आदर्श प्रारूप की आलोचना - Criticism of the Ideal Format
आदर्श प्रारूप की आलोचना - Criticism of the Ideal Format
आदर्श प्रारूप की अवधारणा का सबसे बड़ा दोष यह है कि इसकी रूपरेखा स्पष्ट नहीं है। यही कारण है कि मैक्स वेबर के बाद अन्य समाजशास्त्रियों ने इसका उपयोग नहीं के बराबर किया है।
1. यदि हम मैक्स वेबर के आदर्श प्रारूप की अवधारणा को स्वीकार करें तो समाजशास्त्र में सार्वभौमिक नियमों का निर्माण करना कठिन हो जाएगा क्योंकि प्रत्येक वैज्ञानिक किसी घटना के उन तथ्यों की ओर अपना ध्यान केंद्रित करेगा जिसे कि वह महत्वपूर्ण मानता है।
2. मैक्स वेबर का आदर्श प्रारूप केवल तुलनात्मक अध्ययन में ही सहायक हो सकता है
क्योंकि आदर्श प्रारूप के आधार पर हम किसी वास्तविक घटना को और आदर्श प्रारूप के बीच पाई जाने वाली समानता एवं विभिन्नता को ही ज्ञात कर सकते हैं।
3. यदि हम सभी घटनाओं का अध्ययन आदर्श प्रारूप के आधार पर करें तो अनुभव आधारित अध्ययनों का महत्व समाप्त हो जाएगा। उपर्युक्त आलोचनाओं के बावजूद मैक्स वेबर के आदर्श प्रारूप की अवधारणा समाजशास्त्र में एक विशेष स्थान रखती है।
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