विज्ञानों का वर्गीकरण - classification of sciences

 विज्ञानों का वर्गीकरण - classification of sciences


कॉम्ट के द्वारा विज्ञानों का जो वर्गीकरण किया गया है वह निम्न है


गणितशास्त्र


कॉम्ट के अनुसार गणितशास्त्र सबसे प्राचीन आधारभूत सामान्य कम जटिल एवं दोष रहित विज्ञान है। कॉम्ट इसे पूर्ण विज्ञान मानते हैं। इसलिए इसे प्रथम स्थान पर रखा गया है। सामान्य अर्थ में गणित मात्रा एवं अंकों का विज्ञान है। इसकी व्याख्या करते हुए कॉम्ट ने लिखा है “गणित सबसे प्राचीन प्रथम एवं आधारभूत विज्ञान है और सभी विज्ञानों में परिपूर्णता का दावा करता है।” सामाजिक एवं प्राकृतिक घटनाओं के बारे में अनुसंधान एवं नवीन नियमों की खोज गणित के द्वारा ही संभव है। इसके सहारे के अभाव में सभी विज्ञान पंगु हैं। इसके नियम ही स्थाई होते हैं। सदियों बाद भी इसमें किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं हुआ है। यह सर्वप्रथम विज्ञान होने एवं सरल घटनाओं का अध्ययन करने के कारण अन्य विज्ञानों पर कम से कम निर्भर है।


गणित के चार भाग होते हैं- गणित के ये सभी भाग अत्यंत सरल हैं और वे किसी भी अन्य विषय पर आधारित नहीं हैं।


अंकगणित (Arithmetics)


अंक गणित अंकों का विज्ञान है। यह सरलतम विज्ञान है। अंक मौलिक तत्व होते हैं। यह किसी पर आश्रित नहीं होते। इनका कार्य सामान्य एवं सरल घटनाओं एवं वस्तुओं का लेखा जोखा प्रस्तुत करना होता है। इसलिए अंकगणित के द्वारा यथार्थ एवं निश्चित ज्ञान प्राप्त किया जाता है।


बीजगणित (Algibra)


यह गणित का दूसरा भाग है। यह गणित की वह शाखा है जिसमे अंकों के लिए चिन्हों का प्रयोग किया जाता है जैसे- (x+y) =x2+y=2xy यहां पर चिन्हों का प्रयोग प्रतीक स्वरूप ही किया गया है। इसके अर्थ को समझने के लिए अंकों का सहारा लेना पड़ता है। इसलिए बीजगणित प्रत्यक्ष रुप से अंकगणित पर आश्रित है।


ज्यामिति ( Geometry )


यह गणित का तीसरा भाग है इसे रेखागणित भी कहते हैं। इसमें रेखाओं की सहायता से अंको को नापा जाता है जैसे उपरोक्त उदाहरण से स्पष्ट है की ज्यामिति में अंकगणित और बीजगणित दोनों का प्रयोग होता है। इसलिए यह अंक गणित एवं बीजगणित दोनों पर आश्रित है। इसलिए यह इनसे जटिल है।


यांत्रिकी (Mechanism )


यह गणित का चैथा भाग है। इसे अभियांत्रिकी भी कहते हैं। यह वह विज्ञान है जिसकी सहायता से यंत्र बनाए जाते हैं। यंत्र प्रकार की संरचना को कहते हैं। संरचना निर्माण में अंकगणित, बीजगणित एवं रेखागणित तीनों की सहायता ली जाती है। इसलिए यांत्रिकी इन तीनों की अपेक्षा अधिक जटिल है एवं तीनों पर आश्रित है।


 समाकलन अवकलन (Calculus )


कॉम्ट ने गणित के एक और विभाग की चर्चा की थी और कहा था कि अन्य विज्ञानों में इसका न्यूनतम प्रयोग किया जा रहा है। विज्ञान के संस्तरण में सर्वप्रथम स्थान गणितशास्त्र का है। गणित ही वह सबसे शक्तिशाली साधन है जिसको उपयोग में लाए बिना प्राकृतिक नियमों की खोज असंभव है। गणित मानव चिंतन का सबसे मौलिक उपकरण है। किसी भी अनुसंधान के क्षेत्र में चाहे वह प्राकृतिक हो या सामाजिक गणितशास्त्र से अधिक निर्भर योग्य कोई और विज्ञान नहीं है।

क्योंकि तथ्यों का यथार्थ ज्ञान और विभिन्न तत्वों के बीच पारस्परिक संबंधों को सुनिश्चित करना गणितशास्त्र के माध्यम से ही संभव है।

