तीन स्तरों के संबंध में कॉम्ट की मान्यताएं - Comte's assumptions regarding the three levels
तीन स्तरों के संबंध में कॉम्ट की मान्यताएं - Comte's assumptions regarding the three levels
अगस्त कॉम्ट ने समाजशास्त्र को एक प्रत्यक्षवादी विज्ञान कहा और इसे स्पष्ट करने के लिए, इसे स्थापित करने के लिए और इसे सबसे महत्वपूर्ण विज्ञान बनाने के लिए कॉम्टे ने विज्ञानों के एक श्रेणीक्रम का प्रस्ताव प्रस्तुत किया और इस श्रेणीक्रम में समाजशास्त्र को सबसे ऊपर रखा। अगस्त कॉम्ट ने समाजशास्त्र शब्द का उपयोग समाज विज्ञानों के कुल योग के रूप में करते हैं। अगस्त कॉम्ट ने विज्ञानों का श्रेणीक्रम बनाने के लिए वही आधार अपनाया जो वे समाजों के आदिम काल से अब तक के विकास को समझने के लिए अपनाते हैं। विज्ञानों का श्रेणी क्रम बनाने में कॉम्ट ने कुछ विशेष मान्यताओं को स्वीकार किया है
1. कॉम्ट का मानना था कि विज्ञानों का एक सामान्य वर्गीकरण किया जाए उन्होंने विज्ञानों को मूर्त एवं अमूर्त दो भागों में बांट दिया।
अमूर्त विज्ञान, गणित घटनाओं के सामान्य नियमों को जानने का प्रयास करता है। जबकि मूर्त विज्ञान, चिकित्सा विज्ञान इन नियमों को वास्तविक क्षेत्रों में लागू करने का प्रयास करते हैं। विज्ञानों के श्रेणी क्रम में अमूर्तता से मूर्तता की ओर संक्रमण होता है। इस वर्गीकरण की श्रेणी के क्रम में सबसे नीचे गणित है जो सबसे अमूर्त है और सबसे ऊपर समाजशास्त्र है जो की मूर्त है।
2. कॉम्ट के अनुसार मानव जीवन के 5 पक्ष हैं और उन्होंने इन पांचों पक्षों की एक सूची बनाई। जिसमें उन्होंने प्राकृतिक जगत के पांचों पक्षों को रखा। इनमें खगोलीय, भौतिक, रासायनिक, जैविक एवं सामाजिक पक्ष को जोड़ा है। कॉम्ट का कहना है कि सच्चाई का पता करने के लिए यह पांचो पक्ष विश्व के किसी भी क्षेत्र में एक समान होंगे, चाहे वह क्षेत्र इंग्लैंड, अमेरिका या भारत हो। इन पक्षों में सरलता से जटिलता का आरोही क्रम भी स्थापित किया है। इन पक्षों में खगोल विज्ञान सबसे सरल और समाज विज्ञान सबसे जटिल है। कॉम्ट ने अपने इन्हीं पक्षों के आधार पर समाज विज्ञान में प्रत्यक्षवादी पद्धति को संपूर्णता से लागू करने की बात कही है।
3. कॉम्ट ने श्रेणी क्रम का तीसरा नियम समाजों के परिवर्तन संबंधी क्रम के रूप में रखा है। मानव समाज विकास के क्रम के बाद एक सीडी चढ़ता है और अपने पूर्व के समाज की उपलब्धियों को बुनियाद बनाता हुआ ऊपर आता है। ऐसा विज्ञानों के विकास के साथ भी है।
