कॉम्ट के समाजशास्त्र की विशेषताएं - Features of Comte's Sociology

कॉम्ट के समाजशास्त्र की विशेषताएं - Features of Comte's Sociology


अगस्त कॉम्ट ने विज्ञानों का वर्गीकरण किया और इस वर्गीकरण में समाजशास्त्र को सर्वोच्च स्थान दिया कॉम्ट ने समाजशास्त्र को स्थितिशास्त्र एवं गतिशास्त्र दो भागों में विभाजित किया। वह समाजशास्त्र को प्रत्यक्षवादी बनाना चाहता था और उसका विश्वास था कि प्रत्यक्षवादी अध्ययन की सहायता से ही समाज का अध्ययन किया जा सकता है। प्रत्यक्षवादी अध्ययन पद्धति के द्वारा ही उसने समाजशास्त्र की विशेषताओं को अधिक स्पष्ट किया है। कॉम्ट का प्रमुख उद्देश्य समाजशास्त्र को वैज्ञानिक स्तर तक पहुंचाना। इसलिए उन्होंने समाजशास्त्र की निम्न विशेषताएं निर्धारित की हैं


1. मानव प्रकृति का विज्ञान (Science of Human Nature)


समाजशास्त्र एक सामाजिक विज्ञान है, जिसके माध्यम से हमें मानव प्रकृति का ज्ञान प्राप्त करने में सहायता मिलती है। कॉम्ट के अनुसार समाजशास्त्र नवीनतम विज्ञान है। विज्ञानों के सोपान परंपरा में सर्वोच्च है।

समाज का अध्ययन करने के लिए समाजशास्त्री को गणितशास्त्र, खगोलशास्त्र, भौतिकशास्त्र, रसायनशास्त्र और प्राणीशास्त्र के सामान्य किंतु महत्वपूर्ण सिद्धांतों की जानकारी होनी चाहिए। जिससे कि हम मनुष्य की मूल प्रवृत्ति एवं उसके स्वभाव के बारे में समुचित और यथार्थ ज्ञान प्राप्त कर सकें। क्योंकि मनुष्य ही सामाजिक अस्तित्व का आधार है। मानव की प्रकृति स्वयं में इतनी जटिल है कि इसको जानने के लिए हमारे लिए विज्ञानों का अध्ययन और ज्ञान आवश्यक है। इसलिए कॉम्ट ने मनुष्य की प्रकृति की विशेषताएं निर्धारित की है वह इस तरह से हैं मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। सामाजिक प्राणी होने के साथ-साथ व भावना प्रधान भी है। मनुष्य में स्वाभाविक रूप से भिन्नता पाई जाती हैं। भिन्नताएं तीन प्रकार की होती हैं, शारीरिक, बौद्धिक और नैतिक प्रत्येक मनुष्य में स्वार्थ और पदार्थ दोनों भावनाएं पाई जाती है। मनुष्यों में सार्वभौमिकता के गुण भी पाए जाते हैं।

मानव की प्रकृति अत्यंत जटिल है। इसके बारे में ज्ञान प्राप्त करना इतना सरल नहीं है। जितना की लोग समझते हैं।

इसलिए कॉम्ट का विचार है कि मानव की प्रकृति को समझने के लिए मानव के बारे में अधिक से अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए अन्य विज्ञानों के सहयोग की आवश्यकता होती है। इसलिए हमें अन्य विज्ञानों के बारे में जानकारी होनी चाहिए जिससे कि मानव की वास्तविक प्रकृति को समझा जा सके।


2. अमूर्त विज्ञान (An Abstract Science)


कॉम्ट का समाजशास्त्र एक अमूर्त विज्ञान है। समाजशास्त्र में समाज का अध्ययन करने का मुख्य विषय सैद्धांतिक होना चाहिए इसलिए समाजशास्त्र की रुचि तथ्यों में न होकर नियमों की खोज में होनी चाहिए। अगस्त कॉम्ट का कहना है कि समाजशास्त्र समाज का अमूर्त अर्थात गुणात्मक विज्ञान है। जो समस्त सामाजिक विज्ञानों के मूलभूत गुणों की खोज करता है। यह केवल आर्थिक, धार्मिक, राजनीतिक, वैधानिक घटनाओं का विज्ञान नहीं है

बल्कि यह समाज में कार्य करने वाले मूल सिद्धांतों के बारे में ज्ञान प्राप्त करने वाला विज्ञान है। कॉम्ट का मानना है कि समाज में अराजकता का कारण सामाजिक व्यवस्था एवं प्रगति के नियमों के प्रति लोगों की अज्ञानता है। इसलिए यह आवश्यक है कि समाजशास्त्र वह कार्य करे जिससे की • लोगों की अज्ञानता को मिटाया जा सके और नए नियमों को खोजा जा सके।


3. वैषयिक विज्ञान (Objective Science)