अन्य कोई भी विज्ञान अपने अनुसंधान कार्य में तब तक सफल नहीं हो सकता जब तक कि वह गणितशास्त्र की सहायता न ले क्योंकि यही समस्त विज्ञानों का आधार है। इसी आधार पर अन्य सभी विज्ञान खड़े हैं और विज्ञान कहलाने के योग्य हैं। इसलिए कॉम्ट विज्ञानों के संस्तरण में गणित को प्रथम और आधारभूत स्थान प्रदान करते हैं 1


खगोल शास्त्र


विज्ञान के वर्गीकरण में अन्य विज्ञानों के स्थानों को निश्चित करने के लिए सभी प्राकृतिक घटनाओं को दो बड़े भागों में बांटा गया है


1. आजीवक (Inorganic)


2. जीवक (Organic)


आजीवक घटनाओं को भी दो भागों में बांटा जा सकता है


A. खगोल संबंधी घटनाएं (Astronomical)


B. स्थलीय घटनाएं ( Terrestrial)


खगोलशास्त्र का संबंध खगोल संबंधी घटनाओं से होता है। खगोलीय घटनाएं अत्यंत सामान्य होती हैं। खगोलीय घटनाओं का संबंध सूर्य, चंद्र, तारों, उल्का, ग्रह और उपग्रहों से होता है। खगोलशास्त्र में ग्रह, नक्षत्रों की ब्रह्मांड में स्थिति पृथ्वी से उनकी दूरी सभी ग्रहों, उपग्रहों के बीच की दूरी उनका पारस्परिक आकर्षण एवं आकाशीय घटनाओं का अध्ययन किया जाता है।


उदाहरण के लिए सूर्य एक नक्षत्र है और बुध, गुरु, शुक्र, पृथ्वी, शनी, अरुण, वरुण व कुबेर गृह हैं। चंद्रमा हमारी पृथ्वी का उपग्रह है। ये वास्तव में विभिन्न नक्षत्र ग्रह और उपग्रह एक दूसरे से कितनी दूरी पर स्थित है। यह किस प्रकार पारस्परिक आकर्षण शक्ति द्वारा एक दूसरे से जुड़े हुए हैं? इनका आधार क्या है? नक्षत्र परिवार क्या है? इनकी गति क्या है? इनका एक दूसरे पर क्या प्रभाव पड़ता है? आदि विषयों का अध्ययन खगोलशास्त्र के द्वारा किया जाता है।


यहां पर प्रश्न यह है कि इस प्रकार के अध्ययन का समाजशास्त्र के लिए क्या महत्व है या धरती के मनुष्य के लिए खगोलीय आकाशीय घटनाओं को जानने की क्या आवश्यकता हो सकती है? उत्तर बिल्कुल स्पष्ट है।

हम अपने समाज और धरती संबंधी घटनाओं के बारे में उस समय तक कुछ नहीं जान सकते जब तक कि हम पृथ्वी की प्रकृति तथा दूसरे ग्रह नक्षत्रों के साथ उसके संबंधों को न समझने। यह ज्ञान हमें खगोलशास्त्र से ही प्राप्त होता है। इसलिए कॉम्टे ने गणित के बाद खगोलशास्त्र को स्थान दिया है क्योंकि यह गणित पर आश्रित है और गणित की अपेक्षा जटिल है।


भौतिकशास्त्र


स्थलीय घटनाओं के अंतर्गत दो विज्ञानों का समावेश है। भौतिकशास्त्र और रसायनशास्त्र भौतिक पदार्थों के विषय में जानने के लिए उनका भौतिक या रासायनिक विश्लेषण आवश्यक हो जाता है। इस कार्य के लिए ही दो अलग-अलग विज्ञान बनाए गए हैं। विज्ञानों के वर्गीकरण में कॉम्ट अपने भौतिकशास्त्र को तीसरे स्थान पर रखा है। अगस्त कॉम्ट के अनुसार भौतिकशास्त्र का अध्ययन विषय रसायनशास्त्र के अध्ययन विषय की अपेक्षा अधिक सामान्य है। रासायनिक घटनाएं भौतिकशास्त्र के नियमों पर आधारित होती हैं। पर भौतिकशास्त्र के नियम रासायनिक घटनाओं द्वारा प्रभावित नहीं होते। भौतिकशास्त्र का स्थान रसायनशास्त्र से पहले आता है। भौतिकशास्त्र पर गणित तथा खगोलशास्त्र दोनों का प्रभाव पड़ता है। विभिन्न प्रकार के ग्रहों एवं उपग्रहों का सभी भौतिक पदार्थों पर एक विशिष्ट और निश्चित प्रभाव पड़ता है। अजय घटनाओं का अध्ययन खगोलशास्त्र, भौतिकशास्त्र और रसायनशास्त्र के द्वारा किया जाता है।


