सामाजिक तथ्य की परिभाषाएं - definitions of social fact
सामाजिक तथ्य की परिभाषाएं - definitions of social fact
दुर्खीम के अनुसार सामाजिक तथ्य कार्य करने, सोचने एवं अनुभव करने के वे तरीके हैं, जिनमें व्यक्तिगत चेतना से बाहर भी अस्तित्व को बनाए रखने की उल्लेखनीय विशेषताएं होती है।”
दुर्खीम के अनुसार सामाजिक तथ्यों में कार्य करने, सोचने, अनुभव करने के तरीके सम्मिलित हैं जो व्यक्ति के लिए बाहरी होते हैं तथा जो अपनी दबाव शक्ति के माध्यम से व्यक्ति को नियंत्रित करते हैं।”
एक सामाजिक तथ्य क्रिया करने का प्रत्येक स्थाई या अस्थाई तरीका है, जो व्यक्ति पर बाहरी दबाव डालने में समर्थ होता है,अथवा पुनः क्रिया करने का प्रत्येक तरीका जो किसी समाज में सामान्य रूप से पाया जाता है किंतु साथ ही साथ व्यक्तिगत अभिव्यक्तियों से स्वतंत्र पृथक अस्तित्व रखता है। वही सामाजिक तथ्य है।
दुर्खीम द्वारा प्रस्तुत की गई उपरोक्त परिभाषाओ से स्पष्ट है कि क्रिया करने के तरीके सामाजिक तथ्य हैं। इसमें मानव की सभी पक्ष सम्मिलित हो जाते हैं। जिसमें मनुष्य की प्रत्येक क्रिया, उसके विचार एवं अनुभव आदि संबंधित होते हैं। यह सामाजिक वास्तविकता का भाग है। समाज में घटित होने वाली ऐसी घटनाएं स्थाई भी हो सकती हैं और स्थाई भी। उदाहरण के लिए यदि हम यह देखें कि किसी क्षेत्र में जन्म या मृत्यु की दर में वार्षिक गणना की जाए तो थोड़ा बहुत अंतर आता है अर्थात इनकी वार्षिक दर प्रायः स्थिर रहती है। इसलिए इन्हें सामाजिक तथ्य माना जाता है, पर हम ईश्वर को सामाजिक तथ्य नहीं मान सकते क्योंकि वह वास्तविक निरीक्षण से परे है। व्यक्ति के विचार भी सामाजिक तथ्य नहीं हो सकते क्योंकि उनका बाहरी स्वरूप स्पष्ट नहीं है। लेकिन समाज में व्यक्तियों के द्वारा निर्मित कोई भी सिद्धांत एवं नियम ईश्वर से संबंधित पूजा प्रार्थना जिसमें टोटमवाद को भी सम्मिलित किया जाता है को सामाजिक तथ्य माना जाएगा। क्योंकि इनका निरीक्षण एवं परीक्षण संभव है।
यह व्यक्ति से बाहर होते हैं तथा व्यक्ति पर दबाव डालने की क्षमता रखते हैं। दुर्खीम ने सामाजिक तथ्योंकी विवेचना अत्यंत सरल एवं स्पष्ट रूप में हमारे समक्ष प्रस्तुत की है।
दुर्खीम ने अपनी एक और व्याख्या में सामाजिक तथ्य को विस्तृत रूप से वर्णित किया है। उनके अनुसार सामाजिक तथ्य कार्य करने, सोचने एवं अनुभव करने के वे तरीके हैं, जिनमें व्यक्तिगत चेतना से बाहर भी अस्तित्व बनाए रखने की उल्लेखनीय विशेषता होती है।
इससे यह बात स्पष्ट हो गई है कि सामाजिक तथ्य देखा जा सकता है। वह अवलोकनीय है। दूसरी बात यह है कि सामाजिक तथ्य सोचने, विचारने और अनुभव करने का एक तरीका है। दुर्खीम के इस विचारधारा से स्पष्ट है कि सामाजिक तथ्य स्थाई और अस्थाई भी है। दुर्खीम के अनुसार दुनिया भर की सभी वस्तुएं कपड़ा, मकान, इंधन, पुस्तक सभी सामाजिक तथ्य है दूसरी तरफ न देखी जाने वाली वस्तुएं भी सामाजिक तथ्य हैं। सामाजिक तथ्य का एक बहुत बड़ा मापदंड यह है कि यह तथ्य व्यक्ति विशेष का न होकर संपूर्ण समाज की धरोहर, विरासत और संपत्ति होते हैं।
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