समाजशास्त्र के उद्भव - the emergence of sociology

समाजशास्त्र के उद्भव - the emergence of sociology

इस प्रकार 20वीं सदी के पूर्वार्द्ध में समाजशास्त्रीय सैद्धान्तीकरण में अप्रत्याशित परिवर्तन देखने को मिलता है। ये परिवर्तन वस्तुतः कुछ प्रथम विश्व युद्ध, रूस की क्रान्ति व अन्य आर्थिक अनिश्चिताओं के परिणामस्वरूप है। जेन्डर, प्रजाति, असमानता, प्रगति व क्रान्ति के मुद्दे प्रमुख हैं। बदलती सामाजिक परिस्थितियों ने निरन्तर नये विचार के आयाम प्रदान किये। इसी क्रम में जब व्यक्तियों के दिन प्रतिदिन के व्यवहार व सन्दर्भों से उपजी सामाजिक वास्तविकता का बोध करने हेतु परिणामात्मक उपागम व वस्तुनिष्ट उपागम उपयुक्त नहीं थे तो सूक्ष्म समाजशास्त्री उपागम का उदय हुआ। इसी प्रकार किसी भी विषय को तात्कालिक स्थितियां, आवश्यकताएं व विचारों द्वारा जन्म मिलता है समाजशास्त्र भी इन्ही कुछ परिस्थितियों का परिणाम है।

यूरोप में जन्मा यह विषय अमेरिका में अपने सम्पूर्ण आकार में आता है और एक विषय के रूप में पूर्णतः स्थापित हो जाता है। आज हम जिस समाजशास्त्र का अध्ययन करते हैं वह अमेरिकी समाजशास्त्र की ही देन है। विभिन्न नामों से जाना जाने वाला व भिन्न-भिन्न कार्यक्षेत्र को समाहित करने वाले इस शास्त्र को अमेरिका में एक नाम व निश्चित कार्य क्षेत्र मिला। उपर्युक्त विवरण के द्वारा हम जान पाये कि समाजशास्त्र के उद्भव का कारण थे किन परिस्थितियों ने इसको जन्म दिया अमेरिका में इसका एक विषय के रूप में किस प्रकार अध्ययन प्रारम्भ हुआ और कौन अमेरिका में इसके अग्रदूत के रूप में रहे।