समाजशास्त्र एक प्रत्यक्षवादी विज्ञान है। इसके द्वारा सामाजिक घटनाओं एवं तथ्यों का निष्पक्ष वैज्ञानिक अध्ययन किया जाता है। वैज्ञानिक अध्ययन किए जाने के कारण समाजशास्त्र में भावनाओं का कोई स्थान नहीं है। इसलिए आवश्यक है कि अन्य विज्ञानों की भांति मानव बुद्धि का भी विकास होना चाहिए। समाजशास्त्र द्वारा समाज का अध्ययन करने के लिए आवश्यक नहीं है कि वह उन सब वैज्ञानिक पद्धतियों उपकरणों और प्रणालियों का प्रयोग करें जिसका की प्रयोग अन्य विज्ञानों में किया जाता है। इसके स्थान पर कॉम्ट ऐतिहासिक पद्धति के प्रयोग को समाजशास्त्र में अधिक उपयोगी मानते हैं।


4. समन्वयात्मक विज्ञान (Integrative Science)


अगस्त कॉम्ट समाजशास्त्र को समन्वयात्मक विज्ञान मानते हैं। यह समाज का समग्र रूप से अध्ययन करता है। सामाजिक जीवन के विभिन्न पक्ष एक दूसरे से संबंधित एवं एक दूसरे पर आश्रित होते हैं। इसलिए इनका अध्ययन एक साथ किया जाना चाहिए। समाजशास्त्र एक समन्वयात्मक विज्ञान इस अर्थ में भी है कि वह अपने से पहले के सभी विज्ञानों के द्वारा प्रतिपादित नियमों एवं उनके सिद्धांतों पर आधारित है। यही कारण है कि कॉम्ट ने विज्ञानों के संस्तरण में समाजशास्त्र को सबसे ऊपर रखा है। सबसे ऊपर रहने की यह स्थिति इस बात का प्रमाण है कि यह विज्ञान अपने से पहले सभी विज्ञानों के प्रमुख नियमों एवं सिद्धांतों को अपने में समेटे हुए हैं। कॉम्ट ने लिखा है कि “इस अंतिम विज्ञान में हम तब तक कोई प्रगति नहीं कर सकते जब तक हमें बाहरी दुनिया और व्यक्तिगत जीवन के संबंध में पर्याप्त अमूर्त ज्ञान एवं इन नियमों का सामाजिक घटनाओं के विशिष्ट नियमों पर पड़ने वाले प्रभाव को परिभाषित करने के लिए, प्राप्त न हो जाएगा।”


5. भविष्यवाणी करने वाला विज्ञान (Predictive Science)


कॉम्ट का कहना है कि विज्ञान में भविष्यवाणी करने की क्षमता होती है। जो भविष्यवाणी नहीं कर सकता वह विज्ञान नहीं है।

जिस प्रकार भौतिक विज्ञान में भविष्यवाणी करने की क्षमता होती है। उसी प्रकार समाजशास्त्र में भी भविष्यवाणी करने की क्षमता है। समाजशास्त्र में सामाजिक घटनाओं का अध्ययन सूक्ष्म, निरीक्षण, परीक्षण और वर्गीकरण के आधार पर किया जाता है। जो उसके भविष्य की ओर संकेत करता है। इसलिए यह ऐतिहासिक और वर्तमान घटनाओं के आधार पर भविष्य के बारे में निश्चित भविष्यवाणी करने की क्षमता रखता है। अन्य विज्ञानों की तुलना में समाजशास्त्र में भविष्यवाणी करने की क्षमता कम है। फिर भी यदि अन्य परिस्थितियां सामान्य रहे तो समाजशास्त्रीय नियम भी अन्य विज्ञानों के नियमों के समान सत्य सिद्ध होते हैं और उनके बारे में की गई भविष्यवाणियां भी सत्य सिद्ध होंगी


6. सामाजिक पुनर्निर्माण का विज्ञान (Science of Social Reconstruction)


कॉम्ट समाजशास्त्र को एक व्यावहारिक विज्ञान मानते हैं। उनका कहना है कि समाजशास्त्र का मूल उद्देश्य केवल वैज्ञानिक आधार पर सामाजिक घटनाओं के बारे में यथार्था की जानकारी प्राप्त करना नहीं है बल्कि इसके आधार पर सामाजिक पुनर्निर्माण करना भी है। कॉम्ट का कहना है कि भौतिक पदार्थों का अध्ययन करने वाले वैज्ञानिक भले ही मानव कल्याण संबंधी विचारों को त्याग सकते हैं किंतु मानव की सामाजिक क्रियाओं का अध्ययन करने वाले विज्ञानों को मनुष्य को सुखी बनाने के विचारों को नहीं त्यागना चाहिए।


कॉम्ट के अनुसार वैज्ञानिक को मात्र 'क्या है' बता कर ही चुप नहीं रहना चाहिए वरन् "क्या उचित है” को भी स्पष्ट करना चाहिए। कॉम्ट का मत है कि विज्ञान मनुष्य के लिए है न कि मनुष्य विज्ञान के लिए। इसलिए समाजशास्त्र का यह कर्तव्य है कि वह पुनर्निर्माण में योगदान दे। समाजशास्त्री मानवता के सेवक बने यही समाजशास्त्र की चरम सार्थकता है।”