अगस्त कॉम्ट का प्रारंभिक जीवन - The Early Life of August Comte
अगस्त कॉम्ट का प्रारंभिक जीवन - The Early Life of August Comte
अगस्त कॉम्ट का जन्म 19 जनवरी 1798 में फ्रांस के मॉन्टपेलियर नामक स्थान में एक मध्यमवर्गीय कैथोलिक परिवार में हुआ था। आपके पिता कर विभाग में अधिकारी थे आर्थिक दृष्टि से परिवार की आय मध्यम वर्ग की थी। अगस्त कॉम्ट का पूरा नाम इसीडोर अगस्त मैरी फ्रेंनक्वींस जेवियर कॉम्ट था। कॉम्ट का बचपन अनेक प्रकार की विलक्षणताओं से परिपूर्ण था बचपन से ही उनके व्यक्तित्व में दो प्रमुख विशेषताएं देखने को मिली यह विशेषताएं उनके जीवन में हर क्षेत्र में प्रदर्शित होती हैं -
1. प्रखर बौद्धिक क्षमता यह अगस्त कॉम्ट की मौलिक विशेषता थी। बौद्धिक दृष्टि से उनका व्यक्तित्व बहुत ही विलक्षण था। उन्होंने अपनी प्रखर बुद्धि एवं मानसिक परिपक्वता का परिचय बहुत जल्दी देना शुरू कर दिया था।
14 वर्ष की उम्र में ही वे सामाजिक पुनर्निर्माण एवं पुनर्गठन के बारे में सोचने लगे थे और 16 वर्ष की आयु में गणित जैसे कठिन विषय पर व्याख्यान देना प्रारंभ कर दिया था। इससे स्पष्ट है कि कॉम्ट प्रारंभ से ही असाधारण व्यक्तित्व एवं विलक्षण प्रतिभा संपन्न व्यक्ति थे।
2. स्थापित सत्ता के विरोधी कॉम्ट स्थापित सत्ता के भी विरोधी थे और यह भी उनके व्यक्तित्व की एक विशेषता थी। वह अपनी पुरानी स्थापित सत्ता और परंपराओं के घोर विरोधी थे और वे दूसरों के विचारों को अपने ऊपर थोपने पर भड़क उठते थे। उनके पिता कट्टर राज भक्त थे और कॉम्ट उनके प्रबल विरोधी थे। उनके विचार पिता के राजनीतिक विचारों से भिन्न थें। कॉम्ट ने अपने आप को रिपब्लिक घोषित कर दिया था। उनके माता-पिता कैथोलिक धर्म के उपासक थे और कॉम्ट कैथोलिक धर्म के कटु आलोचक थे। वे अपने माता-पिता के विपरीत लोकतंत्रवादी थे।
उन्होंने बचपन से ही अपने पिता के विचारों का विरोध करना प्रारंभ कर दिया था और 13 वर्ष की आयु में ही अपने परिवार की राजनीतिक, धार्मिक विचारों एवं विश्वासों की तिलांजलि देकर एक स्वतंत्र विचारक होने का दावा प्रस्तुत किया था।
शैक्षणिक जीवन
अगस्त कॉम्ट की प्रारंभिक शिक्षा उनके अपने ही नगर मॉन्टपेलियर में हुई। इसके बाद वे अध्ययन के लिए पेरिस चले गए। जहां उन्होंने पॉलिटेक्निक स्कूल में प्रवेश लिया। उनकी प्रतिभा का निखार तो मॉन्टपेलियर में ही दिखने लगा था। पेरिस में जाकर उनकी प्रतिभा को परिपक्वता प्राप्त हुई। कॉम्ट की अध्ययन क्षमता एवं स्मृति अन्य छात्रों की अपेक्षा असाधारण थी। इसलिए वह विद्यार्थियों में बहुत लोकप्रिय हो गए। स्कूली जीवन में एक प्रोफेसर को शिक्षण संस्था से निकाल देने के लिए चलाए गए आंदोलन में उन्होंने सक्रिय भाग लिया। इस तरह से वह छात्र नेता बने। 13 वर्ष की आयु में परिवार के धार्मिक एवं राजनीतिक विचारों एवं विश्वासों का परित्याग किया। 14 वर्ष की आयु में पुनर्निर्माण एवं पुनर्गठन पर अपने विचार व्यक्त किए। 16 वर्ष की आयु में गणित के अध्ययन पर अपना ध्यान केंद्रित किया और कई व्याख्यान दिए। इस छोटी सी आयु में गणित विषय पर व्याख्यान देकर एक साहसी और प्रखर बुद्धि वाले स्वतंत्र विचारक बन गए। उनकी क्षमताओं एवं विचारों के कारण उनके साथी उन्हें दार्शनिक कहा करते थे।
