पराश्रयता निर्भरता वृद्धि के क्रम का सिद्धांत - Dependency Theory of Order of Dependency Growth
पराश्रयता निर्भरता वृद्धि के क्रम का सिद्धांत - Dependency Theory of Order of Dependency Growth
कॉम्ट ने विज्ञानों के वर्गीकरण को प्रस्तुत करने के लिए पराश्रयता वृद्धि क्रम के सिद्धांत को चुना। कॉम्ट के अनुसार ज्ञान या विज्ञान की प्रत्येक शाखा अपने से पहली शाखा या विज्ञान के द्वारा प्रतिपादित सिद्धांतों पर आश्रित होती है। इस निर्भरता का परिणाम यह होता है कि जैसे-जैसे विज्ञान की एक शाखा दूसरी शाखा से आगे बढ़ती जाती है, वैसे-वैसे उस शाखा की पराश्रयता में वृद्धि होती जाती है। इस सिद्धांत के अनुसार जो विज्ञान सर्वप्रथम आया है, वह किसी पर निर्भर नहीं है। इसके बाद जो दूसरा विज्ञान विकसित होगा वह प्रथम विज्ञान पर आश्रित या निर्भर होगा। जो तीसरे होगा वह पहले और दूसरे विज्ञान पर आश्रित होगा। जो चैथा विज्ञान होगा वह पहले दूसरे और तीसरे विज्ञान पर आश्रित होगा।
इस क्रम से विज्ञान की प्रत्येक शाखा में पराश्रयता एवं निर्भरता में वृद्धि होती जाती है। इस तरह हम कह सकते हैं कि प्रत्येक नवीन विज्ञान अपने से पहले विकसित हुए विज्ञानों पर निर्भर होगा और इसी क्रम में विज्ञान की प्रत्येक शाखा की निर्भरता बढ़ती जाती है। इस आधार पर जो विज्ञान जितना अधिक आश्रित होगा वह उतना ही नवीनतम माना जाता है। हम कह सकते हैं कि विज्ञानों के वर्गीकरण एवं संस्तरण में प्रत्येक विज्ञान की श्रेणी अपने से पूर्व विकसित विज्ञान की श्रेणी के नियमों और सिद्धांतों पर आश्रित होती है। इस निर्भरता का परिणाम यह होता है कि विज्ञान की एक शाखा नवीन विकास के साथ-साथ विज्ञान की दूसरी शाखाओं पर निर्भर होती चली जाती है। इस नियम के अनुसार प्राचीनतम विज्ञान सबसे अधिक आत्मनिर्भर एवं स्वतंत्र होता है और नवीनतम विज्ञान सबसे अधिक आश्रित होता है।
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