सामाजिक पुनर्निर्माण की प्रत्यक्षवादी योजना का संचालन एवं प्रशासन - Direction and Administration of Positivistic Plan of Social Reconstruction
सामाजिक पुनर्निर्माण की प्रत्यक्षवादी योजना का संचालन एवं प्रशासन - Direction and Administration of Positivistic Plan of Social Reconstruction
अगस्त कॉम्ट सामाजिक पुनर्निर्माण की योजना में भौतिक, बौद्धिक व नैतिक शक्तियों के संचालन और प्रशासन से संबंधित विचारों को भी व्यक्त किया है, जो इस प्रकार हैं
उद्योगपति (Industrialist )
कॉम्ट के अनुसार, उद्योगपति कर्म का प्रतीक है और यह व्यवसाय व्यक्ति प्रधान है। सामाजिक पुनर्निर्माण की योजना में औद्योगिक शक्ति तथा शासन की शक्ति का संचालन उद्योगपतियों या मालिक वर्ग के आधीन होगा। मालिक वर्ग में साहूकार, बैंकर्स, व्यापारी, शिल्पी और कृषक वर्ग शामिल हैं। मालिक वर्ग में बैंकर्स अधिक अधिकार प्राप्त एवं प्रभावशाली होंगे। इनका स्थान सर्वोच्च होगा पर यह संख्या में कम होंगे। मालिक को यह अधिकार होगा कि वह अपने व्यवसाय से अधिक से अधिक आय प्राप्त करें पर उसे लालच एवं व्यक्तिगत स्वार्थ से दूर रहना होगा। उद्योग में उतना ही प्रबंध कार्य लेना होगा जिससे संचालन अच्छे से कर सके। इस क्षेत्र में पुरोहितों का कर्तव्य होगा कि वे उद्योगपतियों को उनके कर्तव्यों की याद दिलाते रहे और नैतिकता के अनुसार कार्य करने की प्रेरणा देते रहें।
अगस्त कॉम्ट ने सामाजिक पुनर्निर्माण की योजना के अंतर्गत शक्ति का बंटवारा कर दिया था। उनके अनुसार धार्मिक एवं नैतिक शक्ति पुरोहितों के हाथ में थी तथा औद्योगिक, राजनीतिक और भौतिक शक्ति वे उद्योगपतियों को सौंपना चाहते थे। इस वर्गीकरण में कॉम्ट ने बैंकर्स को सर्वोच्च स्थान दिया था। राजनीतिक सत्ता उद्योगपतियों के हाथ में रखी थी, किंतु पुरोहितों की सत्ता इनसे ऊपर थी अपने कर्तव्य के प्रति सचेत रहने तथा सत्ता के उचित प्रयोग के लिए भी पुरोहितों के परामर्श का महत्व रखा गया था। इस तरह कॉम्ट का विचार था कि औद्योगिक समाज में प्रत्येक व्यक्ति अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक होंगे और प्रत्येक व्यक्ति का जीवन अधिक से अधिक सुखमय और व्यवस्थित होगा।
कॉम्ट के सामाजिक पुनर्निर्माण में इस बात का विशेष ध्यान रखा गया है -
1. जिस सम्पत्ति का कोई व्यक्ति सदा से उपयोग करता आ रहा है। वह सदा उस संपत्ति का स्वामी या मालिक माना जाएगा।
2. प्रत्येक श्रमशील नागरिकों को अपने पारिवारिक जीवन को चलाने एवं विकसित करने के लिए आजीविका के साधन एवं अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
3. प्रत्येक व्यक्ति को अपनी संपत्ति को हस्तांतरित करने का अधिकार प्राप्त होगा पर इसकी सूचना उसे अपने संभावित अवकाश प्राप्ति के सात साल पहले देनी होगी।
कॉम्ट का विचार था कि औद्योगिक समाज में प्रत्येक व्यक्ति अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक होगा और प्रत्येक व्यक्ति का जीवन अधिक से अधिक सुखमय और व्यवस्थित होगा।
पुरोहित (Priest)
कॉम्ट के अनुसार पुरोहित ज्ञान के प्रतीक हैं। इसलिए उन्हें बौद्धिक शक्ति का प्रतिनिधि माना जाता है। निर्माण की योजना में बौद्धिक का योगदान बहुत अधिक है। इसका कार्य प्रत्यक्षवादी ज्ञान को प्राप्त करना एवं उसका प्रचार करना है। पुरोहित अपनी योग्यता, विशिष्ट ज्ञान, क्षमता एवं प्रशिक्षण के द्वारा समाज की उन्नति एवं प्रगति के लिए कार्य करेंगे एवं समाज के लोगों का मार्गदर्शन करेंगे।