रसायन शास्त्र


अगस्त कॉम्ट ने विज्ञानों के वर्गीकरण के चौथे स्थान पर रसायनशास्त्र को रखा है। इसके अंतर्गत रासायनिक प्रक्रिया, रासायनिक संरचना एवं रासायनिक स्वरूपों का अध्ययन किया जाता है। रसायनशास्त्र एवं रासायनिक क्रियाओं पर गणितशास्त्र, खगोलशास्त्र एवं भौतिकशास्त्र का प्रभाव पड़ता है। पर रसायनशास्त्र का प्रभाव गणितशास्त्र एवं भौतिकशास्त्र पर नहीं पड़ता क्योंकि रासायनिक प्रक्रिया विद्युत भार एवं उष्णता से प्रभावित होती हैं और संचालित होती हैं। इसलिए रसायनशास्त्र का स्थान भौतिकशास्त्र के बाद आता है। विज्ञानों को छोड़कर अन्य विज्ञानों की तुलना में रसायनशास्त्र की जटिलता कम है। यह विज्ञान अपने पूर्व के विज्ञानों से अपने अध्ययन में मदद लेता है और दूसरी ओर अपने बाद में आने वाले विज्ञानों के लिए आधार प्रस्तुत करता है।


कॉम्ट के वर्गीकरण का तीसरा भाग चेतन विज्ञानों का है।


इसके अंतर्गत जिन तत्वों का अध्ययन किया जाता है। वह अधिक जटिल होते हैं। चेतन घटनाओं को दो भागों में बांटा जाता है


1. व्यक्तिगत


2. सामूहिक


व्यक्तिगत घटनाओं का संबंध प्राणीशास्त्र से होता है।


प्राणीशास्त्र


जीवज घटनाओं के भी दो प्रकार होते हैं। व्यक्तिगत और सामूहिका व्यक्तिगत के अंतर्गत वनस्पति और पशु जगत की समस्त व्यक्तिगत या शारीरिक स्वरूपों की क्रियाएं तथा संरचनाएं आ जाती हैं। जो कि प्राणीशास्त्र का अध्ययन विषय है। इसमें समस्त जीवन से संबंधित नियमों का अध्ययन सम्मिलित किया जाता है। यह विषय रसायनशास्त्र पर निर्भर होता हैं। कॉम्टे के अनुसार जीवशास्त्र संपूर्ण जीवन और उससे संबंधित सामान्य नियमों का विज्ञान है। स्पष्ट है कि प्राणीशास्त्र, रसायनशास्त्र पर निर्भर होता है। क्योंकि पोषण तथा ग्रंथि के रस से निकलने के समस्त विश्वसनीय नियम हमें रसायनशास्त्र से ही प्राप्त होते हैं। प्राणीशास्त्र का संबंध भौतिकशास्त्र से भी है क्योंकि भौतिकशास्त्र प्राणीशास्त्र को जीवित प्राणियों के भार ताप और अन्य संबंधित तथ्यों का ज्ञान करवाता है। यदि पृथ्वी की गति उसकी वर्तमान गति से बढ़ जाए तो उसका परिणाम मनुष्य के शरीर पर भी पड़ता है।

यानी कि शरीर संबंधी घटनाओं की गति भी निश्चित रूप से बढ़ जाएगी और मनुष्य के जीवन की अवधि कम हो जाएगी। इस तरह पृथ्वी पर होने वाले किसी भी परिवर्तन का प्रभाव मनुष्य के ऊपर पड़ता है और यह जानकारी हमें खगोलशास्त्र के माध्यम से ही प्राप्त होती है। इसलिए प्राणीशास्त्र हमेशा खगोलशास्त्र का ऋणी भी है।


कॉम्ट के अनुसार जीवशास्त्र संपूर्ण जीवन और उससे संबंधित सामान्य नियमों का विज्ञान है। इस विज्ञान में यथार्थता, निश्चितता एवं विश्वसनीयता पाई जाती है। जोकि गणित नियमों पर निर्भर होती है। इस तरह प्राणीशास्त्र अपने अध्ययन में गणितशास्त्र का भी उपयोग करता है। यदि प्राणीशास्त्र अपने अध्ययन में गणितशास्त्र का सहारा न ले तो वह वास्तव में दोषपूर्ण अनिश्चित और अविश्वसनीय होता। इस तरह प्राणीशास्त्र विज्ञानों के संस्तरण में गणितशास्त्र पर भी आश्रित है। उसकी निर्भरता सभी विज्ञानों पर है। अगस्त कॉम्ट मनोविज्ञान को शरीरशास्त्र अथवा प्राणीशास्त्र का एक अंग मानते हैं।


