सामाजिक क्रियाओं के निर्देशन , सामाजिक क्रिया की आलोचना - Directing Social Action, Criticism of Social Action

 सामाजिक क्रियाओं के निर्देशन , सामाजिक क्रिया की आलोचना - Directing Social Action, Criticism of Social Action


मैक्स वेबर के अनुसार सामाजिक क्रियायें :


1. परंपरागत प्रयोग (Traditional Usage) सामाजिक क्रिया परंपरागत प्रयोग के द्वारा निर्देशित होती हैं। समाज की प्रथाएं मानव की क्रियाओं को प्रभावित करती हैं। इसका परिणाम यह होता है कि लोगों की क्रियायें परम्परा के मार्ग से हटकर बाहर नहीं जाती तथा समाज की मर्यादा पूर्णता बनी रहती है।


2. हित (Interest) - सामाजिक क्रियाओं को विवेकपूर्ण निर्देशन के रूप में समझने में हित का बहुत अधिक योगदान होता है। यह हित समरूपता के रूप में जाने जाते हैं। 3. न्याय संगत व्यवस्था (Legitimate Order) न्याय संगत व्यवस्थाएं संबंधित व्यवहार क्रियायें करता कि किसी आदर्श के निश्चित होने की दृष्टि से निर्देशित होती है और यह किसी उद्देश्य को पाने के लिए तार्किक समझे जाते हैं।

मैक्स वेबर के द्वारा सामाजिक क्रियाओं का यह वर्णन केवल आदर्श प्रारूप की दृष्टि से किया गया है। इनकी व्याख्या का अध्ययन करना ही समाजशास्त्र का कार्य है। 


सामाजिक क्रिया की आलोचना 


मैक्स वेबर का सामाजिक क्रिया का सिद्धांत समाजशास्त्र में एक महान योगदान है। इस सिद्धांत ने समाजशास्त्र को अन्वेषण की एक विधि भी प्रदान की है लेकिन अनेक समाजशास्त्रियों ने मैक्स वेबर के इस सिद्धांत में कुछ कमियां बताई है। मैक्स वेबर के सिद्धांत की आलोचना निम्न आधार पर की गई है


1. जर्मन विद्वान एवं दार्शनिक मैलेन बोक (Malembach) एनआर जर्मन फिलोसोफी’ नामक पुस्तक में लिखा है कि मैक्स वेबर ने सामाजिक क्रिया को जो चार भागों में वर्गीकृत किया है वह वर्गीकरण गलत है। मैलेन बोक ने मूल्यांकनात्मक क्रिया संबंधी विचार को भी गलत बताया है।


2. बोगाडर्स एवं रेमण्ड ऐरन ने भी इस सिद्धांत की आलोचना की है उनके अनुसार सामाजिक क्रिया से सम्बन्धीत विचार उचित एवं तार्किक नहीं है।


3. एलेन टोरेंन ने अपनी पुस्तक 'सोशियोलॉजी दी एक्शन' (Sociology the Action) में लिखा है कि क्रिया का सिद्धांत सामाजिक परिवर्तन की व्याख्या करने में असमर्थ है। वे क्रिया के सिद्धांत में मानकों में अनुरूपता मानते हैं और यह अपरिहार्य होता है। जो न तो सामाजिक परिवर्तन की व्याख्या कर सकता है और न ही यह स्पष्ट कर रहा है कि मानक किस प्रकार से स्थापित होते हैं।


4. मैक्स वेबर का सिद्धांत सामाजिक संरचना और संस्कृति की व्याख्या नहीं करता है। सामाजिक क्रिया का यह सिद्धांत सामाजिक संरचना और संस्कृति के तत्वों को दिया हुआ मानकर अध्ययन करता है और यह सिद्धांत की बहुत बड़ी कमी है।


5. मैक्स वेबर का क्रिया का वर्गीकरण अस्पष्ट तथा गत्यात्मक है।


6. कुछ समाजशास्त्रियों तथा सामाजिक मानव शास्त्रियों का कहना है कि मैक्स वेबर द्वारा वर्णित


पारंपरिक क्रिया में कर्ता सोच विचार नहीं करता यह मानना त्रुटि पूर्ण एवं अवैज्ञानिक है। 7. कोहेन का कहना है कि क्रिया का सिद्धांत व्याख्यात्मक सिद्धांत नहीं है।


8. क्रिया का यह लघु उत्तरीय सिद्धांत है और यह सामान्यीकरण करने में असमर्थ है।


9. मैक्स वेबर की सामाजिक क्रिया की विवेचना का स्वरूप नकारात्मक है।


10. मैक्स वेबर ने क्रिया की अवधारणा के लिए व्यक्तिनिष्ठ अर्थ को जानने पर विशेष बल दिया है जबकि व्यक्तिनिष्ठ अर्थ को यथार्थ में समझना अत्यंत कठिन है।


11. मैक्स वेबर ने सामाजिक क्रिया के सिद्धांत मेंलक्ष्य हेतु तार्किक क्रिया की चर्चा की है जिससे परंपरागत समाज में तार्किक क्रिया का प्रभाव ना होने से संदेह उत्पन्न होता है।


12. रेमंड ऐरन (Raymond Aron) सामाजिक क्रिया की अवधारणा को अमूर्त रूप में विवेचित किया है जिससे सामाजिक क्रिया का वैज्ञानिक विश्लेषण करना कठिन है।


13. पारसंस के सामाजिक क्रिया से तुलना करने पर यह स्पष्ट होता है कि मैक्स वेबर का सिद्धांत एक पक्षीय है।