कॉम्ट का कहना है कि समाज का पुनर्निर्माण इस प्रकार होना चाहिए, जिससे 10,000 परिवारों पर एक पुरोहित हो और उन सब पर मानव धर्म का मुख्य पुरोहित हो। कॉम्ट का विचार था कि पश्चिमी यूरोप में 20,000 मानव धर्म पुरोहित हो धर्म के मुख्य पुरोहित का कार्यालय एवं निवास स्थान पेरिस में हो। उनके अधीन सात मुख्य पुरोहित हो और जब संपूर्ण विश्व में मानव धर्म का प्रचार हो जाए तो इनकी संख्या सात से बढ़ाकर 49 कर दी जाए। कॉम्ट ने पुरोहितों के वर्गीकरण का विचार कैथोलिक संप्रदाय से लिया था। यहां पर ध्यान देने योग्य बात यह है कि एं पुरोहित प्रचलित धर्म के पुरोहित नहीं हैं, बल्कि यह कॉम्ट के काल्पनिक धर्म के मानव धर्म के पुरोहित है। एं धर्मशास्त्री न होकर समाजशास्त्री थे। इनका कार्य संसार में मानव धर्म की मानवता स्थापना करना है। इनका मुख्य कार्य समाज के भावी नागरिकों को मानव धर्म की शिक्षा देना है। इनका कार्य है कि वह समाज के प्रत्येक बच्चे को सामाजिक व्यवस्था में स्थान पाने के प्रयत्न में सहायता दें एवं उचित परामर्श दें। कॉम्ट स्वयं इस बात को स्वीकार करते हैं कि जब तक मनुष्य मुख्य व्यवसाय के द्वारा अपनी योग्यता को प्रमाणित न कर दे तब तक किसी की योग्यता एवं सामर्थ्य को जानना कठिन है, किंतु कॉम्ट के अनुसार पुरोहितों को यह जानने का प्रयास अवश्य करते रहना चाहिए।
कॉम्ट के अनुसार संसार में अधिकांश समस्याएं नैतिकता के अभाव के कारण पैदा होती हैं। इसलिए पुरोहितों को नैतिकता का स्तर बनाए रखना है। पुरोहित वर्ग की स्थापना एवं मानव धर्म की स्थापना की आवश्यकता ही इसलिए हुई ताकि समाज में नैतिकता का वातावरण बना रहे। उच्च नैतिकता से समाज की अनेक समस्याएं अपने आप समाप्त हो जाएंगी। कॉम्ट का विचार था कि पुरोहितों का समाज में स्थान तो उच्च होना चाहिए पर उन्हें वेतन कम मिलना चाहिए ताकि इस पद पर योग्य व्यक्ति ही आए और ऊंचा पद एवं अधिक वेतन पाने का किसी को प्रलोभन ही ना हो।
पुरोहित वर्ग की शक्ति एवं सत्ता धार्मिक एवं आध्यात्मिक होनी चाहिए। राजनीतिक एवं सांसर्गिक नहीं। आज धार्मिक एवं राजनीतिक सत्ता एक स्थान केंद्रित हो गई है और झगड़े की जड़ यही है। पहले धर्म राजनीतिक सत्ता थी, फिर राजनीति में धार्मिक सत्ता आ गई। कॉम्ट के अनुसार धर्म और राजनीति का मेल टूटने से सामाजिक समस्याएं सुलझेंगी। इसलिए कॉम्ट ने पुरोहित वर्ग को आध्यात्मिक व सत्ता का प्रतीक और उद्योगपति एवं पूंजीपतियों को राजनीतिक सत्ता का प्रतिनिधि बताया है। सामाजिक पुनर्निर्माण की योजना में पुरोहितों के निम्न अधिकार एवं कर्तव्य होंगे
1. समाज की बौद्धिक शक्ति पुरोहितों के हाथ में होगी, अतः एं नागरिकों को बौद्धिक सलाह प्रदान करेंगे।
2. पुरोहितों को शिक्षित होना आवश्यक है, जिससे समाज में उनका स्थान उच्च बना रहे।
3. पुरोहित समाजशास्त्री होंगे न कि धर्मशास्त्री इसलिए इनका काम संसार में मानवता के धर्म की स्थापना करना होगा।
4. पुरोहितों का कर्तव्य है कि वह समाज में प्रत्यक्षवादी विचारों का प्रचार प्रसार करते रहे।
5. पुरोहित समाज में ऐसी व्यवस्था बनाए रखेंगे जिससे प्रत्येक नागरिक को उसकी योग्यता के अनुसार समाज में उचित स्थान प्राप्त हो ।
6. कॉम्ट पुरोहितों को आध्यात्मिक सत्ता का प्रतिनिधि मानते हैं। इसलिए कॉम्ट ने उन्हें राजनीतिक सत्ता से दूर रहने की सलाह दी है।
7. कॉम्ट के अनुसार संसार में सभी समस्याओं की जड़ में नैतिकता की कमी है। इसलिए पुरोहितों का कर्तव्य है कि वह समाज में नैतिकता को ऊंचा बनाए रखने के लिए हमेशा कार्य करते रहें।