अपने विद्यार्थी जीवन में कॉम्ट फ्रांस के एक प्रसिद्ध विचारक बेंजामिन फ्रैंकलिन से भी अत्यधिक प्रभावित हुए। वे उन्हें अपना आदर्श मानते थे तथा उनका अनुकरण करना चाहते थे।
एक बार उन्होंने अपने एक मित्र को लिखा था कि मैं आधुनिक सुकरात (बेंजामिन फ्रैंकलिन) का अनुकरण करना चाहता हूं। उनके बौद्धिक गुणों का नहीं बल्कि जीवन जीने के तरीकों का तुम जानते हो कि वह जब 25 वर्ष के थे तभी उन्होंने अपने आप को पूर्णतया बुद्धिमान व्यक्ति सोच लिया था। मैंने भी उसी विचार को ग्रहण करने का साहस किया है यद्यपि मेरी आयु अभी 20 वर्ष की भी नहीं है।
20 वर्ष की आयु में अगस्त कॉम्ट को सुप्रसिद्ध दार्शनिक सेंट साइमन के संपर्क में आने का अवसर प्राप्त हुआ। 1818 से 1824 तक सात वर्षों तक दोनों के बीच काफी घनिष्ठ संबंध रहे। इन सात वर्षों के संपर्क का प्रभाव अगस्त कॉम्ट के मन-मस्तिष्क एवं विचारों पर देखने को मिलता है। सामाजिक सुधार की अवधारणा को कॉम्ट ने सेंट साइमन से ही ग्रहण किया था। सेंट साइमन के कई विचारों का परिवर्तित एवं परिवर्धित तथा संशोधित रूप हमें कॉम्ट की रचनाओं में देखने को मिलता है।
कॉम्ट की विचारधारा साइमन की विचारधारा से काफी प्रभावित रही क्योंकि उन्होन साइमन की तरह ही यह स्वीकार किया कि विज्ञानों का वैज्ञानिक वर्गीकरण अति आवश्यक है तथा दर्शन का मुख्य उद्देश्य सामाजिक होना चाहिए।
विज्ञानों के वैज्ञानिक वर्गीकरण की अवधारणा का विचार अगस्त कॉम्ट ने सेंट साइमन से ही ग्रहण किया था। कॉम्ट ने स्वीकार किया कि विज्ञानों का वर्गीकरण अति आवश्यक है तथा दर्शन का मुख्य उद्देश्य सामाजिक होना चाहिए और सामाजिक विचारकों को समाज के नैतिक, धार्मिक तथा राजनीतिक व्यवस्थाओं के पुनर्गठन में योगदान देना चाहिए। कॉम्ट साइमन की चिंतन पद्धति को अवैज्ञानिक व अव्यवस्थित होने के कारण पूर्णतया स्वीकार नहीं कर पाए क्योंकि सेंट साइमन के विचारों में क्रमबद्धता का अभाव था जबकि कॉम्ट के विचार व्यवस्थित, तार्किक, वैज्ञानिक यथार्थ तथा तथ्यों पर आधारित थे। इसलिए दोनों के विचार अधिक समय तक मेल नहीं खा सके और उनके संबंधों में दरार पड़ गई। कॉम्ट ने दावा किया था कि वह सेंट साइमन से कहीं अधिक वैज्ञानिक आधार पर विज्ञानों का वर्गीकरण व सामाजिक पुनर्गठन की योजना प्रस्तुत करने की क्षमता रखते हैं। इस अभिव्यक्ति से उनका संबंध साइमन से हमेशा के लिए टूट गया।