समाजशास्त्र


अगस्त कॉम्ट ने विज्ञानों के वर्गीकरण में समाजशास्त्र को सबसे अंतिम एवं छठवें स्थान पर रखा है। जैविक घटनाओं का दूसरा भाग सामूहिक होता है और इस भाग का अध्ययन समाजशास्त्र के द्वारा ही होता है। इसलिए कॉम्ट ने अपने समाजशास्त्र को सबसे अधिक पराश्रित विज्ञान माना हैं यह अन्य विज्ञानों की तुलना में अधिक विशिष्ट है। इसलिए वह अपने अध्ययन कार्य में गणितशास्त्र, खगोलशास्त्र, भौतिकशास्त्र, रसायनशास्त्र एवं प्राणीशास्त्र सभी पर निर्भर है। कॉम्ट ने अपने प्रारंभिक वर्गीकरण में राजनीतिशास्त्र, अर्थशास्त्र एवं नीतिशास्त्र को सर्वोच्च स्थान पर रखा था। परंतु मानवता के धर्म से संबंधित अपना उनका कोई नीतिशास्त्र सिद्धांत प्रतिपादित नहीं हो पाया। इसलिए उन्होंने विज्ञानों का वर्गीकरण पूर्वानुसार ही रखा। जिसमें की समाजशास्त्र का स्थान सर्वोच्च है। कॉम्ट का यह भी कहना है कि मनुष्य के सामाजिक जीवन से संबंधित 


सभी पक्षों का अध्ययन एक ही विज्ञान के द्वारा किया जाना उचित होगा। यह समाजशास्त्र में ही संभव है। समाजशास्त्र अपने से पूर्व की सभी विज्ञानों पर आश्रित है।

इसलिए इसमें कम निश्चितता पाई जाती है किंतु अन्य विज्ञान विकास के क्रम में अनिश्चितता से निश्चिता की ओर अग्रसर हुए हैं। ठीक उसी प्रकार से समाजशास्त्र भी चिंतन के तीन स्तरों से गुजरता हुआ निश्चितता के लक्ष्य की ओर अग्रसर हुआ है।

कॉम्टे के अनुसार “सामाजिक एंद्रीयक विज्ञान समाजशास्त्र है, समाजशास्त्र एक नया विज्ञान है, नव विकसित होने के कारण पूर्ण रूप से निश्चित अवस्था में नहीं पहुंचा है, यह विज्ञान अभी विकसित हो रहा है, पर यह स्पष्ट है कि इसके विकास की दिशा अनिश्चितता की ओर ही है।"


कॉम्ट के विज्ञानों के वर्गीकरण के सिद्धांत से स्पष्ट है कि कॉम्ट ने अपने विज्ञानों के वर्गीकरण के सिद्धांतों को विज्ञानों की आश्रितता का उत्तरोत्तर वृद्धि क्रम तथा घटती हुई समानता एवं बढ़ती हुई जटिलता के नियमों पर आधारित किया है। विज्ञान जितना अधिक नवीन होगा उतना ही वह जटिल होगा और अन्य विज्ञानों पर आश्रित होगा। समाजशास्त्र तो एक नवीनतम एवं विशिष्ट विज्ञान है। इसलिए यह अपने पूर्ववर्ती विज्ञानों पर आश्रित है।


कॉम्ट के द्वारा प्रस्तुत विज्ञानों के वर्गीकरण को हम संक्षेप में इस प्रकार देखते हैं। इनके वर्गीकरण को विज्ञान के ज्ञान की सीढ़ी भी कहा गया है


1. समाजशास्त्र - गणितशास्त्र, खगोलशास्त्र, भौतिकशास्त्र, रसायनशास्त्र एवं प्राणीशास्त्र पर आश्रित और इन पांचों से जटिल


2. प्राणीशास्त्र - गणितशास्त्र, खगोलशास्त्र, भौतिकशास्त्र एवं रसायनशास्त्र पर आश्रित और इन चारों से जटिल। 


3. रसायनशास्त्र गणितशास्त्र, खगोलशास्त्र, भौतिकशास्त्र पर आश्रित और इन तीनो से जटिल।


4. भौतिकशास्त्र - गणित एवं खगोलशास्त्र पर आश्रित और इन दोनों से जटिल।


5. खगोलशास्त्र - गणितशास्त्र पर आश्रित एवं प्रथम से जटिल ।


6. गणितशास्त्र सामान्य, सरल, स्वतंत्र, संपूर्ण एवं सर्वाधिक प्राचीन विज्ञान