भारत में समाजशास्त्र का विकास - Development of Sociology in India

भारत में समाजशास्त्र का विकास - Development of Sociology in India

भारत में समाजशास्त्र नाम नया है। परन्तु इसकी नींव अति प्राचीन है। भारत के प्राचीन समाज शास्त्री है। मनु, याज्ञवल्वय, भृगु तथा चाणक्य आदि इन्होने समाज के विभिन्न पक्षों के संबंध में न केवल अपने विचारों को दिया बल्कि उन्हे एक ग्रंथ के रूप में प्रस्तुत किया है। प्राचीन काल के ग्रंथों से पता चलता है कि उस समय की व्यवस्था व्यक्ति और समाज के बीच सुन्दर समन्वय का एक उत्तम उदाहरण है। उस समय के चिंतक इस बात से परिचित थे कि केवल भौतिक एवं व्यक्ति वादिता के आधार पर व्यक्ति के जीवन को पूर्णतया प्रदान नहीं की जा सकती इसलिए उन्होने अध्यात्मवाद का सहारा लिया, धर्म के आधार पर व्यक्ति के आचारण को निश्चित करने का प्रयत्न किया। प्राचीन ग्रंथों का समाज शास्त्रीय दृष्टि से अध्ययन करने की दिशा में प्रो. विनय कुमार सरकार, प्रो. वृजेन्द्र नाथ शील, डॉ. भगवानदास एवं प्रो. केवल मोटवानी ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।