसलिए दुर्खीम प्रजाति के स्थान पर भौगोलिक पर्यावरण में अंतर को आत्महत्या का कारण मानते हैं।
11. पैतृकता और आत्महत्या (Heredity and Suicide) पैतृकता और आत्महत्या से मतलब है कि जो माता-पिता आत्महत्या करते हैं उनके बच्चों में भी आत्महत्या के गुण आ जाते हैं। आत्महत्या की प्रवृत्ति के लक्षण संतानों को वंशानुक्रम के आधार पर प्राप्त होते हैं जो सामान्य परिस्थितियों में भी उन्हें आत्महत्या के लिए प्रेरित करते हैं। अनेक अध्ययन इस बात की पुष्टि करते हैं। परंतु दुर्खीम का कहना है कि आत्महत्या का गुण पैतृकता से प्राप्त नहीं होता बल्कि मानसिक या स्नायु दुर्बलता का हस्तांतरण होता है जो व्यक्ति को आत्महत्या के लिए प्रेरित करता है। दुखम कहते हैं कि आत्महत्या एक संक्रामक घटना है। उन्होंने अपनी पुस्तक में ऐसे अनेक उदाहरण से स्पष्ट किया है। जिसमें आत्महत्या एक संक्रामक रोग की तरह नजर आती है। उन्होंने लिखा है कि एक अस्पताल में 15 रोगियों ने एक अंधेरे कमरे में एक के बाद एक फांसी लगा ली लेकिन जब वहां से वह फंदा हटा दिया गया तो वहां आत्महत्या का क्रम भी बंद हो गया।
12. भौगोलिक दशा एवं आत्महत्या (Geographical Conditions and Suicide) - अनेक समाजशास्त्री और भूगोलशास्त्री भौगोलिक दशाओं को आत्महत्या का कारण मानते हैं। जैसे मौरसेली ने भौगोलिक कारकों में जलवायु तथा तापमान से आत्महत्या का संबंध जोड़ा है। दुर्खीम इस विचार से सहमत नहीं है फिर भी यह देखा गया है कि भौगोलिक दशा एवं आत्महत्या के के बीच संबंध पाया जाता है। भौगोलिक दशाओं में दो कारक आत्महत्या को प्रभावित करते हैं जो इस प्रकार हैं।
A. जलवायु एवं आत्महत्या (Climate and Suicide) अध्ययनों से ज्ञात हुआ है कि जलवायु भी आत्महत्या को प्रभावित करती है। हालांकि दुर्खीम इस बात से सहमत नहीं है। जहां तक भारत की बात है भारत में जहां गर्मी अधिक पड़ती है वहां आत्महत्या की दर ऊंची होती है। मौरसेली ने भी लिखा है कि समशीतोष्ण जलवायु में आत्महत्या की दर अधिक होती है। जलवायु में होने वाले परिवर्तनों से सामाजिक एवं सांस्कृतिक दशा में परिवर्तन होता है और यह परिवर्तन कहीं न कहीं आत्महत्या को प्रभावित करता है। इसलिए दुर्खीम के अनुसार आत्महत्या के की दर का कम या अधिक होना वास्तव में सामाजिक कारको का ही परिणाम है।
B. मौसमी तापमान और आत्महत्या (Seasonal Temperature and Suicide) - अनेक अध्ययनों में पाया गया है कि मौसम भी आत्महत्या का एक कारण हो सकता है। ऐसा मौसम जिसमें आकाश अंधकारपूर्ण हो, तापमान बहुत कम हो और नमी अधिक हो ऐसे निराश वातावरण में मनुष्य की प्रकृति दुखी एवं निराश दिखाई देती है। निराशा से भरा वातावरण व्यक्ति के मन में विषाद उत्पन्न करता है और वह जीवन के प्रति उदासीन होता है तथा कई बार ऐसे समय में व्यक्ति आत्महत्या भी कर लेता है। मोंटेस्क्यू ने भी आत्महत्या का ऋतु के साथ संबंध जोड़ा है। फेरी तथा मौरसेली ने भी तापमान और आत्महत्या के बीच में संबंध बताया है। हालांकि दुर्खीम तापमान और मौसम को आत्महत्या के लिए प्रत्यक्ष रूप से उत्तरदाई नहीं मानते पर उनका कहना है कि मौसम सामाजिक क्रिया को प्रभावित करती है और सामाजिक क्रिया में होने वाला परिवर्तन आत्महत्या की दर में अंतर के लिए उत्तरदाई हो सकता है। यही कारण है कि विभिन्न मौसमों में आत्महत्या की दरों में भी विभिन्नता पाई जाती है।
