वर्तमान परिदृश्य - current scenario
वर्तमान परिदृश्य - current scenario
स्वतंत्रता के बाद भारत ने सामाजिक सुधार की नई चुनौतियों का सामना किया, क्योंकि एक नई सरकार ने कार्यभार संभाला। भारतीय संस्कृति की पूरी धारणा का पुनर्निर्माण करना पड़ा, क्योंकि विविध सांस्कृतिक क्षेत्र एक ही छत के नीचे आ गए थे। विभिन्न आदिवासी समाज और संस्कृतियाँ इस बदलती स्थिति से निपटने में असमर्थ थे। प्रशासनिक नीतियों के अलावा, भारतीय सामाजिक नृविज्ञानियों ने इस तरह के संकट को दूर करने के लिए पहल की और भारतीय सभ्यता की सामान्य छत के नीचे भारत में विविध संस्कृतियों के अध्ययन में रुचि दिखाई। सरकार की नीतियां इन सामाजिक मानवविज्ञान कार्यों से प्रभावित थीं क्योंकि ये कार्य आदिवासी विकास जैसे संवेदनशील मुद्दों से सम्बंधित था। यह रुझान भारतीय मानवविज्ञान के क्षेत्र में जारी है। आज, वैश्वीकरण के युग में, भारत में सामाजिक मानवविज्ञानी आदिवासी समुदायों के सामने नई चुनौतियों से निपटते हैं। विकास अध्ययन के साथ, पहचान और लैंगिक मुद्दे उनके बीच लोकप्रिय हैं। लोक संस्कृति का अध्ययन एक प्रमुख क्षेत्र में व्याप्त है। विकास अध्ययन के साथ, आदिवासी विस्थापन और पुनर्वास जैसे मुद्दों पर सामाजिक मानवविज्ञानी के लिए एक प्रमुख ध्यान केंद्रित किया गया है। जनजातीय कला, स्वदेशी ज्ञान प्रणाली का अध्ययन आदि नए वैश्विक मुद्दों के साथ लोकप्रियता प्राप्त कर रहे हैं जैसे ग्लोबल वार्मिंग ।
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