इसलिए जो विज्ञान सबसे ऊपर होता है वह अपने से ठीक नीचे वाले विज्ञान से अधिक जुड़ा होता है। उस पर अधिक निर्भर भी होता है। यही कारण है कि अलग-अलग विज्ञान अलग-अलग गति से प्रगति करते हैं। विकास के क्रम में यह भी देखा गया है कि जो विषय सामान्य सरल और दूसरों से स्वतंत्र होते हैं। वह तेजी से विकसित होते हैं खगोलशास्त्र में ये सारी विशेषताए हैं। इसलिए इसका विकास तेजी से हुआ। यह विषय प्राकृतिक विज्ञान में सबसे सरल एवं सामान्य है।
4. कॉम्ट के विज्ञानों के श्रेणीक्रम के विकास में चैथा नियम है कि जो विज्ञान जटिल है और अपने विकास के लिए दूसरों पर सबसे अधिक निर्भर है, वह विकास क्रम की श्रेणी में सब ऊपर होते हैं। समाजशास्त्र भी अपने पूर्ववर्ती सभी विज्ञानों से ग्रहण करता है और उन पर निर्भर है। यह सबसे ज्यादा जीव विज्ञान पर निर्भर है। जो श्रेणी क्रम में ठीक इसके नीचे है।
5. विज्ञानों की श्रेणी क्रम के एक आधार के रूप में कॉम्ट इस बात को भी स्वीकार करते हैं कि ऐसे विज्ञान जो टुकड़ों में अपनी विषय वस्तु का अध्ययन करते हैं अथवा कर सकते हैं, वह श्रेणीक्रम के आधार के अधिक निकट होते हैं। लेकिन जो विज्ञान अपने विषय को संपूर्णता में देखते हैं। वह श्रेणीक्रम में हमेशा ऊपर की ओर होते हैं। जीव विज्ञान सावयवी संपूर्णता में अपने विषय को देखता है। इसलिए वह समाजशास्त्र के अधिक निकट है। समाजशास्त्र अपनी विषय-वस्तु का अध्ययन हमेशा ही संपूर्ण समाज के संदर्भ में करता है।
6. कॉस्ट का कहना है कि हम विज्ञानों के विकास में जैसे-जैसे ऊपरी पायदान की ओर बढ़ते हैं वैसे-वैसे विषय-वस्तु अधिक मूर्त, अधिक जटिल, मापन के अनुपयुक्त एवं भविष्यवाणी के अनुपयुक्त होती जाती है। कॉम्ट का कहना है कि जो विज्ञान जितना जटिल है उसका मापन भी उतना ही कठिन है। पर समाजशास्त्र में यह असंभव नहीं है। क्योंकि समाजशास्त्र ने सभी विज्ञानों से सहायता ली है। समाजशास्त्र ऐतिहासिक तकनीकी का प्रयोग करता है। जबकि दूसरे विज्ञान ऐसा नहीं करते।
अगस्त कॉम्ट ने विज्ञानों को श्रेणीक्रम में बनाने के लिए जिस सोच का उपयोग किया वह उस समय के प्राकृतिक विज्ञान में प्रचलन में थी। कॉम्ट ने अलग-अलग विज्ञानों में संरचनात्मक संबंध तो खोज लिए थे परंतु वह उत्पत्ति संबंधी संबंध नहीं खोज पाए। कॉम्ट के श्रेणीक्रम का यह सिद्धांत समन्वय के सिद्धांत पर आधारित है। यह सिद्धांत प्रभाव पर आधारित नहीं है।
एल.ए. कोजर ने कहा है कि कॉम्ट का यह सिद्धांत बहुत अंशों में सार्थक तर्कों पर आधारित है। फ्रांस के के. आंद्रे. क्रेशन जो कि विज्ञान के इतिहास के अधिक जानकार थे ने कहा कि अगस्त कॉम्ट ने विज्ञान रूपी पंछी के परों को अधिक से अधिक तराश दिया है। उनका कहना है कि अगस्त कॉम्ट ने विज्ञानों के बारे में जो कहा है वह विज्ञान उससे कहीं अधिक क्षमता वान है। विज्ञानों को अलग-अलग श्रेणियों में समय के अनुसार बांटना ठीक नहीं है।
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