कॉम्ट के प्रत्यक्षवाद की आलोचना - Criticism of Comte's Positivism

 कॉम्ट के प्रत्यक्षवाद की आलोचना - Criticism of Comte's Positivism


अगस्त कॉम्ट को प्रत्यक्षवाद का जन्मदाता कहा जाता है। विभिन्न सिद्धांतों का अवलोकन करने पर यह प्रतीत होता है कि अगस्त कॉम्ट अपने प्रत्यक्षवादी सिद्धांतों पर स्वयं स्थिर नहीं रह सके। कॉम्ट के प्रत्यक्षवाद सिद्धांत में अनेक कमियां हैं। इसलिए यह सिद्धांत आलोचनाओं से परे नहीं है। कॉम्ट के इस सिद्धांत के विभिन्न आलोचना की गई है जो इस प्रकार है। 


1. प्रत्यक्षवाद एक चिंतन प्रणाली है। यह प्रत्यक्षवादी पद्धति में सामाजिक घटनाओं के अध्ययन की बात करती है, वहीं इसमें धर्म, नैतिकता के लिए भी कुछ विचार प्रस्तुत किए गए हैं जो विज्ञान की अपेक्षा कल्पना और दर्शन पर आधारित है।


2. प्रत्यक्षवाद में कॉम्ट ने धर्म को समाज का आधार स्तंभ बताया है। लेकिन एक धार्मिक सिद्धांत के रूप में प्रत्यक्षवाद कोई ऐसी योजना प्रस्तुत नहीं करता जिससे व्यावहारिक और वैज्ञानिक कहा जा सके।


3. कॉम्ट के सिद्धांत की सबसे बड़ी आलोचना यह है कि यह इनका मौलिक सिद्धांत नहीं है। बान्स (Barne) के अनुसार, अगस्त कॉम्ट से पहले भी ह्यूम (Hume) कॉम्ट (Kant) एवं गाल (Gall) आदि विद्वानों ने प्रत्यक्षवाद की अवधारणा प्रस्तुत की थी। इस आधार पर कहा जाता है कि कॉम्ट प्रत्यक्षवाद की अवधारणा में वे अपने पूर्ववर्ती विचारों से प्रभावित प्रतीत होते हैं।


4. कॉम्ट ने प्रत्यक्षवाद का कोई मौलिक सिद्धांत प्रस्तुत नहीं किया है। यह विचार बान्स (Barmes) ने दिया है। बान्र्स का यह कथन प्रत्यक्षवाद के सिद्धांत पर भी लागू होता है। प्रत्यक्षवाद का सिद्धांत प्लेटो (Plato) के Philosophers State' एवं अरस्तु (Aristotle) के Practical States' सिद्धांतों से भी बहुत हद तक मिलता-जुलता है।


5. ग्राहम वाल्स ने मानव जीवन की उत्पत्ति के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय धर्म का सिद्धांत प्रतिपादित किया। उसका कहना है कि संसार के सभी धर्मों के मूल सिद्धांतों के आधार पर एक अंतर्राष्ट्रीय धर्म की स्थापना होनी चाहिए और इस धर्म का प्रमुख उद्देश्य पूर्ण मानवता का कल्याण करना होगा। इस तरह से वॉल्स ने संसार के सभी लोगों को एक अंतरराष्ट्रीय धर्म के अंतर्गत सम्मिलित करने का प्रयास किया है। वह कॉम्ट के प्रत्यक्षवाद से मिलता-जुलता है।


6. अगस्त कॉम्ट प्रत्यक्षवादी सिद्धांत में नैतिकता बौद्धिकता धर्म और विज्ञान के जाल में उलझ कर उसे वैज्ञानिकता प्रदान करने में समर्थ नहीं रहे। रेमंड एरन के अनुसार प्रत्यक्षवाद का जन्मदाता ही सबसे अधिक अवैज्ञानिक है।"


7. समाजशास्त्री कोजर ने प्रत्यक्षवाद की आलोचना करते हुए लिखा है कि इसमें वैज्ञानिकता कम धार्मिकता अधिक है।" 


8. तिमासेफ का कहना है कि कॉम्ट का प्रत्यक्षवाद अवलोकन और अनुमान के स्तर से एकाएक सिद्धांत पर पहुंचने का काम है। कॉम्ट के प्रत्यक्षवादी विचारों में इतनी परिपक्वता नहीं है कि उसके आधार पर कोई समाजशास्त्री सिद्धांत विकसित किया जा सके।


9 अगस्त कॉम्ट के इस सिद्धांत की आलोचना इस आधार पर भी की जाती है कि कॉम्ट अपने धार्मिक या नैतिक पक्ष को वैज्ञानिक पक्ष से अधिक महत्व प्रदान किया है।

कॉम्ट का प्रत्यक्षवाद धर्म तथा विज्ञान दोनों ही है। कॉम्ट के इस विचार से उनके प्रशंसक व समर्थक नाराज हो गए थे, क्योंकि इन लोगों के विचार से वैज्ञानिकता का विकास करना कॉम्ट का मूल उद्देश्य था, पर वे लंबे समय तक इस पर कायम नहीं रह सके। उनकी विचारधारा के इस परिवर्तन को उनके समर्थकों ने अगस्त कॉम्ट के पतन के रूप में देखा।


10. यदि वे अपना प्रारंभिक स्वरूप बनाए रखते तो आज वे विश्व के प्रमुख प्रत्यक्षवादी वैज्ञानिक माने जाते। किंतु सामाजिक पुनर्निर्माण की स्वप्निल योजना ने उन्हें प्रत्यक्षवाद से दूर कर दिया। इसलिए उनके बारे में यह कहा जाता है कि प्रत्यक्षवाद का जन्मदाता ही सबसे कम प्रत्यक्षवादी था। जे. एस. मिल ने तो इस संबंध में यहां तक कह डाला कि "कॉम्ट के इस दयनीय पतन पर मुझे रोना आता है।"


कॉम्ट के प्रत्यक्षवाद की आलोचना के बावजूद कहा जा सकता है कि वे असाधारण प्रतिभा के धनी विचारक थे। उन्होंने अपने चिंतन से धर्म और विज्ञान को एक दूसरे के निकट लाकर विश्व बंधुत्व को साकार करना चाहा। इसलिए उनका योगदान अविस्मरणीय है।