13. व्यवसाय और आत्महत्या (Occupational Aspects and Suicide) व्यापार में होने वाले लाभ और हानि आत्महत्या की दर को प्रभावित करते हैं। कुछ व्यवसाय व्यक्तियों की आत्महत्या के कारण बनते हैं। ऐसा व्यवसाय जिनमें गतिशीलता अधिक होती है, उन व्यवसाययों को करने वाले व्यक्तियों में आत्महत्या की दर अधिक पाई जाती है। कारण है कि कृषक वर्ग की अपेक्षा वैज्ञानिक वर्ग और साहित्यिक वर्ग में आत्महत्या की दरें अधिक होती है। पर वर्तमान समय में कृषि भी एक व्यवसाय हो जाने के कारण कृषकों में आत्महत्या की दर निरंतर बढ़ती जा रही है।
14. धर्म और आत्महत्या (Religion and Suicide) धर्म के पीछे अप्रत्यक्ष रूप से सामाजिक शक्ति होती है। इसलिए सामान्यतः लोग धर्म की बातों को मानते हैं। हम कैथोलिक और प्रोटेस्टेंट धर्म के बारे में देखें कैथोलिक और यहूदियों में आत्महत्या करना तो दूर विचार करने मात्र से ही लोग डरते हैं। जबकि प्रोटेस्टेंट धर्म एक व्यक्तिवादी धर्म रहा है। वह एक तरफ व्यक्ति के जीवन में सफलता और गर्व की भावना भरता है तो दूसरी तरफ असफलता पश्चाताप, लज्जा आदि के कारण उसके जीवन में विघटन भी लाता है। प्रोटेस्टेंट धर्म आत्महत्या की निंदा नहीं करता जिस तरह से कैथोलिक धर्म या यहूदी धर्म करते हैं। यही कारण है कि कैथोलिक धर्म की तुलना में प्रोटेस्टेंट धर्म के लोगों के द्वारा आत्महत्या अधिक की जाती है।
15. नगर और आत्महत्या (Urbanism and Suicide) गांव की अपेक्षा शहरों में आत्महत्या अधिक होती है और इसका प्रमुख कारण प्राथमिक समूहों का अभाव है। नगरों में परिवार और पड़ोस के साथ अधिक घनिष्ठ संबंध नहीं होते हैं। जितने की गांव में होते हैं। शहरों का जीवन अस्थिर होता है। वहां के • लोगों के विचारों में एकता का अभाव होता है। व्यक्तिगत स्वार्थों की प्रधानता होती है। यही कारण है कि शहर के व्यक्ति अपने जीवन के प्रति उदासीन होते हैं और शहरों में आत्महत्या की दर अधिक पाई जाती है।
इलियट और मैरिल ने आत्महत्या के तीन प्रमुख कारण बताए हैं
1. पद की हानि (Loss of Status) व्यक्ति के लिए समाज में प्रतिष्ठा बहुत महत्वपूर्ण स्थान रखती है। जब किसी व्यक्ति को पद से हटा दिया जाता है तब उसके लिए पद की हानि बहुत ही असहनीय हो जाती है और उस समय व्यक्ति इस यंत्रणा से बचने के लिए आत्महत्या कर लेता है।
2. आराम की हानि (Loss of Comfort) जब व्यक्ति बहुत अच्छे स्थिति में रहता है, उसकी स्थिति में अचानक परिवर्तन आ जाए तो उसे यह लगने लगता है कि समाज में परिवर्तित स्थिति के कारण व उन सुखों को पाने में असमर्थ है जो वह पहले से प्राप्त कर रहा था, उसे लगने लगता है कि उसका जीवन नर्क बन गया है, अब कुछ नहीं शेष है इस तरह व्यक्ति आराम की हानि के बारे में सोच कर भी आत्महत्या कर लेता है।
3. सुरक्षा की हानि (Loss of Security) जब व्यक्ति के मन में असुरक्षा की भावनाएं भर जाती है। जीवन में बेकारी, दरिद्रता, गरीबी आदि से परेशान हो जाता है और उसे लगता है कि उसके पास जीवन में किसी भी प्रकार की सुरक्षा नहीं है तो इस असुरक्षा की भावना से ग्रसित होकर व्यक्ति आत्महत्या कर लेता है। आत: हम यह कह सकते हैं कि असुरक्षा की भावना व्यक्ति को आत्महत्या के लिए प्रेरित करती है।
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