स्त्री (Women)
कॉम्ट ने स्त्री को नैतिक शिक्षा का प्रतीक माना है। कॉम्ट के अनुसार प्रत्यक्षवादी समाज में नैतिक शक्ति का संचालन स्त्रियों के द्वारा ही किया जाएगा। कॉम्ट के अनुसार पारिवारिक क्षेत्र में नैतिक शिक्षा का संचालन भी स्त्रियों के द्वारा ही किया जाएगा, क्योंकि स्त्रियाँ ही मानवता का प्रतीक होती हैं।
इसलिए स्त्रियों को विकास के सभी अवसर उपलब्ध होने चाहिए कॉम्ट ने महिलाओं के लिए कुछ नियम निर्धारित किए हैं
1. स्त्रियों को एक विवाह प्रथा का अनुसरण करना चाहिए। ऐसा करने से वे समाज में अपने नैतिक प्रभाव को अधिक स्थाई रख सकेंगी।
2. स्त्रियों को तलाक देने की छूट नहीं होनी चाहिए और ना ही पुनर्विवाह की अनुमति होनी चाहिए।
3. स्त्रियां अपनी सहानुभूति प्रेम स्नेह तथा नैतिकता के द्वारा लोगों के आचरण को सात्विक तथा पवित्र बनाएंगीं।
4. कॉम्ट स्त्रियों के लिए सामाजिक एवं राजनीतिक क्षेत्र को वर्जित मानते हैं तथा उनके कार्यों को परिवार तक ही सीमित रखना चाहते थे।
5. कॉम्ट का विचार है कि नैतिकता परिवार से प्रारंभ होना चाहिए और इस का प्रारंभ महिलाओं के द्वारा ही होता है।
पारिवारिक नैतिकता से ही सामाजिक नैतिकता का विकास होता है। पारिवारिक नैतिकता के विका में महिलाओं के योगदान को समाज में स्त्रियों को सर्वोच्च स्थान प्राप्त होगा। कॉम्ट अपनी सामाजिक पुनर्निर्माण की योजना में सामाजिक व्यवस्थाओं को अहिंसक तरीके से बदलने के लिए प्रयासरत रहें एवं बौद्धिक एवं नैतिक शक्तियों के समन्वय से समाज की प्रगति करना चाहते थे। कॉस्ट की सामाजिक पुनर्निर्माण की योजना में प्रत्यक्षवादी समाज का निर्देशक तत्व प्रेम होगा तथा सुव्यवस्था एवं प्रगति इसका ध्येय होगा।
बार्न्स के अनुसार "कॉम्ट की सामाजिक पुनर्निर्माण की योजना राजनीतिक या आर्थिक आधार की तुलना में नैतिक आधार पर स्थापित थी।"
स्त्रियों के संबंध में कॉम्ट ने लिखा है कि स्नेह, शक्ति में अधिक श्रेष्ठ और बौद्धिक व क्रियाशील शक्तियों को निरंतर उच्चतर भावनाओं के अधीन रखने की क्षमता की अधिकारिणी बनकर स्त्रियां मानवता तथा पुरुषों के बीच एक स्वाभाविक मध्यस्थ कड़ी बन गई हैं।" स्त्रियों में ईश्वर ने नैतिक गुणों को विशेष रूप से भर दिया है और उनको विश्व प्रेम के एक जीवंत दृष्टांत के रुप में उपस्थित किया है। ईश्वर की यह इच्छा है कि हम सब स्त्रियों की नैतिक अभिभावकता या संरक्षकता में ही रहें। उनका यह नैतिक अभिभावक का रूप माँ, पत्नि एवं पुत्री के रूप में प्रकट होता है। इन तीनों रूपों में एकता या संगठन के तीन आवश्यक तत्व छिपे हुए हैं। आज्ञाकारिता, मिलन एवं संरक्षण। माँ के रूप में स्त्री पुरुष से अपनी आज्ञा का पालन करवाती है। पत्नी के रूप में उसे पुरुष का शारीरिक व हृदय गति मिलन होता है और पुत्री के रूप में वह स्नेह एवं संरक्षण प्रदान करती है। तीनों रूप सामाजिक निरंतरता के तीनों कालों की ओर संकेत करते हैं, भूत, वर्तमान और भविष्या
कॉम्ट के आलोचक कॉम्ट की पुनर्निर्माण की योजना को सर्वथा काल्पनिक मानते हैं। जिस प्रकार की थॉमस मूर ने यूटोपिया की कल्पना की थी। जो कि क्रियान्वित नहीं हो सकी। उसी तरह यह योजना भी कल्पना मात्र है और वास्तविकता से दूर है। फिर भी कॉम्ट की इस योजना की प्रशंसा की जानी चाहिए क्योंकि इसमें नैतिकता एवं परमार्थ की भावना पर बल दिया गया है।
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