संस्कृति और सभ्यता में अन्तर - difference between culture and civilization
संस्कृति और सभ्यता में अन्तर - difference between culture and civilization
सभ्यता की धारणा को सबसे अधिक मैकाइवर ने विश्लेषित किया उन्होंने प्रौद्योगिकी की चर्चा के सन्दर्भ में सभ्यता की चर्चा की सभ्यता संस्कृति का वह भाग है जो एक समय सन्दर्भ में समाज की भौतिक उपलब्धियों का कुल योग है। अलफ्रेड बेवर के अनुसार सभ्यता का अर्थ है वह वैज्ञानिक और प्रौद्योगिक ज्ञान जिसके द्वारा मानव प्रकृति के साधनों पर अपना नियंत्रण करता है। मैकाइवर के अनुसार सभ्यता भौतिक है इसे मापा जा सकता है। सभ्यता को श्रेष्ठ और निकृष्ट कहा जा सकता है उन्होंने सभ्यता और सकृति की तुलना की है। मूलतः मैकाइबर के चर्चा के आधार पर संस्कृति और सभ्यता में निम्नलिखित अन्तर दृष्टिगत होते हैं।
1. संस्कृति आन्तरिक है एवं सभ्यता बाह्य है। सभ्यता को हम सरलता से अनुभव कर सकते हैं। संस्कृति व्यापक है सभ्यता उसका अंग है संस्कृति का वह पक्ष जिसमें सभ्यता शामिल नहीं किया जाता उन्हें सरलता से अनुभव नहीं किया जा सकता।
2. सभ्यता की माप की जा सकती है संस्कृति के साहित्य संगीत, नियम, मूल्य आदि के पक्ष को मापना संभव नहीं है। इसलिये सभ्यताओं को हम श्रेष्ठ अथवा निकृष्ट कह सकते हैं संस्कृति के अभौतिक पक्ष के संबंध में ऐसा कहना कठिन है।
3. सभ्यता सरलता से अपनाई और सीखी जाती है। संस्कृति की अभौतिक पक्ष को सीखना कठिन है। कोई भी व्यक्ति भाषा, विचार और प्रतीकों को कठिनाई से सीख पाता है।
4. सभ्यता हस्तान्तरण सरल है और संस्कृति के प्रतिकात्मक पक्ष को हस्तान्तरित करना कठिन है।
5. सभ्यता अथवा संस्कृति के भौतिक पक्ष में आगे बढ़ने का भाव होता है अभौतिक पक्ष में जैसे नियमों, मूल्यों में यह भाव नहीं होता।
संस्कृति बदलती जरूर है परन्तु वह अपने को घनीभूत करती जाती है।
6. सभ्यता का आधार प्रौद्योगिकी है तथा अभौतिक संस्कृति मूल्यों में निहित होती है। अनेक विद्वान इसलिये यह कहते हैं कि सभ्यता की तुलना आसान है। साहित्य, संगीत आदि तुलना नहीं की जा सकती।
7. सभ्यता साधनों का बोध कराती है। यह तकनीकी एवं उपायों से जुड़ी है। संस्कृति के अभौतिक पक्ष उन दिशाओं एवं उद्देश्यों का निर्धारण करते है जिन्हें प्राप्त करना है। मैकाइवर ने इस अन्तर को दर्शाने के लिये सभ्यता को एक जहाज एवं संस्कृति को उसका दिशा निर्देशक यंत्र बताया है।
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