पश्चिम में समाजशास्त्र का आविर्भाव - Emergence of Sociology in the West
पश्चिम में समाजशास्त्र का आविर्भाव - Emergence of Sociology in the West
अमेरिका में समाजशास्त्र के उदय पर केन्द्रित है लेकिन किसी भी विषय या ज्ञान की शुरूआत शून्य में न होकर एक परिवेश में होती है जिसके लिऐ सामाजिक आर्थिक व राजनैतिक परिस्थितियां भी जिम्मेदार होती है उन सभी का अध्ययन किये बिना हम विषय सम्बन्धित जानकारी प्राप्त करने में अक्षम होते है अतः समाजशास्त्र के अमेरिका में उद्भव के विषय में जानने से पूर्व हम इस इकाई के पहले खण्ड में समाजशास्त्र उद्भव की परिस्थितियों व विकास के विषय में संक्षेप में विचेना करेगें।
तत्पश्चात् इसके विषय विस्तार के खण्ड में अमेरिका में समाजशास्त्र के उद्भव तथा उद्भव में योगदान करने वाले समाजशास्त्रीयों के विषय में विवेचना करेगें साथ ही समाजशास्त्र के विकास क्रम में इसको दो शाखा माइक्रो और मैक्रो समाजशास्त्र के संबंध में भी जानेंगे। इसी के साथ अमेरिका में अकादमिक रूप में समाजशास्त्र की शुरूआत और इसी दौरान उत्पन्न हुए शिकागो सम्प्रदाय के विषय में चर्चा करेंगे।
मनुष्य को सदैव अपने समाज के बारे में जानने और इसके बारे में विचार करने की प्रवृत्ति रही है। पिछले इतिहास का अध्ययन करें तो पाते है कि समाज वैज्ञानिक अंतर्दृष्टि उस समय भी पायी जाती थी। हम कह सकते है कि इस विषय का इतिहास बहुत लम्बा नहीं है। पर निश्चित ही इसका अतीत बहुत बड़ा है। इस संबंध में बीयरस्टेट का यह कथन प्रसंगिक हो जाता है समाजशास्त्र का एक लम्बा अतीत रहा है लेकिन इतिहास काफी होता’’ अर्थात् इस विषय की उत्पत्ति के पूर्व भी उस पर चिंतन होते रहे है लेकिनउन विषय वस्तुओं परएक स्वतन्त्र विषय के अन्तर्गत वैज्ञानिक ढंग से चिंतन कुछ समय पहले ही शुरू हुआ।
टी.बी. बाटोमोर ने समाजशास्त्र की उत्पत्ति एवं विकास की चार प्रमुख अवस्थाओं की चर्चा की। प्रथम अवस्था में वे प्राचीन यूनानी विचारकों प्लेटो एवं अरस्तू के विचारों को रखते है जो अपने पुस्तकों में उस समय के सामाजिक जीवन के अनेक पक्षों जैसे पारिवारिक जीवन, रीतिरिवाज, स्त्रियों की स्थिति व तात्कालिक समाज की समस्याओं का उल्लेख करते है। दूसरी अवस्था में वे छठी शताब्दी से 14वीं शताब्दी की चर्चा करते है जिस समय सामाजिक जीवन की व्याख्या दार्शनिक व धार्मिक आधार पर की जाती थी इस युग में सेंट अक्यूनॉस व दाँते जैसे विचारक रहे है जिन्होंने मानव को एक सामाजिक प्राणी माना साथ ही यह भी माना की समाज स्थिर नहीं है बल्कि परिवर्तनशील है। इस युग में अनेक विद्वानों के विचार दार्शनिक व धार्मिक के स्थान पर तार्किक भी होने लगे थे। समाजशास्त्र के विकास की तीसरी अवस्था में सामाजिक जीवन के विभिन्न पक्षों की विवचेना की गई और चतुर्थ अवस्था में समाजशास्त्र की विज्ञान के रूप में उत्पत्ति हुई।
इस प्रकार समाजशास्त्र एक विज्ञान के रूप में सन् 1838 ई() में फ्रांस में उद्भूत हुआ। यद्यपि पहला समाजशास्त्री 14वीं सदी का उत्तर अफ्रीकी विद्वान अरब विद्वान इब्न खल्दून को माना जाता है जिसने अपनी कृति "मुकद्दीमा में सामाजिक एकता व सामाजिक संघर्ष संबंधी समाज वैज्ञानिक सिद्धान्तों की विवेचना की। शब्द Sociology पहली बार 1780 में फ्रांसीसी निबंधकार इमैनुअल जोसफ सीयस द्वारा एक अप्रकाशित पांडुलिपि में गढ़ा गया। जिसे बाद में ऑगस्ट कॉम्ट द्वारा स्थापित किया गया।
वार्तालाप में शामिल हों