मैक्स वेबर के विचारों का आधार - Basis of Weber's Ideas

 मैक्स वेबर के विचारों का आधार - Basis of Weber's Ideas

मैक्स वेबर ने अपने इस सिद्धांत को प्रस्तुत करने से पहले विश्व के अनेक महान धर्मों का अध्ययन किया और इसी आधार पर उन्होंने धर्म संबंधी विचारों को विभिन्न समाज की पृष्ठभूमि में प्रस्तुत किया और इसी आधार पर उन्होंने धर्म की विवेचना की। मैक्स वेबर ने धर्म संबंधी अपने अन्वेषण के आधार पर यह बताया कि किस प्रकार कुछ धार्मिक सिद्धांतों के प्रभाव से आर्थिक जीवन की तर्क परखता बढ़ी और कुछ के प्रभाव से घटी। वेबर ने धर्म की समाजशास्त्रीय विवेचना में निम्न तीन प्रमुख समस्याओं को लेकर अध्ययन प्रारंभ किया.


A. एक औसत अनुयाई की धर्मनिरपेक्ष नीति और आर्थिक व्यवहार पर प्रमुख धार्मिक विचारों का प्रभाव।


B. समूह की रचना पर धार्मिक विचारों का प्रभाव


C. विभिन्न सभ्यताओं में धार्मिक सभ्यता के कारणों और प्रभाव की तुलना के बाद पश्चिमी सभ्यता के तत्वों का निर्णय करना।


इन समस्याओं के अर्थ को समझने के लिए मैक्स वेबर में पश्चिमी पूंजीवाद का अध्ययन किया। मैक्स वेबर के विचारों को समझने से पहले यह आवश्यक है कि हम यह समझे कि मैक्स वेबर का ही धर्म के विचारों का आधार क्या था। मैक्स वेबर ने जब अपनी धार्मिक विचारों को प्रस्तुत किया था उस समय जर्मनी में पूंजीवाद अपनी अनियंत्रित दशा में था तथा सट्टा बाजारों का व्यापार पूर्णता स्वतंत्र था और सट्टा बाजारों को उस समय पूंजीपतियों और व्यापारियों का समर्थन भी प्राप्त था।19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में जर्मनी में तीव्र औद्योगिक विकास औद्योगीकरण का विकास हो जाने के कारण जागीरों तथा मालिकों के बीच प्रतियोगिता प्रारंभ हो गई थी। इसमें एक नए औद्योगिक पूंजीवाद की नींव रखी इस समय पूंजीपति व्यापारियों के पक्ष में थे। 1892 में वेबर सट्टा बाजार का अध्ययन करके यह ज्ञात किया कि एक विशेष अर्थव्यवस्था समाज की आर्थिक दशाओं और व्यक्तिगत स्वार्थों से निश्चित नहीं होती इसमें एक अचेतन उद्देश्य भी रहता है। मैक्स वेबर का मानना है कि उन्होंने यह अनुभव किया कि समाज में होने वाले परिवर्तनों का एक नैतिक पक्ष भी है और उसकी झलक तत्कालीन सत्ताधारियों की नीतियों में देखने को मिल रही थी।


मैक्स वेबर ने उस समय अपने अध्ययनों में अनुभव किया कि जर्मनी की बदलती हुई परिस्थितियों में जमीदारों और पूंजीपतियों के सामने अपने आर्थिक उद्देश्यों को पूरा करने के लिए अनेक दूसरे साधन है लेकिन उस समय उन्होंने औद्योगिक पूंजीपति बनने के बदले अपनी परंपरागत स्थिति को बनाए रखना ही श्रेष्ठकर समझा अर्थात उनके विचार केवल आर्थिक उद्देश्यों एवं आर्थिक हितों से ही उत्पन्न नहीं हुए। उस समय के पूंजीपतियों की भावना को स्पष्ट करते हुए मैक्स वेबर ने अपने एक भाषण में कहा था कि हमें जो कुछ मूल्यवान मालूम होता है। हम उसका विकास और समर्थन करना चाहते हैं तथा नैतिक मान्यताओं को ग्रहण करने की प्रवृत्ति हमारा एक भावनात्मक गुण है जिसे हम सदैव बनाए रखना चाहते हैं। मैक्स वेबर ने मार्क्स की विचारधारा का भी खंडन किया था कि “मनुष्य के विचार और क्रियाएं केवल उसके आर्थिक हितो से ही उत्पन्न होते है।"

मैक्स वेबर ने अपनी पुस्तक प्रोटेस्टेण्ट इथिक एंड द स्पिरिट ऑफ द कैपिटिलिज्म' (Protestant ethics And The Spirit of capitalism)- इसमें एक लेख लिखा कि मेरा उद्देश्य संस्कृति और इतिहास की घटनाओं के कारणों की खोज में एक पक्षीय भौतिकवादी विचारों के स्थान पर एक पक्षीय आध्यात्मिक विचारों का साथ देना ही नहीं है। दोनों में से कोई भी संभव नहीं है लेकिन इनमें से किसी को भी यदि अन्वेषण के आधार की बजाए उसके निष्कर्ष के रूप में स्वीकार किया जाए तो ऐतिहासिक तथ्यों की जानकारी के लिए यह दोनों ही समान मात्रा में अनुपयुक्त है।” मैक्स वेबर के उपरोक्त विचारों को पढ़ने से ज्ञात होता है कि उन्होंने अन्वेषण के भौतिकवादी और आध्यात्मिक दोनों ही तरीकों पर बल दिया है। मैक्स वेबर हमेशा अपने अध्ययन में एक उचित वैज्ञानिक मान बनाए रखने के लिए सदैव सचेत रहे। इसलिए उन्होंने समस्त एक कारक वाले सिद्धांतों को बड़ी ही सावधानी से अपने अध्ययन से दूर रखा। मैक्स वेबर ने अपनी गहरी पद्धतिशास्त्रीय अंतर्दृष्टि के द्वारा प्रोटेस्टेण्ट धर्म के उन आचारों को ढूंढा। जिन्होंने आधुनिक पूंजीवाद की आत्मा को विकसित किया। उन्होंने पूंजीवाद को एक परिवर्तनीय तत्व माना और यह दर्शाया कि धर्म किस प्रकार मानव के सामाजिक और आर्थिक जीवन को प्रभावित करता है।