सामाजिक स्तरीकरण की विशेषताएं - Features of social stratification
सामाजिक स्तरीकरण की विशेषताएं - Features of social stratification
सामाजिक स्तरीकरण को और अधिक स्पष्ट रूप में जानने के लिए उनकी विशेषताओं की व्याख्या को देखा जा सकता है। सामाजिक स्तरीकरण निम्नलिखित विशेषताएं इस प्रकार हैं
1. सामाजिक प्रकृति
सामाजिक स्तरीकरण की प्रकृति सामाजिक है। यह केवल व्यक्तियों तक सीमित नहीं है अपितु संपूर्ण समाज स्तरीकृत व्यवस्था के अंतर्गत ही संचालित होता है। मूल्य एवं व्यवहार के तरीके भी स्तरीकरण का आधार हो सकते हैं। स्तरीकरण के प्रमुख आधार आयु, रंग, लिंग भेद ही नहीं होते बल्कि सामाजिक व्यवस्था में प्राप्त पद भी स्तरीकरण का आधार हो सकता है। विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक संस्थाएं समाज में विभाजन उत्पन्न करती आई हैं।
2. प्राचीन व्यवस्था -
सामाजिक स्तरीकरण बहुत ही प्राचीन व्यवस्था है। प्राचीन ग्रंथों के संदर्भ में अध्ययन करें तो कहीं न कहीं वर्ण व्यवस्था के आधार पर स्पष्ट स्तरीकृत व्यवस्थाओं का उल्लेख मिलता है। अतः इस तथ्य को नहीं नकारा जा सकता की स्तरीकरण पुरातन एवं प्राचीन व्यवस्था है। कार्ल मार्क्स का कथन है कि इतिहास के हर काल में समाज दो वर्गों में विभाजित रहा है।
3 सार्वभौमिकता
आज तक के विभिन्न समाजों का यदि अध्ययन किया जाए, इतिहास में कहीं भी ऐसे समाज का उल्लेख नहीं मिलता है, जहां पर स्तरीकरण की व्यवस्था देखने को ना मिलती हो। योग्यता, शारीरिक बल अथवा अन्य किसी विशेषता के आधार पर समाज के विभिन्न वर्गों में स्तरीकरण देखने को मिलता है। बोटोमोर के अनुसार समाज का वर्गों अथवा स्तरों में विभाजन प्रतिष्ठा एवं शक्ति का सोपान बनता है, यह रचना का एक सार्वभौमिक तत्व है।" यहां तक वर्ग विहीन समाज का दावा करने वाले साम्यवादी समाजों में भी यह प्रक्रिया पायी जाती है।
सामाजिक स्तरीकरण अत्यंत प्राचीन कालीन व्यवस्था है, अतः विश्व के सभी समाजों में कहीं न कहीं विभिन्न कालों में सामाजिक स्तरीकरण के स्वरूप देखने को मिलते हैं। यह स्वरूप विभिन्न समाजों में अलग-अलग रूप में दिखाई पड़ते हैं। जिस क्षेत्र की सांस्कृतिक व्यवस्था जैसी होगी वहां पर स्तरीकरण का स्वरूप वैसा ही प्रतीत होगा। प्राचीनतम समाज में की बात करें तो यौन भेद के आधार पर ही सामाजिक स्तरीकरण होता था। जहां पर पुरुषों को शक्तिशाली माना जाता था।
4. सामाजिक स्तरीकरण की प्रकृति सामाजिक है
सामाजिक स्तरीकरण कुछ व्यक्तियों तक ही सीमित नहीं होता वरन संपूर्ण समाज में व्याप्त होता है। समाज के सभी लोग समान मूल्यों एवं व्यवहार के समान प्रतिमानों को स्वीकार करते हैं। सामाजिक स्तरीकरण को आयु, रंग एवं योनी भेद के आधार पर ही नहीं वरन समाज में व्यक्तियों को प्राप्त विभिन्न पदो एवं प्रस्थितियों के आधार पर भी समझा जा सकता है। समाजीकरण के द्वारा व्यक्ति सामाजिक मानदंडों को सीखता है और अचेतन रूप में स्तरीकरण को स्वीकार करता है। सामाजिक संस्थाएं जैसे धर्म, शिक्षा, परिवार, विवाह एवं राजनीति आज भी समाज में स्तरीकरण उत्पन्न करते हैं।
5. चेतन प्रक्रिया
सामाजिक स्तरीकरण एक चेतन प्रक्रिया है। इसका निर्माण जागरूक दशा में योजनाबद्ध रूप से किया जाता है। साधारणतया यह कार्य समाज के अभिजन वर्ग द्वारा होता है।
6. समाज का विभाजन
सामाजिक स्तरीकरण समाज को विभिन्न वर्गों में विभाजित करने की व्यवस्था है। इसके द्वारा समाज अनेक उच्च से निम्न वर्गों में बट जाता है तथा प्रत्येक वर्ग की निश्चित स्थिति होती है। साथ ही इस स्थिति से संबंधित कार्य व सुविधाएं भी प्राप्त होती है।
7. क्षैतिज विभाजन
सामाजिक स्तरीकरण के द्वारा समाज का क्षैतिज विभाजन होता है। विभाजन का अभिप्राय उस विभाजन से है, जहां समाज विभिन्न वर्गों में बट जाता है, प्रत्येक वर्ग के लोगों की स्थिति में समानता पाई जाती है। जैसे- जातिगत स्तरीकरण के अंतर्गत एक जाति के लोगों की स्थिति में समानता पाई जाती है।
8. श्रेष्ठता एवं अधिनता के संबंध
सामाजिक स्तरीकरण समाज को उच्च एवं निम्न अनेक वर्गों में बांटती है। लेकिन यह वर्ग एक दूसरे से अलग नहीं होते, बल्कि संबंधित होते हैं। एक के अभाव में दूसरे की कल्पना नहीं की जा सकती। उदाहरणस्वरुप सामाजिक स्तरीकरण का एक रूप वर्ग स्तरीकरण के अंतर्गत पेशा के आधार पर उच्च एवं निम्न अनेक वर्ग हैं, परंतु वे सामाजिक संबंध से जुड़े होते हैं। इसी तरह अर्थ के आधार पर पूंजीपति वर्ग एवं श्रमिक वर्ग हैं और वे श्रेष्ठता एवं अधीनता के संबंध से जुड़े होते हैं।
9. मनोवृति का निर्धारण
सामाजिक स्तरीकरण की एक विशेषता यह है कि इसके द्वारा व्यक्ति के मनोवृति का निर्धारण संभव हो पाता है। व्यक्ति जिस जाति, वर्ग व प्रस्थिति समूह का सदस्य होता है, उसके विचार एवं मनोवृति भी उसी के अनुकूल बन जाता है। यही कारण है कि दो भिन्न वर्ग के लोगों की मनोवृति में भिन्नता पाई जाती है।
10. असमानता का प्रतीक
स्तरीकरण समाज में असमानता उत्पन्न करता है। ट्यूमिन के अनुसार, “सामाजिक स्तरीकरण समाज में असमानता उत्पन्न करता है व्यक्ति का रहन-सहन जीने की जीवनशैली के आधार पर स्तरीकरण के विभिन्न स्वरूप दृष्टिगोचर होते हैं।
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