सामाजिक उद्विकास के कारक - Factors of Social Evolution

सामाजिक उद्विकास के कारक - Factors of Social Evolution

आगबर्न ने सामाजिक उद्विकास की चार कारकों का उल्लेख किया है.


1. आविष्कार (Invention) समाज में परिवर्तन आविष्कार के कारण होते हैं। समाज में होने वाले यह अविष्कार मानसिक योग्यता, मांग अन्य सांस्कृतिक तत्वों पर आधारित होते हैं। समाज में इन तीनों चीजों की उपलब्धि जितनी अधिका वह समाज उतने ही अधिक नए-नए अविष्कार करेगा और इस अविष्कार के परिणामस्वरुप समाज में परिवर्तित होगा।


2. संचय (Accumulation) किसी भी समाज में संस्कृति के तत्वों का जैसे-जैसे संचय बढ़ता जाता है। वह संस्कृति उतनी ही समृद्ध होती जाती है और इससे अविष्कार के भी अवसर बढ़ते हैं।


3. प्रसार (Diffusion) - एक समाज के द्वारा किए गए आविष्कार का प्रसार दूसरे समाज में भी होता है। जिससे सामाजिक विकास एवं परिवर्तन व्यापक एवं शीघ्र होते हैं। 4. सामंजस्य (Adjustment) - विभिन्न समाजों में तथा अपने ही समाज में विभिन्न समूहो, संगठनों एवं संस्थाओं के बीच सामंजस्य बढ़ने पर भी परिवर्तन तीव्रता से होते हैं क्योंकि एक अंग में परिवर्तन दूसरे में परिवर्तन पैदा करता है।