कॉम्ट ने स्पष्ट दोषारोपण किया की साइमन के समर्थक उनके विचारों का दुरूपयोग कर रहे हैं और साइमन स्वयं भी दुराचारी नीमहकीम मात्र है।
पारिवारिक जीवन
सन 1925 में अगस्त कॉम्ट ने कारोलिन मैसिन नामक युवती से विवाह किया। उनका वैवाहिक जीवन कभी सुखी नहीं रहा। विवाह के बाद ही उनका पारिवारिक जीवन दुखद हो गया था। अपने दुख को भूलने के लिए अगस्त कॉम्ट ने अपना पूरा समय लेखन एवं अध्ययन कार्य को देने लगे। उन्होंने विभिन्न विषयों पर व्याख्यान देना प्रारंभ कर दिया। इससे उन्हें धन और प्रसिद्धि दोनों मिली पर अत्यधिक परिश्रम करने के कारण 1827 में वह भयंकर मानसिक रोग से ग्रसित हो गए। यहां तक की कॉम्ट ने सेन नदी में डूबकर मरने का प्रयास भी किया था। लगभग 1 वर्ष के पश्चात वे इस रोग से मुक्त हुए और उन्होंने पुनः व्याख्यान देना प्रारंभ किया। इस समय कॉम्ट पॉलिटेक्निक इंस्टिट्यूट में प्रशिक्षक रहे। जहां पर वे गणित पढ़ाने के साथ-साथ ज्योतिषशास्त्र पर भी व्याख्यान दिया करते थे। यहीं पर 1930 में उनकी महान कृति 'द कोर्स ऑफ पॉजिटिव फिलॉसफी' का पहला खंड प्रकाशित हुआ। इसका छठवां खंड 1842 में प्रकाशित हुआ था। 1842 में ही उनका उनकी पत्नी से तलाक हुआ। इस तलाक के साथ ही उनके संघर्ष में एवं कष्टप्रद जीवन का अंत हुआ।
कॉम्ट के जीवन में एक नया मोड़ तब आया जब 1844 में वे क्लोटाइल डी वॉक्स नामक महिला के संपर्क में आए। यह सामान्य एवं दुखी महिला थी। अगस्त कॉम्ट इन्हें अनेक दैवीय गुणों से युक्त एवं अतुलनीय मानते थे। यह महिला अगस्त कॉम्ट के दिल एवं दिमाग पर छाई रही। अगस्त कॉम्ट को वॉक्स के प्रति प्यार एक तरफा था क्योंकि वाक्स को कॉम्ट से प्यार नहीं था और न ही कभी दोनों एक साथ एक घर में रहे। अगस्त कॉम्ट का यह प्रेम अधिक समय तक नहीं चला क्योंकि कॉम्ट के संपर्क में आने के। वर्ष बाद ही वॉक्स की मृत्यु हो गई पर कॉम्ट उससे इतना प्रेम करते थे कि उसकी पूजा करने लगे थे। वॉक्स की मित्रता के प्रभाव से ही कॉम्ट स्त्रियों के प्रशंसक बन गए थे। इसी कारण उन्होंने अपनी दूसरी प्रसिद्ध कृति ‘सिस्टम आफ पॉजिटिव पॉलिटी' में स्त्रियों की प्रशंसा की है तथा उनके नैतिक एवं देवी गुणों का विस्तार से उल्लेख किया है। इसी रचना में उन्होंने मानवता के धर्म की अवधारणा भी प्रतिष्ठित की है। उन्होंने सामाजिक पुनर्निर्माण की जो योजना प्रस्तुत की। उसका आधार विज्ञान को न बनाकर धर्म को बनाया है। उनका विश्वास था कि सामाजिक पुनर्निर्माण के लिए नैतिक आदर्श, अध्यात्म तथा सहनशीलता व न्याय की भावना का समन्वय होना आवश्यक है। मानवता के धर्म की स्थापना के लिए सभी प्रकार के विरोधी विश्वासों, आचरण एवं अनुष्ठानों को मिलाने एवं उनका समन्वय करने एवं एकत्रीकरण करने पर जोर दिया। इससे कॉम्ट के शिष्यों लिट्टरे तथा जॉन स्टुअर्ट मिल को काफी दुख हुआ क्योंकि उनके यह विचार उनके पूर्व के वैज्ञानिक विचारों से एकदम विपरीत थे।
