मैक्स वेबर का समाजशास्त्र को योगदान - Contribution of Max Weber to Sociology

 मैक्स वेबर का समाजशास्त्र को योगदान - Contribution of Max Weber to Sociology


मैक्स वेबर ने इन चार भागों के आधार पर समाजशास्त्र से संबंधित विभिन्न आयामों एवं सिद्धांतों को प्रस्तुत किया है:


इस आधार पर पता चलता है कि समाजशास्त्र के क्षेत्र में मैक्स वेबर के कार्यों में काफी विविधताएं हैं। इन विविधताओं पर प्रकाश डालते हुए रेमण्ड ऐरन ने (Raymond Aron) ने अपनी पुस्तक मेन करेंट इन सोशियोलॉजिकल थॉट (Main Currents in Sociological Thought) में लिखा है। मैक्स वेबर के विस्तृत कार्यों को कुछ निश्चित अध्यायों में प्रस्तुत कर पाना असंभव है। मैक्स वेबर के समाजशास्त्र में योगदान को हम निम्न श्रेणियों में देख सकते हैं।


1 समाजशास्त्र की अवधारणा) Concept of sociology)


2 पद्धति शास्त्र (Methodology)


3 सामाजिक समझ का सिद्धांत (Theory of Social Understanding )


4 राजनीतिक समाजशास्त्र (Political Sociology)


5 धर्म का समाजशास्त्र (Sociology of Religion )


6 विधि का समाजशास्त्र (Sociology of Law) 


1. समाजशास्त्र की अवधारणा


मैक्स वेबर ने समाजशास्त्र की अवधारणा की व्याख्या वैज्ञानिक संदर्भ में की है आपके अनुसार समाजशास्त्र सामाजिक क्रियाओं का अध्ययन करने वाला विज्ञान होना चाहिए।


 2. पद्धतिशास्त्र


मैक्स वेबर ने समाजशास्त्र में पद्धतिशास्त्र के रूप में काफी बड़ा योगदान दिया है। इस संबंध में पारसंस ने लिखा है कि “अनेक जर्मन विद्वानों से भिन्न वेबर ने पद्धतिशास्त्रीय अन्वेषण स्वांताः सुखाय नहीं किया बल्कि अपनी अनुभवजन्य गवेषणा में प्रस्तुत समस्याओं के स्पष्टीकरण के एक साधन के रूप में किया गवेषणा का यह कार्यक्रम आधुनिक पश्चात जगत की सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं को समझने के अत्यंत विस्तृत प्रयास पर केंद्रित है।


3. सामाजिक समझ का सिद्धांत


मैक्स वेवर का समाजशास्त्रीय जगत में तीसरा महत्वपूर्ण योगदान सामाजिक समाज का सिद्धांत है मैक्स वेवर कहते हैं कि सामाजिक समझ के पीछे मूलतः मानवीय व्यवहारओं की स्थिति होती है इनका कुछ निश्चित उद्देश्य होता है अतः सामाजिक समझ का मुख्य कार्य व्यवहारों तथा उद्देश्यों की वैज्ञानिक व्याख्या करना है।


4. राजनीतिक समाजशास्त्र


मैक्स वेबर ने राजनीतिक समाजशास्त्र के क्षेत्र में भी अपना योगदान दिया है। वेबर ने राजनीतिक समाजशास्त्र के क्षेत्र में कुछ मौलिक अवधारणाएं प्रस्तुत की हैं। इनमें सत्ता शक्ति प्रभुता अधिकारी तंत्र एवं संगठन आदि प्रमुख है। इसके अलावा वेबर राजनीतिक पूंजीवाद की भी विवेचना की है।


 5. धर्म का समाजशास्त्र


मैक्स वेबर की धर्म संबंधी समाजशास्त्रीय व्याख्या बहुत ही महत्वपूर्ण है मैक्स वेबर ने अन्य समाज शास्त्रियों की तरह धर्म के आध्यात्मिक पक्ष पर अधिक जोर नहीं दिया है। वेबर का मानना है कि धर्म आर्थिक घटनाओं से और आर्थिक घटनाएं धर्म से नियंत्रित होती हैं इसलिए मैक्स वेबर ने विश्व के 6 महान धर्मों की विस्तार से विवेचना की है अपनी धर्म के विचारों को वेबर ने अपनी सर्वाधिक प्रसिद्ध रचना द प्रोटेस्टेंट एथिक एंड स्प्रिंट ऑफ कैपिटल इज में विस्तृत रूप से प्रस्तुत किया है।


6. विधि का समाजशास्त्र


वेबर अपने आरंभिक जीवन में कानून की विद्यार्थी थे अतः उनकी रचनाओं में विशेषकर आरंभिक लेखों में कानून की समाजशास्त्र की व्याख्या पर बहुत साहित्य उपलब्ध है। नायक वेबर का मानना है कि समाज के लिए कानून की आवश्यकता अनिवार्य है इसलिए उन्होंने सत्ता तथा नौकरशाही को साधन मानते हुए यह बतलाया कि दोनों के आधार कानून तथा मूल्य है। वेबर कानून की विवेचना एक व्यवस्था क्रम के माध्यम से करते हैं


उपरोक्त विवेचन से स्पष्ट है कि मैक्स वेबर ने समाजशास्त्र को अनेक मौलिक अवधारणाएं प्रदान की है समाजशास्त्र की वैज्ञानिक व्याख्या, पद्धतिशास्त्र, सामाजिक क्रिया, आदर्श प्रारूप, सत्ता, प्रभुता, अधिकारी तंत्र, वर्ग, सामाजिक संगठन, पूंजीवादी समाज, धर्म का समाजशास्त्र, विधि का समाजशास्त्र आदि अनेक •अवधारणा की विवेचना मैक्स वेवर के द्वारा की गई है समाजशास्त्र सदैव वेबर और उनके कार्यों का ऋणी रहेगा।