सामाजिक क्रिया की विशेषताएं - Characteristics of Social Action

  सामाजिक क्रिया की विशेषताएं - Characteristics of Social Action


मैक्स वेबर ने कहा कि सामाजिक क्रिया का संबंध केवल वर्तमान परिस्थितियों से ही नहीं होता है बल्कि यह भूतकाल और भविष्य की परिस्थितियों से भी प्रभावित होता है। यदि हम पिछले किसी कार्य के प्रत्युत्तर में कोई क्रिया करते हैं, तो वह भूतकालीन क्रिया होती है पर यदि वर्तमान समय में कोई क्रिया कर रहे हैं तो वह वर्तमान क्रिया और यदि हम भविष्य को ध्यान में रखकर कोई कार्य करते हैं तो वह भविष्य के लिए होगी। उदाहरण के लिए यदि कोई व्यक्ति अपने पूर्व से कुछ कड़वे अनुभवों के आधार पर क्रिया करता है तो उसके संघर्ष करने की क्रिया का संबंध उस व्यक्ति की भूतकाल की क्रिया से होगा। इसी तरह यदि कोई व्यक्ति वर्तमान समय में खेल के मैदान में अपने कोच के निर्देशों का पालन करते खेल रहा है, तो वह वर्तमान सामाजिक क्रिया है। इसी तरह से कोई व्यक्ति भविष्य में होने वाली किसी भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी अभी से करने लगेगा तो उसकी यह क्रिया भविष्य क्रिया होगी।


मैक्स वेबर का कहना है कि प्रत्येक प्रकार की बाहरी क्रिया (Overt Action) सामाजिक क्रिया नहीं कही जा सकती बाह्य क्रिया गैर सामाजिक (Non Social) है यदि पूर्णतया जड व बेजानदार वस्तु द्वारा प्रभावित और उसकी प्रतिक्रिया स्वरूप की जा रही है।"

उदाहरण के लिए यदि कोई व्यक्ति अपने घर में बैठकर भजन-पूजन करता है, मंत्रों का उच्चारण करता है तो उसकी यह क्रिया सामाजिक क्रिया नहीं है। लेकिन यदि वह अपने घर में कथा करवाता है या पूजन पाठ का आयोजन करवाता है, जिसमें पंडित या पुरोहितों के द्वारा मंत्र उच्चारण किया जाता है, यज्ञ में आहुति दी जाती है तथा आरती में कई लोग सम्मिलित होते हैं तो यह क्रिया सामाजिक क्रिया होगी क्योंकि इसमें कर्ता का व्यवहार अन्य व्यक्तियों के व्यवहार से संबंधित है।


मैक्स वेबर के अनुसार “कुछ संपर्क उसी सीमा तक सामाजिक क्रिया में आते हैं। जहां तक वह दूसरों के व्यवहार से अर्थपूर्ण ढंग से संबंधित और प्रभावित होते हैं। प्रत्येक प्रकार के संपर्क सामाजिक नहीं कहीं जा सकते।"


उदाहरण के तौर पर यदि रास्ते में दो वाहन चालक चलते हुए आपस में टकरा जाते हैं और गिर जाते हैं और यदि वे दोनों एक दूसरे से बिना कुछ कहे कुछ कर चले जाते हैं तो उनकी यह क्रिया सामाजिक क्रिया नहीं होगी लेकिन यदि दोनों चालक आपस में लड़ते झगड़ते हैं या गाली गलौज करते हैं या फिर दोनों अपनी गलती स्वीकार करते हुए एक दूसरे से माफी मांगते हुए आगे चले जाते हैं तो उनकी यह क्रिया सामाजिक क्रिया होगी क्योंकि ऐसा करने में दोनों व्यक्तियों के व्यवहार आपस में अंतर संबंधित एवं प्रभावित होते हैं।


मैक्स वेबर के अनुसार “सामाजिक क्रिया ना तो अनेक व्यक्तियों के द्वारा की जाने वाली एक जैसी क्रिया को कहा जाता है और ना ही उस क्रिया को कहा जाता है, जो कि केवल दूसरे व्यक्तियों द्वारा प्रभावित होती है।"


मैक्स वेबर का कहना है कि दूसरे व्यक्तियों द्वारा एवं दूसरे व्यक्तियों के व्यवहारों द्वारा प्रभावित क्रिया दोनों में अंतर है। उदाहरण के लिए यदि कहीं सड़क पर व्यक्ति जा रहे हैं और अचानक बारिश हो जाए तो हर व्यक्ति बारिश से बचाव के लिये अपना छाता खालेगा। व्यक्ति के छाता खोलने की क्रिया सामाजिक क्रिया नहीं होगी, क्योंकि यह क्रिया एक दूसरे से संबंधित नहीं है। इस तरह हम यह कह सकते हैं कि दूसरे व्यक्ति की क्रियाओं का अनुकरण ही सामाजिक क्रिया नहीं है यदि कोई व्यक्ति कहीं जाने के लिए शॉर्टकट रास्ता अपनाता है और उसे देखकर दूसरे व्यक्ति भी उस रास्ते पर चलने लगते हैं तो वह भी सामाजिक क्रिया नहीं होगी लेकिन इसके विपरीत यदि बच्चों की किसी क्लास में शिक्षक किसी श्लोक या वाक्य को बोलते हैं और उसे विद्यार्थियों से दोहराने के लिए कहा जाता है तो यह क्रिया सामाजिक क्रिया होगी क्योंकि यह क्रिया शिक्षक की क्रिया से अर्थ पूर्ण रूप से संबंधित है।


उपरोक्त विवेचन से स्पष्ट है कि मैक्स वेबर समाजशास्त्र को एक ऐसा विज्ञान मानते हैं जो सामाजिक क्रिया की निर्वाचनात्मक (Verstehen) समझ को विकसित करता है। जिसके द्वारा सामाजिक क्रियाओं के बीच कार्य कारण संबंध को ज्ञात किया जाता है। सामाजिक क्रिया की निर्वाचनात्मक समझ को मैक्स वेबर ने जर्मन शब्दावली में बरर्स्टहन नाम दिया है। बरर्स्टहन पद्धति में घटनाओं को तर्कपूर्ण ढंग से तथा अर्थपूर्ण व्याख्या द्वारा समझने पर बल दिया जाता है।