अपनी असाधारण प्रतिभा एवं बौद्धिक प्रखरता तथा तार्किक विचारधारा के कारण अगस्त कॉम्ट को शिक्षित समाज में प्रतिष्ठित स्थान प्राप्त था। उनके कुछ आलोचकों का कथन है कि उनके लेखों में एकरूपता का अभाव था। उनकी प्रथम रचना के प्रकाशन के बाद उनकी प्रतिभा एवं क्षमता का विनाश शुरू हो गया था। इसके बावजूद उनके प्रशंसकों की संख्या में कमी नहीं थी। उन्होंने अपने विचार अनेक लोगों को प्रभावित किया है।
आर्थिक स्थिति
अगस्त कॉम्ट की आर्थिक स्थिति प्रारंभ में काफी दयनीय थी। स्कूल से निकाले जाने के बाद अगस्त कॉम्ट ने अपना खर्चा भाषण देकर चलाया। यहां तक कि उनकी प्रथम पुस्तक 'द कोर्स ऑफ पॉजिटिव फिलासफी के प्रकाशन से पहले उनकी आय का साधन केवल प्राइवेट शिक्षण कार्य एवं व्याख्यान ही थे और प्रथम रचना के प्रकाशन के बाद कॉम्ट को पॉलिटेक्निक स्कूल में प्रवेश लेने वाले छात्रों के परीक्षक का पद प्राप्त हुआ। इससे उन्हें कुछ आय होने लगी तथा उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ। इस कृति की लोकप्रियता एवं उनकी असाधारण प्रतिभा से प्रभावित होकर अनेक व्यक्ति और उनके समर्थक उनको आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए चंदा भी इकट्ठा करने लगे 1845 में जॉन स्टुअर्ट मिल ने इंग्लैंड में उनके लिए 1200 डालर चंदा इकट्ठा किया था।
इस प्रकार के चंदे के धन को स्वीकार करने में अगस्त कॉम्ट को कभी हिचकिचाहट नहीं हुई क्योंकि उनका कथन था कि वह जिस चीज के लिए परिश्रम कर रहे हैं उसके लिए उन्हें आर्थिक मदद मिलनी चाहिए। लोगों का यह कर्तव्य है कि वह उनकी मदद करें इसलिए उन्हें हमेशा यह भी शिकायत रही कि चंदे का धन बहुत कम है। इसे अगस्त कॉम्ट के चरित्र की एक बड़ी भारी दुर्बलता मानी जाती है।
तात्कालिक परिस्थितियां
किसी भी विचारक का प्रेरणा स्रोत कुछ न कुछ सामाजिक परिस्थितियां होती है। अगस्त कॉम्ट भी इसके अपवाद नहीं थे। यूरोप एवं फ्रांस की क्रांति के बाद नेपोलियन के अधिनायकवाद के परिणामस्वरुप फ्रांस में जो सामाजिक व्यवस्था उत्पन्न हुई उसका अगस्त कॉम्ट के मस्तिष्क पर गहरा प्रभाव पड़ा।
अगस्त कॉम्ट के विचारों को प्रभावित करने में तत्कालीन फ्रांस एवं यूरोप की सामाजिक परिस्थितियों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। समाजशास्त्र की उत्पत्ति फ्रांस की राज्यक्रांति से उत्पन्न सामाजिक अव्यवस्था के कुछ समय पश्चात ही हुई थी। इस क्रांति के कारण फ्रांस की आर्थिक राजनीतिक एवं सामाजिक व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन आया। फ्रांस में चली आ रही सामंती प्रथा को समाप्त कर दिया गया।
वहाँ के राजाओं को प्राप्त दैवी अधिकार और उनकी सरकार को भी नष्ट कर दिया। चर्च की सत्ता लगभग समाप्त हो गई थी और कुलीन वर्ग के लोगो को प्राप्त विशेषाधिकार भी छीन लिए गए थे।
