शक्ति के आधार - Bases of Power

 शक्ति के आधार - Bases of Power


प्रत्येक शक्तिशाली समूह या व्यक्ति को शक्ति किसी न किसी रूप से प्राप्त होती है विश्व प्रसिद्ध शक्तिशाली व्यक्ति चाहे वह नेपोलियन, हिटलर, अब्राहम लिंकन हो या गांधीजी। इन के शक्तिशाली होने के अलग-अलग स्रोत एवं आधार थे। शक्ति के कई आधार या स्रोत हो सकते हैं। 1. संगठन संगठन में ही शक्ति होती है और संगठन शक्ति का एक प्रमुख स्रोत है। वह सभी संस्थाएं शक्तिशाली होती है। जिनका संगठन सुदृढ़ होता है। समाज में ऐसे अनेक उदाहरण है जैसे मजदूर संघ, व्यापारिक संघ आदि संगठन के कारण ही शक्तिशाली होते हैं।


2. ज्ञान- ज्ञान शक्ति का महत्वपूर्ण स्रोत है। इससे व्यक्ति की प्रतिभा का विकास होता है। ज्ञानवान व्यक्ति अपने जीवन के विभिन्न लक्ष्यों को नियोजित ढंग से प्राप्त करने का प्रयास करता है और जिस व्यक्ति के पास ज्ञान होता है उसकी नेतृत्व की शक्ति, संकल्प शक्ति, सहन शक्ति तथा विचारों को अभिव्यक्त करने की शक्ति अपने आप बढ़ जाती है इसलिए ज्ञान शक्ति का एक महत्वपूर्ण साधन या आधार है।


3. आकार किसी भी संगठन का आकार शक्ति का परिचायक होता है। ऐसा माना जाता है कि जो संगठन जितना बड़े आकार का होगा उतना ही अधिक शक्तिशाली होगा यदि किसी संगठन के आकार में कमी होती है तो उसकी शक्ति में भी कमी देखी जा सकती है।


 4. आत्मविश्वास आत्मविश्वास भी शक्ति का एक महत्वपूर्ण स्रोत होता है। जिस व्यक्ति में आत्मविश्वास नहीं होता वह शक्तिशाली नहीं हो सकता। यहां तक कि कहा जाता है कि तलवार की शक्ति भी आत्म विश्वास पर ही निर्भर करती है।


5. विचार व कार्य व्यक्तियों संस्थाओं के विचार वह काफी थी। शक्ति के स्रोत होते हैं जैसे महात्मा गांधी, अब्राहम लिंकन, अब्दुल कलाम आदि के विचार और कार्यो ने उन्हें विश्व भर में शक्तिशाली बना दिया। व्यक्ति व संस्थाओं के विचार व उनके द्वारा किए जाने वाले कार्य भी शक्ति के स्रोत होते हैं।


उदाहरण के तौर पर स्वराज हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है लोकमान्य तिलक के इस विचार ने उन्हें अपने समय में सबसे अधिक शक्तिशाली बना दिया था वर्तमान समय में अनेक संस्थाएं जैसे रेड क्रॉस लायंस क्लब आदि अपने कार्यक्रमों के आधार पर ही शक्तिशाली संस्थाएं कही जाती हैं.


6. सत्ता शक्ति का एक महत्वपूर्ण स्रोत है सत्ता और यदि सत्ता वैधानिक को तो उसका महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। हम ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायती राज व्यवस्था के अंतर्गत चुने गए पंचों और सरपंचों को प्राप्त सत्ता को इसके एक प्रमुख उदाहरण के रूप में देख सकते हैं।


7. उपलब्धियां- व्यक्तियों को प्राप्त उपलब्धियां शक्ति के बाहरी स्रोत होते हैं। ये उपलब्धियां कई प्रकार की हो सकती हैं। जैसे की आर्थिक उपलब्धि स्वामित्व की प्राप्ति, सामाजिक लोकप्रियता, सामाजिक स्तर में वृद्धि और प्रसिद्धि यह सब इसके अंतर्गत आती हैं। व्यक्ति को इन सब के कारण ही शक्ति की प्राप्ति होती है।


8. परिस्थितियां- परिस्थितियां भी शक्ति का स्रोत कही जा सकती हैं स्वतंत्रा आंदोलन की परिस्थिति ने महात्मा गांधी को अधिक शक्तिशाली व्यक्ति बनाया था अर्थात परिस्थितियां शक्ति का आधार हो सकती हैं।


9. नेतृत्व नेता और नेतृत्व भी शक्ति के स्रोत माने जाते हैं साधारण व्यक्तियों की तुलना में नेताओं और नेतृत्व गुण प्रधान व्यक्ति के पास शक्ति अधिक मात्रा में होती है। नेतृत्व की क्षमता ही व्यक्ति को लोकप्रिय नेता बनाती है किसी भी क्षेत्र में अच्छा नेतृत्व अच्छी शक्ति को जन्म देती है एक लोकप्रिय


10. प्रेम एवं प्रभाव


नेता शक्तिशाली बनने की क्षमता और साहस रखता है। शक्ति की अभिव्यक्ति केवल ताकत या प्रत्यक्ष दबाव के माध्यम से ही नहीं होती बल्कि प्रेम व प्रभाव के प्रदर्शन से भी इस की अभिव्यक्ति हो सकती है। उपरोक्त आधारों के अलावा भी कई ऐसे आधार होते हैं

जिन के आधार पर हम शक्ति को मान्यता प्रदान कर सकते हैं


1. कानून व संविधान द्वारा मान्यता होने पर


2. सामाजिक आदर्श परंपरा और मूल्य के अनुसार होने पर


3. समाज के लिए कल्याणकारी होने पर


4. अलौकिकता से प्रभावित होने पर 


5. पुलिस एवं कानून के डर से


6. अपने स्वार्थ सिद्धि के आधार पर


इस तरह हम देखते हैं कि समाज में पिता की शक्ति को परंपरा व सामाजिक आदर्श के आधार पर मान्यता मिली हुई है जबकि हम नेता को समाज कल्याण या स्वार्थ सिद्धि के आधार पर मान्यता प्रदान करते हैं जबकि बहुत सारे संत और महात्मा को उनमें निहित अलौकिकता के आधार पर उनके व्यवहार से प्रभावित होकर मान्यता प्रदान करते हैं जबकि समाज में कई बार हम भी देखते हैं कि गुंडे और बदमाश आदि उनकी शक्ति के कारण उन्हें मान्यता मिल जाती है।