आत्महत्या के सिद्धांत का निष्कर्ष - Conclusion of suicide theory

 आत्महत्या के सिद्धांत का निष्कर्ष - Conclusion of suicide theory


दुर्खीम ने आत्महत्या का अध्ययन करने के लिए सांख्यिकी विधि का प्रयोग करते हुए फ्रांस में आत्महत्या के आंकड़े एकत्रित किए और पाया कि आत्महत्या का एक प्रमुख कारण व्यक्तिगत, शारीरिक एवं मानसिक न होकर सामाजिक है। दुर्खीम ने इन आंकड़ों के आधार पर निम्नलिखित निष्कर्ष प्रस्तुत किए 


1. आत्महत्या की दर प्रति वर्ष लगभग एक समान होती है।


2. सर्दियों की तुलना में ग्रीष्म में आत्महत्या की दर अधिक होती है।


3. स्त्रियों की तुलना में पुरुषों में आत्महत्या की दर अधिक होती है। 4. ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में नगरीय क्षेत्रों में आत्महत्या की दर अधिक होती है।


5. कम आयु वालों की तुलना में अधिक आयु वालों में आत्महत्या की दर अधिक होती है।


6. सामान्य नागरिकों की तुलना में सैनिकों के द्वारा अधिक आत्महत्या की जाती हैं। 


7. अशिक्षित व्यक्तियों की तुलना में शिक्षित व्यक्तियों में आत्महत्या की दर अधिक होती है।


8. अविवाहित व्यक्तियों की तुलना में विवाहित, विधुर, विधवा, परित्यक्ता एवं तलाकशुदा व्यक्तियों में आत्महत्या की दर अधिक पाई जाती है।


9. विवाहित व्यक्तियों में ऐसे व्यक्ति जो निसंतान होते हैं या जिनकी संतान पैदा होने के बाद जीवित नहीं रहती उनमें आत्महत्या की प्रवृत्ति अधिक पाई जाती है। 


10. कैथोलिक धर्म को मानने वालों की तुलना में प्रोटेस्टेंट धर्म को मानने वालों में आत्महत्या की दर अधिक पाई जाती है।


उपर्युक्त तथ्यों से पता चलता है कि उम्र लिंग आदि आत्महत्या को प्रभावित नहीं करते बल्कि सामाजिक परिस्थितियां व्यक्तियों को प्रभावित करती हैं। अर्थात आत्महत्या के पीछे सामाजिक कारण ही क्रियाशील रहते हैं। दुर्खीम के अनुसार पुरुषों एवं स्त्रियों में आत्महत्या की दर में भिन्नता का कारण लिंगीय भिन्नता नहीं है बल्कि स्त्रियों की तुलना में पुरुषों का सामाजिक जीवन में अधिक भाग लेना है। स्त्रियां सामूहिक क्रियाकलापों में कम भाग लेती हैं, इसलिए सामूहिक अस्तित्व का प्रभाव उन पर अच्छा या बुरा कम पड़ता। जबकि पुरुष सामूहिक जीवन के उतार-चढ़ाव से अधिक प्रभावित होते हैं। अतः आत्महत्या में भिन्नता का कारण सामाजिक कार्यों में सहभागिता भी है।


इसी तरह विभिन्न आयु के लोगों में आत्महत्या की दर में विभिन्नता का कारण आयु की विभिन्नता नहीं है, बल्कि सामाजिक गतिविधियों में अधिक भाग लेना है, चूँकि अधिक उम्र के लोग सामाजिक जीवन में अधिक भाग लेते हैं। इसलिए उनमें आत्महत्या की दर अधिक पाई जाती है।


दुर्खीम के अनुसार विभिन्न मौसम में आत्महत्या की दर में विभिन्नता का कारण मौसमी परिवर्तन नहीं है। बल्कि मौसमी परिवर्तन के कारण जो सामाजिक जीवन में उतार-चढ़ाव की स्थिति बनती है वह आत्महत्या का कारण है। गर्मियों में सर्दियों की तुलना में अधिक आत्महत्या होने का कारण यह है कि गर्मियों में दिन बड़े होते हैं और उनमें सामूहिक क्रियाएं एवं गतिविधियां बढ़ जाती है। जबकि सर्दियों में दिन छोटे एवं रात बड़ी होती है। यूरोप में ठंड के कारण सर्दियों में लोग ज्यादातर घरों में बंद रहते हैं और सामाजिक गतिविधियों में कम भाग लेते हैं। इसलिए सामाजिक जीवन की घटनाएं उन्हें प्रभावित नहीं करती इसलिए इस मौसम में आत्महत्याओं की संभावनाएं कम हो जाती है। आत्महत्या से संबंधित निष्कर्षों को स्पष्ट करते हुए दुर्खीम ने बताया कि धर्म भी आत्महत्या की दर को प्रभावित करता है। दुर्खीम ने बताया कि दो धर्मों के बीच आत्महत्या की दर में विभिन्नता का कारण उन धर्मों के नियंत्रणात्मक प्रभावों की विभिन्नता है।


धर्म के प्रभाव का विश्लेषण करते हुए दुखम ने कहा है कि प्रोटेस्टेंट धर्म एक व्यक्तिगत धर्म है। इसलिए वह व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर अधिक बल देता है। यह व्यक्ति को स्वतंत्रता पूर्वक विचार करने की छूट प्रदान करता है। इस धर्म का उसपर विश्वास करने वालों में विशेष नियंत्रणात्मक प्रभाव नहीं पड़ता। इस कारण इस धर्म के समर्थकों में आत्महत्या की दर अधिक है। इसके विपरीत कैथोलिक धर्म व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर अधिक नियंत्रण रखता है। कैथोलिक धर्म में सुदृढ़ धार्मिक एकता, व्यक्तिगत स्वतंत्रता न होना एवं बाध्यता मूलक तथा नियंत्रणात्मक प्रभाव के कारण आत्महत्या की दर कम होती है।