इस क्रांति के बाद सत्ता अनुभवहीन लोगों के हाथ में आ गई थी और नेपोलियन एक तानाशाह के रूप में उभरा था। समाज में अव्यवस्था एवं अनिश्चितता की स्थिति पैदा हो गई। ऐसे समय में समाज के समक्ष एक प्रमुख समस्या व्यवस्था को कायम रखने, उसकी उन्नति करने की थी और इस बात की भी आवश्यकता महसूस की जा रही थी कि सामाजिक विचारक सामाजिक समस्याओं के समाधान हेतु दार्शनिक एवं काल्पनिक हल ही नहीं बल्कि वैज्ञानिक और व्यावहारिक हल भी प्रस्तुत करें। उस समय अगस्त कॉम्ट ने समाज से संबंधित अपने जो विचार रखे थे वे समय की मांग के अनुरूप ही थे। उन्होंने समाजशास्त्र को एक विज्ञान के रूप में प्रस्तुत किया। उनका विचार था कि सामाजिक उद्विकास और सामाजिक प्रगति से संबंधित विज्ञान होना चाहिए। सामाजिक प्रगति और पुनर्गठन की योजनाएं अनुभव और प्रयोग सिद्धि विज्ञान पर आधारित होना चाहिए। इसी समय उन्होंने सामाजिक पुनर्निर्माण की योजना प्रस्तुत की।
जिस समय समाजशास्त्र का उदय हुआ उस समय फ्रांस तथा यूरोप में औद्योगिक क्रांति जन्म ले रही थी। इस सब के परिणाम स्वरुप उत्पादन में वृद्धि होने के साथ-साथ यातायात एवं संचार के नवीन साधन भी विकसित हो रहे थे। व्यापार में वृद्धि होने के कारण नवीन वर्ग पूंजीपति अथवा बुजुवा वर्ग का उदय हो रहा था। इन सभी परिवर्तनों के प्रभाव के कारण समाज में राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक अशांति एवं विषमता पैदा हो रही थी।
इन परिवर्तनों के कारण विज्ञान के क्षेत्रों का विकास एवं विस्तार भी प्रारंभ हो गया था। इन सभी परिस्थितियों ने सामाजिक सुधार को आवश्यक बना दिया था। सामाजिक विचारों में परिवर्तन होने लगे थे तथा अवलोकन, परीक्षण और कारणों को ज्ञान का आधार माना जाने लगा था। इन नवीन स्थितियों ने फ्रांस के तत्कालीन समाज सामाजिक ढांचे में भी परिवर्तन किया विद्वानों ने एक नए समाज की रचना की योजनाएं प्रस्तुत की अगस्त कॉम्ट भी इनमे से एक प्रमुख विचारक थे
क्रांति के परिणाम स्वरूप सबसे प्रमुख समस्या समाज में व्यवस्था कायम रखने और समाज की उन्नति करने की थी। उस समय आवश्यकता इस बात की थी कि सामाजिक विचारक सामाजिक समस्याओं के लिए केवल काल्पनिक ही नहीं बल्कि दार्शनिक, वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक हल प्रस्तुत करें। अगस्त कॉम्ट ने समय की मांग के अनुरूप अपने विचार प्रकट किए और उन्होंने सामाजिक पुनर्निर्माण की ओर अधिक ध्यान दिया उनके अनुसार उद्विकास एवं सामाजिक प्रगति से ही संबंधित विज्ञानों का विकास होना चाहिए। इसलिए उन्होंने समाजशास्त्र को विज्ञान के रूप में प्रस्तुत किया और वह 19वीं सदी के प्रमुख विचारक बन गए।
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